Lok Sabha elections 2019 now after 48 years Ajit Singh will contest these election on Muzaffarnagar seat after 48 years of his father choudhary charan singh - लोकसभा चुनाव 2019: पिता के 48 साल बाद अब अजित सिंह मुजफ्फरनगर से मैदान में DA Image

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लोकसभा चुनाव 2019: पिता के 48 साल बाद अब अजित सिंह मुजफ्फरनगर से मैदान में

Ajeet singh (photo- Hindustan Times)

पूर्व मुख्यमंत्री और बाद में प्रधानमंत्री बने चौधरी चरण सिंह मुजफ्फरनगर में 1971 में अपने पहले लोकसभा चुनाव में हार गए थे। इस हार के 48 साल बाद आखिरकार उनके पुत्र और छोटे चौधरी के नाम से प्रसिद्ध चौधरी अजित सिंह मुजफ्फरनगर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए महागठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में आ गए हैं। उनकी माता गायत्री देवी भी जिले की दूसरी सीट कैराना (अब शामली जिले में) लोकसभा सीट से सांसद बन चुकी हैं। तब चौधरी चरण सिंह की हार दो बड़े गुर्जर नेताओं नारायण सिंह व हुकुम सिंह के विरोध के कारण हुई थी। अब 48 साल बाद भी चौधरी अजित सिंह की जीत का दारोमदार गुर्जर वोटों पर ही टिका है। 

चौधरी चरण सिंह ने 1967 में भारतीय क्रांति दल (बीकेडी) का गठन किया था और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि उनका कार्यकाल कुल 328 दिन का ही रहा था। इसके बाद वह फिर दोबारा फरवरी 1970 में मुख्यमंत्री बने इस बार भी उनका कार्यकाल केवल 225 दिन का रहा था। बीकेडी के टिकट पर 1969 के विधानसभा चुनावों में जिले की सभी आठ सीटों पर चौधरी चरण सिंह ने अपने उम्मीदवार विजयी बनवाए। जातीय समीकरण भी बनाया। 

इसके बाद उन्होंने 1971 में केंद्र की राजनीति की ओर कदम बढ़ाते हुए पहला लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से की। कांग्रेस ने उनके खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारकर सीपीआई उम्मीदवार ठा. विजयपाल सिंह को समर्थन दिया। उन्होंने चौधरी चरण सिंह को 50 हजार वोट से हरा दिया। उनकी हार में सबसे अहम भूमिका उस समय के बड़े गुर्जर नेता नारायण सिंह और उभरते हुए नेता हुकुम सिंह ने निभाई थी। हालांकि वीरेंद्र वर्मा बीकेडी के खतौली से विधायक थे, लेकिन उन पर भी भीतरघात के आरोप लगे थे। 

चौधरी चरण सिंह की हार के बाद वीरेंद्र वर्मा भी कांग्रेस में चले गए थे। मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट हारने के बाद ही चौधरी चरण सिंह ने 1977 में बागपत लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था और जीतकर पहले गृहमंत्री और फिर देश के प्रधानमंत्री बने। उन्होंने 1980 में अपनी पत्नी गायत्री देवी को मुजफ्फरनगर की दूसरी लोकसभा कैराना सीट (अब शामली जिले में) से चुनाव लड़ाया था। तब भी उनका मुकाबला बड़े गुर्जर नेता नारायण सिंह ने ही किया था, लेकिन गायत्री देवी करीब साठ हजार वोट से विजयी रही थी। चौधरी अजित सिंह ने एक साल पहले ही मुजफ्फरनगर सीट से चुनाव लड़ने की योजना बना ली थी और यहां पर पहला कार्यक्रम पिछले साल 13 फरवरी को किया था। इसमें रात्रि विश्राम व जनसंवाद भी शामिल था। 

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उन्हें परंपरागत समर्थक जाट मतदाताओं के अलावा सपा समर्थक और बसपा के परांपरागत वोटों के मिलने का भरोसा है। हालांकि च अजित सिंह की जीत का दारोमदार जाट, एससी और मुस्लिम मतों के साथ ही गुर्जर वोट बैंक पर भी रहेगा। गुर्जर बिरादरी के वोट बहुतायत में पिछले दो तीन चुनावों में भाजपा को मिलते रहे हैं। भाजपा ने अभी चौधरी अजित सिंह के खिलाफ प्रत्याशी की अधिकृत रूप से घोषणा नहीं की है, पर चौधरी अजित सिंह जैसे बड़े नाम के बाद इस सीट पर देश की निगाहें लगी रहेंगी।

चुनावी रणनीति

- तब चौधरी चरण सिंह की हार दो बड़े गुर्जर नेताओं के विरोध के कारण हुई थी .

- चौधरी अजित सिंह की जीत का दारोमदार भी गुर्जर वोटों पर ही आकर टिका .

- माता गायत्री देवी मुजफ्फरनगर की कैराना लोस सीट से 1980 में बनी थीं सांसद.

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