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अखिलेश यादव को छोड़ एनडीए गठबंधन में जाएंगे जयंत चौधरी? चार सीटों पर BJP-RLD में बातचीत की चर्चा तेज

पंजाब, बंगाल के बाद यूपी में भी इंडिया गठबंधन टूटने की कगार पर पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी के साथ लंबे समय से गठबंधन में शामिल जयंत चौधरी की पार्टी रालोद एनडीए का दामन थाम सकता है।

अखिलेश यादव को छोड़ एनडीए गठबंधन में जाएंगे जयंत चौधरी? चार सीटों पर BJP-RLD में बातचीत की चर्चा तेज
Yogesh Yadavलाइव हिन्दुस्तान,लखनऊTue, 06 Feb 2024 11:45 PM
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यूपी में भी सपा और कांग्रेस का इंडिया गठबंधन बिखरता दिख रहा है। समाजवादी पार्टी के साथ लोकसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही जयंत चौधरी की पार्टी आरएलडी एनडीए गठबंधन में शामिल हो सकती है। समाचार चैनलों की रिपोर्ट के मुताबकि भाजपा और रालोद के बीच बातचीत चल रही है। भाजपा ने रालोद को चार सीटों का आफर दिया गया है। रालोद सात सीटें मांग रही है। सपा ने रालोद को सात सीटें पहले ही दे रखी हैं। अगर जयंत चौधरी इंडिया गठबंधन को छोड़कर एनडीए में जाते हैं तो सबसे बड़ा झटका अखिलेश यादव को लगेगा। सपा और रालोद लगातार कई चुनाव साथ लड़ते आ रहे हैं। सपा ने ही जयंत चौधरी को राज्यसभा भी भेजा है। 

राहुल गांधी की न्याय यात्रा में शामिल होंगे अखिलेश यादव, न्योता स्वीकारा

टीवी चैनलों के अनुसार भाजपा और रालोद के बीच गठबंधन और सीटों पर तालमेल के लिए चल रही बातचीत अंतिम दौर में है। चर्चा है कि आरएलडी को बागपत, कैराना, मथुरा और अमरोहा सीट बीजेपी ने ऑफर की है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव को कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी की यात्रा में शामिल होने का न्योता स्वीकारना एक तरह से रालोद के संभावित झटके से उबरने की कोशिश मानी जा रही है। अखिलेश ने मंगलवार की शाम ही कांग्रेस की यात्रा में शामिल होने और राहुल गांधी के साथ साझा सभा करने का न्योता स्वीकारा है।

तीन बैठकों के बाद कुछ दिन पहले ही सपा और रालोद के बीच सीटों पर बातचीत फाइनल हुई थी। सपा ने पिछली बार की तुलना में रालोद को दोगुना से ज्यादा सीटें दी थी। पिछले लोकसभा चुनाव में रालोद ने तीन सीटों पर चुनाव लड़ा था। सपा ने रालोद को इस बार सात सीटें दी थीं। तय हुआ कि बागपत, मथुरा, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, अमरोहा और कैराना लोकसभा सीट पर रालोद के प्रत्याशी उतरेंगे। पिछले  लोकसभा चुनाव में सपा ने बसपा के साथ गठबंधन किया था। इस दौरान रालोद को भी उनके साथ रही और तीन सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। पिछले विधानसभा चुनाव में भी रालोद सपा के साथ थी और उसे 14 सीटें दी गई थीं।

15 साल बाद भाजपा से होगा तालमेल

अगर रालोद एनडीए में जाता है तो 15 साल बाद भाजपा के साथ तालमेल होगा। 2009 के लोकसभा चुनाव रालोद ने भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। पांच सांसद रालोद के बने थे। बाद में अजित सिंह यूपीए में चले गए थे और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री बने थे। फिलहाल एनडीए से तालमेल पर रालोद नेता अभी खुल कर नहीं बोल रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में रालोद का पलड़ा भारी रहा। लेकिन सपा ने चतुराई से रालोद के सिंबल पर अपने प्रत्याशियों को लड़ा दिया। आगामी लोकसभा चुनाव में भी सपा यही फार्मूला अपनाना चाहती है। इसके लिए रालोद तैयार नहीं है। कहा जाता है कि मेरठ, मुजफ्फरनगर, कैराना और बिजनौर की सीटों पर इसी पर पेच फंसा हुआ है। 

भाजपा से नजदीकी की चर्चाएं सरगर्म
यह कोई पहला मौका नहीं है कि एनडीए में रालोद के शामिल होने की चर्चा चली हो। यह तो काफी समय से हो रहा है। रालोद मुखिया जयंत चौधरी जब-तब खंडन करते रहे। सोमवार को ही जयंत चौधरी ने यूपी के बजट पर आलोचनात्मक टिप्पणी की थी। मंगलवार को एनडीए से गठबंधन की चर्चा चल पड़ी। 

इन सीटों की चर्चा
लोकसभा सीट कैराना, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, हाथरस सुरक्षित, बिजनौर और मथुरा समेत सात सीटों पर एनडीए से बातचीत की चर्चाएं हैं। इनमें चार सीटों कैराना, बागपत, अमरोहा और मथुरा पर सहमति की बात सियासी हलकों में है। 

12 फरवरी की छपरौली का कार्यक्रम भी स्थगित
इन सब गहमागहमी के चलते छपरौली में 12 फरवरी को चौधरी अजित सिंह की प्रतिमा का अनावरण समारोह एवं बड़ी जनसभा का कार्यक्रम भी स्थगित कर दिया गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इसी दौरान जयंत चौधरी के सभी सीटों पर प्रत्याशियों के चयन की घोषणा की संभावना जताई जा रही थी लेकिन अब सबकुछ आगामी समय के लिए स्थगित कर दिया गया है। 

वहीं रालोद के महासचिव और राष्ट्रीय प्रवक्ता त्रिलोक त्यागी का कहना है कि रालोद के एनडीए के साथ जाने की सिर्फ कयासबाजी है। भाजपा हर चुनाव से पहले ऐसी अटकलों को हवा देती है। रालोद गठबंधन का हिस्सा है और उसके साथ ही रहेगा।

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