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4 जून, 2020|12:46|IST

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Lockdown Impact: घर आंगन में फिर फुदकने लगी है नन्ही गौरैया

house sparrow delhi and lockdown impact

लॉकडाउन के दौरान ध्वनि, जल और वायु प्रदूषण का स्तर गिरने से आम लोगों के साथ साथ पंक्षियों को भी सुकून मिला है। नतीजन आज के दौर में दुर्लभ पक्षियों में गिनी जाने वाली गौरैया घर आंगन में फिर से फुदकती दिखाई देने लगी है।

सालों बाद इस तरह चिड़ियों की चहचहाहट लोगों के दिलों को काफी सुकून पहुंचा रही है। लोगों का मानना है कि प्रदूषण का स्तर गिरने के चलते पक्षियों को नया जीवनदान मिला है, हालांकि मोबाइल फोन टावर से पैदा विकिरण यानी रेडिएशन को गौरेया समेत अन्य पक्षियों के लिये सर्वाधिक नुकसानदेह माना गया है।

चिडियों की चहचहाहट से खुश हुए लोग:
सुबह के समय चिड़ियों की चहचहाहट से लोगबाग गदगद दिखाई दे रहे हैं, लोग इनके लिए दाना-पानी का इंतजाम करते नजर आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पक्षियों की चहचहाहट तो सुनाई दे रही थी लेकिन शहरी इलाकों में गौरैया समेत अन्य पक्षियों की तादाद में हाल के वर्ष में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही थी। कई लोग तो चिड़ियों को देखने के लिए सुबह के समय अपने घरों की छतों पर पहुंच जाते हैं।

 

प्रदूषण की फैक्ट्रियां बंद होने से मिल रहा नया जीवन-

नगर में एक गृहणी गीता ने कहा कि सालों बाद चिड़ियों की चहचहाहट सुनने को मिल रही है, इनकी आवाज सुनकर दिल को काफी सुकून मिल रहा है। प्रदूषण और मोबाइल टावरों के रेडिएशन ने चिडियों की कई प्रजातियों को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। सालों से चिडियां देखने को नहीं मिल रही थी लेकिन लॉकडाउन ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लॉकडाउन के कारण देश में ऐसी सभी फैक्ट्रियां जो प्रदूषण फैलाने का काम करती है, पूरी तरह बंद है, इससे हमारा वातावरण साफ हुआ है और पक्षियों को भी नया जीवन मिला है। सरकार को चाहिए कि लॉकडाउन के बाद प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों पर कार्रवाई करे ताकि लुप्त हो रहे इन पक्षियों को नया जीवन मिल सके।

house sparrow returns

 

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कारोबारी सुधीर कुमार ने कहा कि निसंदेह कोरोना वायरस लोगों के जीवन के साथ साथ अर्थव्यवस्था के लिए घातक है लेकिन शायद मौजूदा हालात हमें प्रकृति से अधिक छेड़छाड़ नहीं करने की चेतावनी दे रहे हैं। प्रदूषण को कम करने में सहायक कई पंक्षी आज हवा में घुलती विषैली गैस और मोबाइल टावरों के रेडिएशन से विलुप्ति की कगार पर हैं। लॉकडाउनसे वैसे तो मोबाइल रेडिएशन तो जस का तस है लेकिन हवा स्वच्छ होने और शोरशराबा घटने का असर पक्षियों पर साफ दिखाई देता हैं। घटे प्रदूषण ने इन नन्हीं सी जानों को फिर से नया जीवन दिया है।

इस दौरान सभी फैक्ट्रियां समेत कई प्रतिष्ठानों को पूरी तरह बंद कर  दिया है। पूरे देश में फैक्ट्रियों के बंद होने से प्रदूषण का स्तर भी काफी नीचे तक गिर गया है। वातावरण स्वच्छ हो गया है। सुबह के समय चलने वाली हवाएं भी लोगों को तरोताजा महसूस करा रही है। कई नदियों का पानी भी बिल्कुल साफ हो गया है। रेडिएशन पक्षियों की जान का दुश्मन बना हुआ है। इनके चलते हम चिड़ियों की कई प्रजातियों को खो चुके हैं, गिद्ध तो सालों पहले लुप्त हो गए, उसके बाद गौरेया भी दिखाई देने बंद हो गई थीं। 

व्यवसायी सुखचैन वालिया ने कहा कि गुरसल के नाम से मशहूर चिड़िया भी अब दिखाई नहीं देती, इनका सबसे बडा दुश्मन मनुष्य ही बना हुआ है, उसने अपने आराम दायक जीवन के लिए ऐसी नन्हीं जी जानों को मौत के मुंह में धकेल दिया है। सरकार को पक्षियों की प्रजाति को बचाने के लिए कठोर कदम उठाने होंगे अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब लोग पक्षियों की आवाज सुनने के लिए भी तरस जाएंगे। 

उन्होने कहा “ मैंने आज कई सालों बाद अपने घर की छत पर गौरेया चिड़िया के कई जोडों को एक साथ देखा, उन्हें देखकर मन खुश हो गया। मैं और मेरे परिवार ने उनके दाना-पानी का इंतजाम किया ताकि वे भूख व प्यासे न रहें। इसके अलावा आसमान में उड़ते तोते व गुरसल भी दिखाई दिए हैं।”

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  • Web Title:Lockdown Impact: little gauraiya or house sparrow is bursting at houses and courtyards again due to better environment