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Hindi News उत्तर प्रदेश2019 के मुकाबले कम मतदान ने बढ़ाई दलों-उम्‍मीदवारों की चिंता, हार-जीत का अंतर होगा कम

2019 के मुकाबले कम मतदान ने बढ़ाई दलों-उम्‍मीदवारों की चिंता, हार-जीत का अंतर होगा कम

LS चुनाव के दूसरे चरण से बेहतर उत्साह बरेली-आंवला और बदायूं लोकसभा सीट नजर आया। हालांकि 2019 के चुनाव के मुकाबले बरेली-आंवला और बदायूं सीट पर कम मतदान हुआ। इसने राजनीतिक दलों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।

2019 के मुकाबले कम मतदान ने बढ़ाई दलों-उम्‍मीदवारों की चिंता, हार-जीत का अंतर होगा कम
Ajay Singhआमोद कौशिक,बरेलीWed, 08 May 2024 05:44 AM
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Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण से बेहतर उत्साह बरेली-आंवला और बदायूं लोकसभा सीट नजर आया। हालांकि 2019 के चुनाव के मुकाबले बरेली-आंवला और बदायूं सीट पर कम मतदान हुआ। कम मतदान ने राजनीतिक दलों की चिंता जरूर बढ़ा दी। हालांकि तपती गर्मी को मतदान में आंशिक गिरावट के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। मतदान के घटे ग्राफ का असर उम्मीदवारों की हार-जीत के अंतर को कम कर सकता है। हालांकि हिन्दू और मुस्लिम बाहुल्य बूथों पर समान तौर पर मतदान कम होने से राजनीतिक अलग-अलग मतलब निकाल रहे हैं।
 
मंगलवार को सुबह 7 बजे बरेली-आंवला और बदायूं सीट पर मतदान शुरू हुआ था। मतदान की शुरूआत से ही वोटरों में उत्साह की कमी साफ दिखाई दी। हिन्दु-मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर मतदाताओं की नीरसता साफ दिखाई दी। 2019 में बरेली में 59.34, आंवला में 58.81 और बदायूं में 57.15 फीसदी मतदान हुआ था। इस बार तमाम कोशिश के बाद भी मतदाताओं ने वोटिंग को लेकर पहले जैसा उत्साह नहीं दिखाया। मंगलवार शाम छह बजे तक बरेली में 57.88, आंवला में 57.08 और बदायूं में 54.05 फीसदी मतदान हुआ। बरेली में 1.46, आंवला में 1.73 और बदायूं में 3.1 फीसदी मतदान में गिरावट दर्ज की गई है। सभी बूथों पर करीब-करीब एकसा ही ट्रेंड नजर आया। तीनों लोकसभा सीटों पर मुस्लिम बूथों पर मतदाताओं में उत्साह पहले जैसा नहीं था। 

मतदान का ग्राफ गिरने से असर उम्मीदवारों की हार जीत पर पड़ना तय है। 2019 में बरेली-आंवला और बदायूं लोकसभा सीट पर भाजपा ने कब्जा किया था। बरेली सीट को भाजपा का मजबूत किला माना जाता है। इस सीट पर भाजपा के संतोष गंगवार सांसद रह चुके हैं। जबकि आंवला सीट पर 10 साल से भाजपा के धर्मेंद्र कश्यप सांसद हैं। बदायूं सीट 2019 में भाजपा ने सपा से छीनी थी। 2019 में बरेली में 167282, आंवला में 113743 और बदायूं में 18454 वोटों से भाजपा उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी। इस बार 2019 के मुकाबले से वोट कम पड़े हैं। बदायूं में सबसे ज्यादा मतदान में गिरावट आई है। जो मुकाबले को बहुत नजदीकी बना सकता है। बरेली और आंवला लोकसभा सीट पर भी हार-जीत का अंतर होना तय माना जा रहा है। 

दलित मतदाताओं के बंटने से उलझे समीकरण 
बरेली-आंवला और बदायूं लोकसभा सीट पर दलित मतदताओं ने एकतरफा मतदान करते नजर नहीं आ रहे हैं। बरेली में बसपा का उम्मीदवार नहीं था। जिसकी वजह से दलित मतदाता भाजपा और सपा में बंटा है। आंवला और बदायूं में बसपा के प्रत्याशी जरूर थे। इसके बाद भी दलित वोट बंटा है। तीन लोकसभा सीटों में करीब दो-दो लाख मतदाता हैं।