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20 अप्रैल, 2021|3:44|IST

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यूपी में मकान मालिक बिना एग्रीमेंट के नहीं रख सकेंगे किराएदार

landlords will not be able to keep tenants without agreement in uttar pradesh

उत्तर प्रदेश सरकार कानून बनाकर मकान मालिक और किराएदार दोनों का हित सुरक्षित करने जा रही है। बिना एग्रीमेंट के कोई भी मकान मालिक किराएदार नहीं रख पाएगा। इतना ही नहीं, उसे इसकी जानकारी किराया प्राधिकरण को देनी होगी। मकान मालिक मनमाने तरीके से किराया भी नहीं बढ़ा पाएंगे। कानून लागू होने के बाद आवासीय पर पांच फीसदी और गैर-आवासीय पर सात फीसदी सालाना किराया बढ़ाया जा सकेगा।

किराएदार के लिए नियम होगा कि उसे रहने वाले स्थल की देखभाल करनी होगी। अगर वह दो माह किराया नहीं दे पाएगा तो मकान मालिक उसे  हटा सकेगा। किराएदार घर में बिना पूछे तोड़फोड़ भी नहीं कर पाएगा।

सरकार लाने जा रही है कानून
राज्य सरकार ‘उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किराएदारी विनियमन अध्यादेश’ लाने जा रही है। आवास विभाग ने इसका मसौदा तैयार कर लिया है और जल्द ही इसे कैबिनेट से मंजूरी दिलाने की तैयारी है। कानून बनने के बाद किराएदारी के संबंध में मकान मालिकों को तीन माह के अंदर लिखित अनुबंध पत्र किराया प्राधिकारी को देना होगा। पहले से रखे गए किराएदारों के मामले में यदि लिखित अनुबंध नहीं है तो अनुबंध पत्र लिखित कराने के लिए तीन माह का मौका दिया जाएगा।

किराया वृद्धि की गणना चक्रवृद्धि आधार पर होगी। किराया बढ़ाने के विवाद पर किराया प्राधिकरण संशोधित किराया और किराएदार द्वारा देय अन्य शुल्क निर्धारित कर सकता है। एडवांस के मामले में आवासीय परिसर के लिए सिक्योरिटी डिपाजिट दो महीने से अधिक नहीं होगा और गैर-आवासीय परिसर के लिए छह माह का एडवांस लिया जा सकेगा।

ये किराएदारी कानून से बाहर होंगे
केंद्र, राज्य, केंद्र शासित प्रदेश, भारत सरकार के उपक्रम, स्थानीय निकाय अथवा छावनी परिषद में यह कानून लागू नहीं होगा। कंपनी, विश्वविद्यालय अथवा किसी संगठन में सेवा अनुबंध के रूप में अपने कर्मचारियों को किराए पर दिए गए आवास पर भी यह कानून लागू नहीं होगा। धार्मिक संस्थान, लोक न्याय अधिनियम के तहत पंजीकृत ट्रस्ट, वक्फ के स्वामित्व वाले परिसर पर किराएदारी कानून प्रभावी नहीं होगा।

किराएदारी अनुबंध पत्र
कानून लागू होने के बाद सहमति अनुबंध पत्र की शर्तों पर लिखित समझौते के बिना घर किराए पर नहीं दिया जा सकेगा। मकान मालिक और किराएदार को संयुक्त रूप से इसकी सूचना किराया प्राधिकरण को देनी होगी। किराया प्राधिकरण एक यूनिट आईडेंटीफिकेशन नंबर देगा। सूचना की तिथि से सात दिन के अंदर वेबसाइट पर किराएदारी की सूचना को अपलोड करना होगा। ऐसे आवासीय परिसर जिसकी किराएदारी अवधि 12 महीने से कम हो, ऐसी किराएदारी की सूचना किराया प्राधिकरण को देनी जरूरी नहीं होगी।

किराएदारी की अवधि क्या होगी
किराएदारी अवधि निर्धारण और नवीनीकरण मकान मालिक तथा किराएदार के बीच किया जाएगा। यह अनुबंध पत्रों की शर्तों के आधार पर होगा। मृत्यु के मामले में उत्तराधिकारियों के अधिकार व अनुबंध पत्र की शर्तें मकान मालिक के साथ-साथ किराएदार के उत्तराधिकारियों पर लागू होंगी।

मकान मालिक और किराएदार के दायित्व
किराएदारी अनुबंध पत्र की मूलप्रति का एक सेट दोनों के पास रहेगा। अनुबंध पत्र की शर्तों के अनुसार समय पर किराया देना होगा। मकान मालिक को किराएदार को इसकी रसीद देनी होगी। किराएदार को किराए पर लेने वाले परिसर की देखभाल करनी होगी। मकान मलिक को जरूरी सेवाएं देनी होंगी। मकान मालिक किराएदार को अनुबंध अवधि में बेदखल नहीं कर सकेगा।

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  • Web Title:Landlords will not be able to keep tenants without agreement in Uttar Pradesh