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26 अक्तूबर, 2020|7:02|IST

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kumbh mela 2019: संगम की रेती में सजी कुम्भनगरी,पहला शाही स्नान मकर संक्रांति को

kumbh 2019

गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम स्थल पर दिव्य कुम्भ की धर्म नगरी बस चुकी है। यहां दूर-दूर के आस्थावान लोगों का मेले में आना शुरू हो गया है। अखाड़ों की पेशवाई प्रारंभ हो गयी है। मकर संक्रांति के दिन प्रथम शाही स्नान से पूर्व सभी अखाड़े भव्य पेशवाई के साथ अपनी छावनी में पहुंच जाएंगे। 

3200 बीघे में फैले मेले में चारों और आस्था और अटूट श्रद्धा का सैलाब है। तपस्या का प्रतिमान माना जाने वाला मेला इस बार अध्यात्म के साथ आधुनिकता के रंगम में रंगा है। वैश्विक स्तर पर कुम्भ की छटा बिखरने लगी है। फाफामऊ से लेकर अरैल और दारागंज से झूंसी तक फैली  कुम्भनगरी 20 सेक्टर में बंटी है। 

कुम्भ का अर्थ

कुम्भ एक विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला नहीं बल्कि इसके कई मायने हैं। चिंतकों, विचारकों का मानना है कि कुम्भ प्रकृति और मानव जीवन का संयोजन है। कुम्भ आत्म प्रकाश का मार्ग है। कुम्भ जीवन की गतिशीलता है। कुम्भ ऊर्जा का स्रोत है। कुम्भ मानवता का प्रतीक है। कुम्भ आध्यात्मिक चेतना का प्रवाह है। कुम्भ समस्त संस्कृतियों का संगम है। 

प्रयाग में कुम्भ 

ज्योतिष गणना के अनुसार वृहस्पति के मेष राशि मेंे प्रवेश होने तथा सूर्य और चंद्र के मकर राशि में आने पर अमावस्या के दिन प्रयागराज में संगम तट पर कुम्भ का आयोजन होता है।

मुख्य स्नान पर्व की तिथि 

मकर संक्रांति : 15 जनवरी 

पौष पूर्णिमा : 21 जनवरी

मौनी अमावस्या : 4 फरवरी

वसंत पंचमी : 10 फरवरी

माघ पूर्णिमा : 19 फरवरी

महाशिवरात्रि : 4 मार्च

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  • Web Title:kumbh mela 2019 Kumbhnagari decorated first royal bath Makar Sankranti