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1 नवंबर, 2020|3:52|IST

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कुम्भ 2019:  किन्नर अखाड़े का जूना में आज हो सकता है विलय

जूना अखाड़े में किन्नर अखाड़े का विलय बुधवार को हो सकता है। दोनों अखाड़ों में मंगलवार को स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती की शोभायात्रा के दौरान करीबी देखने को मिली। मंगलवार देर रात तक  विलय की शर्तों पर दोनों अखाड़ों में मंथन चलता रहा। 

कुम्भ से पहले किन्नर अखाड़े का जबर्दस्त विरोध कर रहे अखाड़ों ने रविवार को किन्नरों की देवत्व यात्रा के बाद यू टर्न लिया है। जूना अखाड़े और किन्नर अखाड़े को एक मंच पर लाने के लिए स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने भी प्रयास किया। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती की मध्यस्थता के कारण दोनों अखाड़े एक मंच पर आने को तैयार हो गए हैं। 

मंगलवार को स्वामी वासुदेवानंद की शोभयात्रा में जूना अखाड़े के प्रमुख संतों ने जहां वासुदेवानंद सरस्वती की आरती उतारी वहीं किन्नर अखाड़ा प्रमुख लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी कुछ दूर तक शोभायात्रा में शामिल हुईं। यहीं दोनों के बीच एक मंच पर आने की बात हो गई। बताया जा रहा है कि बुधवार को प्रमुख किन्नर क्षौरकर्म (सिर मुंडवाकर) घोषित तौर पर संन्यास दीक्षा लेकर जूना अखाड़े में शामिल होंगे। इस मामले में अखाड़ा प्रमुख लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि मौजगिरि आश्रम में पूरे मामले पर बैठक हो रही है। उसके बाद ही कुछ कह सकेंगे। 

निरंजनी अखाड़े ने भी किन्नरों के लिए खोले दरवाजे
जूना अखाड़े के बाद श्रीपंचायती निरंजनी अखाड़े ने भी किन्नरों के लिए अपने अखाड़े के दरवाजे खोल दिए हैं। अखाड़ा अध्यक्ष महंत रवींद्रपुरी ने रविवार सोमवार को अखाड़े के प्रमुख संतों के साथ बैठककर इसका ऐलान किया। मंगलवार को पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में अखाड़ा के अध्यक्ष ने कहा कि अलग से किन्नर अखाड़े का विरोध है, लेकिन सनातन धर्म में किन्नरों का स्वागत है। कुछ किन्नर हमसे संपर्क में हैं। सभी का स्वागत है। अखाड़े में उनको विशेष स्थान दिया जाएगा। अखाड़े में शामिल होने के बाद किन्नर अखाड़ा उसी प्रकार शाही स्नान में शामिल होगा, जैसे अखाड़े के दूसरे साधु और संत। यही नहीं, निरंजनी अखाड़ा किन्नरों के लिए भूमि का प्रबंध भी कराएगा। 

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