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जानिए आखिर क्यों ताजमहल में CISF जवानों ने गन की जगह थामी गुलेल

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विश्वदाय स्मारक ताजमहल में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवानों के हाथों में अब गन की जगह गुलेल दिखेगी। स्मारक में पर्यटकों पर आए दिन होने वाले बंदरों के हमले से बचाव को सुरक्षा एजेंसी ने यह निर्णय लिया है। 14 जवानों को पर्यटकों की सुरक्षा के लिए गुलेल चलाने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

झुंडों में बंदर करते हैं हमला
ताजमहल पर सैलानियों का सामान झपटने को बंदर झुंडों में हमला करते हैं। पिछले एक माह में यहां 16 सैलानी घायल हो चुके हैं। स्मारक की सुरक्षा में सीआईएसएफ के अत्याधुनिक हथियारों से लैस 250 जवान 24 घंटे तैनात रहते हैं लेकिन बंदरों के हमलों से पर्यटकों को नहीं बचा पाते। इसके चलते ताज के सभी प्रवेश द्वार, रॉयल गेट, मुख्य स्मारक परिसर समेत 14 स्थानों पर जवानों को गुलेल के साथ तैनात किया गया है। जैसे ही जवान गुलेल तानते हैं, बंदर उन्हें देखकर भाग जाते हैं। शिल्पग्राम से ताज के पूर्वी-पश्चिमी गेट, मेहमानखाने और चमेली फर्श तक बंदरों का आंतक है।

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योजनाएं भी हो गईं फेल
बंदरों के आतंक का मुद्दा कई उच्चस्तरीय बैठकों में रखा गया। कई प्रस्तावों पर चर्चा हुई। योजनाएं भी बनीं। बंदरों को भगाने की परंपरागत योजना (लंगूरों की तैनाती) की भी बात आई लेकिन वन विभाग ने नियमों का हवाला देकर रोक दिया। पर्यटकों को जागरुक करने के लिए स्थान-स्थान पर चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए। घटनाओं में कमी नहीं आने पर सुरक्षा एजेंसी की सलाह पर जवानों को गुलेल प्रशिक्षण दिया गया। 

स्मारक परिसर में बंदरों का आतंक है। आए दिन सैलानियों पर हमले होते हैं। पर्यटकों को बंदर गंभीर रूप से घायल कर देते हैं। ऐसे में बंदरों को डराने के लिए जवानों को गुलेल दी गई है। इस कदम से सैलानी सुरक्षित महसूस कर सकेंगे। 
-ब्रजभूषण सिंह, कमांडेंट सीआईएसएफ 

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  • Web Title:Know why the CISF jawans have replaced catapult in place of guns in the Taj Mahal