DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   उत्तर प्रदेश  ›  फेसबुक, व्हाट्सऐप और ट्विटर बना सहारा, जानिए कैसे कोविड मरीजों की मदद के लिए जुटे फरिश्ते

उत्तर प्रदेशफेसबुक, व्हाट्सऐप और ट्विटर बना सहारा, जानिए कैसे कोविड मरीजों की मदद के लिए जुटे फरिश्ते

ज्ञान प्रकाश ,लखनऊPublished By: Amit Gupta
Wed, 21 Apr 2021 01:07 PM
फेसबुक, व्हाट्सऐप और ट्विटर बना सहारा, जानिए कैसे कोविड मरीजों की मदद के लिए जुटे फरिश्ते

सरकारी व्यवस्था चरमरा रही है, बड़ी संख्या में कोविड संक्रमित इलाज के लिए तड़प रहे हैं। ऐसे में समाजसेवी उनकी मदद को आगे आए हैं जिनका पूरा परिवार संक्रमित है। कोई खाना पहुंचा रहा है, कोई दवा तो कोई किसी और तरह की मदद। कुछ फरिश्ते मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर देकर सांसों की डोर टूटने से भी बचा रहे हैं।

ऐसे लोग ट्विटर, फेसबुक, व्हाट्सऐप पर लोगों को संदेश दे रहे हैं। हैशटैग बनाए हैं ताकि किसी को भी मदद की जरूरत हो तो तुरंत मिल जाए। पिछले साल अकेले अपनी पीठ पर मशीन लेकर 50 से अधिक मंदिरों और मस्जिदों को सैनिटाइज करने वाली उज्मा परवीन आजकल अपनी स्कूटी लेकर जगह जगह मदद के लिए दौड़ रही हैं। किसी के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था कर रही हैं तो किसी के लिए दवाओं की। संदीप खरे, कहकशां परवीन, डॉ. नीलम सिंह, अर्चना रमेश और नाइश हसन एक ‘सपोर्ट ग्रुप एलकेओ कोविड-19’ बनाकर अब तक 150 से अधिक लोगों को मदद पहुंचा चुके हैं। सोशल मीडिया पर #TogetherWeCan , @SupportGroupLko के जरिए लोगों को मदद पहुंचा रहे हैं। चौधरी इमरान खान ने अपने खर्च पर कुछ ऑक्सीजन सिलेंडर का बंदोबस्त किया जिसे लोगों तक पहुंचा रहे हैं।

सरकारी मदद नहीं आई, मददगार पहुंच गए
गोमती नगर में एक वरिष्ठ अधिकारी की बुजुर्ग रिश्तेदार की एम्बुलेंस के इंतजार में मौत हो गई। उनके पति खुद कोविड में बिस्तर पर पड़े थे। बेटी 63 साल की हैं। नगर निगम से वाहन तो आया लेकिन एक कर्मचारी बुजुर्ग महिला के शव को कैसे उठाता। परिवार नगर निगम और प्रशासन से गुहार लगाता रहा। ऐसे में नाइश हसन ने शहर भर में मदद मांगी और अंतिम संस्कार के लिए बैकुंठ धाम तक शव पहुंचाने के लिए लोगों की व्यवस्था की।

कई शहरों में मदद पहुंचा रहे
स्मार्ट सिटी मीडिया सेल के पूर्व कर्मचारी विवेक मिश्रा, अविनाश राय, कपिल ने मिलकर #SoS4mCorona2021 ग्रुप ट्विटर पर बनाया है। इसके लिए लखनऊ से लेकर प्रयागराज, वाराणसी, गाजियाबाद तक लोगों को ऑक्सीजन, जरूरी इंजेक्शन और दवाएं पहुंचवा रहे हैं। कुछ घरों को राशन भी पहुंचा रहे हैं। 

दवाओं और भोजन के लिए पहले चेक जरूर कर लें
इस बीच मौके का फायदा उठाने वाले जालसाज भी सक्रिय हो गए हैं। एक दिन पहले कई हैंडल से ट्विटर पर एक संदेश पोस्ट हुआ जिसमें किसी का नम्बर देकर कहा गया था कि ये रेमेडिसिवियर उपलब्ध करा सकते हैं। कुछ घंटों बाद लोगों ने बताया कि नम्बर फर्जी है। रेमेडेसिवियर के लिए पैसा लेकर फोन स्विच ऑफ कर लिया है। ऐसे में एक्सपर्ट का कहना है कि किसी को एडवांस देने की जरूरत नहीं है। रजिस्टर्ड स्थानों से ही रसीद पर सामान खरीदें। वहीं कुछ लोगों ने कोविड मरीजों के लिए मुफ्त भोजन पहुंचाने का संदेश व्हाट्सअप पर प्रसारित करना शुरू कर दिया है। इनमें से कुछ को लोगों ने फोन किया तो नम्बर स्विच ऑफ मिले। 

संबंधित खबरें