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लोकतंत्र में गणना सबसे महत्वपूर्ण, चाहे मतगणना हो या जातीय जनगणना; खुलकर बोले केशव मौर्य

योगी सरकार में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य जातीय जनगणना के पक्ष में खुलकर आ गए हैं। उन्होंने शनिवार को एक्स पर लिखा कि मतगणना, जनगणना हो या जातीय जनगणना लोकतंत्र के लिए सभी महत्वपूर्ण है।

लोकतंत्र में गणना सबसे महत्वपूर्ण, चाहे मतगणना हो या जातीय जनगणना; खुलकर बोले केशव मौर्य
Yogesh Yadavलाइव हिन्दुस्तान,लखनऊSat, 02 Dec 2023 08:57 PM
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जातीय जनगणना को लेकर विपक्षी दलों का दबाव रंग लाने लगा है। अभी तक इसका विरोध कर रही भाजपा के नेता भी अब खुलकर इसके समर्थन में बोलने लगे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण योगी सरकार में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य हैं। केशव प्रसाद मौर्य ने तीन दिनों में दूसरी बार जातीय गणना का समर्थन कर चौंका दिया है। शनिवार को केशव ने एक्स पर यहां तक लिखा कि मतगणना, जनगणना और जातीय जनगणना से ही लोकतंत्र मजूबत होता है। केशव प्रसाद मौर्य के इस तरह से अचानक जातीय गणना के पक्ष में आने के कई मायने निकाले जा रहे हैं। 

सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर केशव प्रसाद मौर्य ने लिखा कि लोकतंत्र में गणना की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। फिर चाहे वह मतगणना, जनगणना हो या जातीय जनगणना। इन सभी गणनाओं से ही लोकतंत्र मज़बूत होता है। लोकतंत्र का मतलब ही गणना है। इससे पहले यूपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन गुरुवार को केशव प्रसाद ने कहा था कि हम भी जातिवार जनगणना के पक्ष में हैं और हमारे वरिष्ठ नेता भी पक्ष में हैं। यह केंद्र सरकार का विषय है। केंद्र सरकार जातिवार जनगणना करवाएगी।

यूपी में समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव लगातार जातीय गणना को लेकर बीजेपी पर हमले कर रहे हैं। उनके सुर में सुर कांग्रेस और अन्य दलों ने भी मिलाया हुआ है। शनिवार को मायावती ने भी इसे लेकर भाजपा पर दबाव बनाया। मायावती ने भी एक्स पर लिखा कि राज्य से कुछ नहीं होगा, केंद्र सरकार जातीय जनगणना कराए। अखिलेश के बाद मायावती की तरफ से भी जातीय गणना को लेकर आए रुख के बाद ही केशव प्रसाद मौर्य ने भी जातीय गणना को लेकर पोस्ट लिखी है।  

पिछड़ी जाति से आने वाले केशव प्रसाद मौर्य पर विपक्षी दल पिछड़ों की अनदेखी करने और उनके मुद्दों को नहीं उठाने का आरोप लगाते रहे हैं। शिवपाल यादव ने भी गुरुवार को उन्हें पिछड़ा विरोधी कहते हुए उनसे इस्तीफा तक देने की मांग कर दी थी। केंद्र की मोदी और यूपी की योगी सरकार में शामिल सहयोगी पार्टियां भी जातीय गणना का समर्थन पहले ही कर चुकी हैं। अपना दल की अनुप्रिया पटेल, निषाद पार्टी के संजय निषाद और सुभासपा के ओपी राजभर खुलकर जातीय गणना का समर्थन कर चुके हैं। इन दलों का आधार वोट बैंक पिछड़ी जाति ही है।

ऐसे में केशव प्रसाद मौर्य का जातीय गणना के पक्ष में इस तरह खुलकर आना कई कई इशारे कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषक इन इशारों को फिलहाल समझने की कोशिश में जुटे हैं। केशव प्रसाद मौर्य 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान यूपी में भाजपा के अध्यक्ष थे और सीएम पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने योगी को सत्ता सौंप दी थी। इसके बाद 2022 के चुनाव में केशव प्रसाद अपनी सीट पल्लवी पटेल से हार गए थे। अब उनका जातीय गणना के पक्ष में खुलकर आना लोकसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

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