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कौशांबी लोकसभा सीट समीकरणः भाजपा कर सकेगी हैट्रिक या सपा छीनेगी सीट? बसपा ने बनाया रोचक मुकाबला

Loksabha election: कौशांबी लोकसभा सीट पर मुकाबला रोचक हो गया है। भाजपा की तरफ से मौजूदा सांसद के खिलाफ सपा ने पूर्व सांसद के बेटे को मैदान में उतार दिया है। वहीं बसपा ने पूर्व डीएसपी पर दांव लगाया है।

Yogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान, कौशांबीMon, 22 April 2024 11:40 PM
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कौशांबी लोकसभा सीट समीकरणः भाजपा कर सकेगी हैट्रिक या सपा छीनेगी सीट? बसपा ने बनाया रोचक मुकाबला

कौशांबी लोकसभा सीट पर इस बार मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। भाजपा की तरफ से मौजूदा सांसद के खिलाफ सपा ने पूर्व सांसद के बेटे को मैदान में उतार दिया है। वहीं बसपा ने पूर्व डीएसपी पर दांव लगाया है। यहां से भाजपा के विनोद सोनकर लगातार दो बार से सांसद बन रहे हैं। इस बार भी भाजपा ने उन्हें ही मौका दिया है। सपा ने पूर्व सांसद इंद्रजीत सरोज के बेटे पुष्पेंद्र सरोज को मैदान में उतारा है। वहीं बसपा ने पूर्व डीएसपी शुभनारायण गौतम को टिकट दिया है। शुभनारायण गौतम देवरिया के मूल निवासी हैं और शिक्षा-दीक्षा प्रयागराज में हुई है। वह ईश्वर शरण पीजी कॉलेज के अध्यक्ष व इलाहाबाद युनिवर्सिटी के कार्यकारी अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके अलावा शुभनारायण लंबे समय तक वामसेफ की सेंट्रल कमेटी के सदस्य रहे हैं।

कौशांबी लोकसभा सीट वर्ष 2014 से पहले चायल लोकसभा के नाम से जानी जाती थी। प्रयागराज मंडल के तहत आने वाले कौशांबी जिले का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है। वर्तमान कौशांबी जिला चार अप्रैल 1997 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) से काटकर बनाया गया था। अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व कौशांबी लोकसभा सीट पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा है। विनोद कुमार सोनकर यहां से लगातार दो बार से लोकसभा सांसद हैं। 

यहां से कांग्रेस प्रत्याशी मसुरिया दीन चार बार सांसद बने। इसी प्रकार सपा प्रत्याशी शैलेंद्र कुमार को तीन बार चायल संसदीय क्षेत्र से सांसद बनने का मौका मिला। पहली बार डा. अमृतलाल भारतीय व दूसरी बार विनोद सोनकर सांसद हुए। 2019 में एक बार फिर विनोद सोनकर को यहां से जीत हासिल हुई। संसदीय क्षेत्र में कौशांबी जिले की विधानसभा सीटें सिराथू, मंझनपुर, चायल और प्रतापगढ़ जिले की कुंडा और बाबागंज विधानसभा सीटें आती हैं।    

इससे पहले चायल संसदीय क्षेत्र में कौशांबी के तीन विधानसभा क्षेत्रों के अलावा प्रयागराज की शहर पश्चिमी व फतेहपुर जनपद की खागा विधानसभा सीट शामिल थी। वर्ष 2014 में हुए चुनाव में इसे संसदीय क्षेत्र कौशांबी का दर्जा मिला। तब विधानसभा शहर पश्चिमी व फतेहपुर जनपद की खागा को हटाकर प्रतापगढ़ जनपद की कुंडा व बाबागंज विधानसभा को शामिल किया गया।
 अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व कौशांबी संसदीय सीट के तहत 5 विधानसभा सीटें आती हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में पांच में से कोई सीट बीजेपी नहीं जीत सकी थी। कौशांबी में ही सिराथू विधानसभा सीट भी है जहां से खुद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य मैदान में उतरे और उन्हें सपा की पल्लवी पटेल ने हरा दिया था।

कौशांबी लोकसभा सीट पर जातीय समीकरण
कौशांबी लोकसभा सीट दलित बाहुल्य सीट है। इसमें मंझनपुर और चायल विधानसभा सीटों पर पासी ब‍िरादरी की बहुलता है। सिराथू में सोनकर और जाटव बिरादरी के लोग ज्यादा संख्या में हैं। पिछडी जातियों में पटेल, मौर्य, यादव, लोधी और पाल की संख्या ठीक ठाक है। सिराथू में पटेल, मौर्य और पाल वहीं मंझनपुर में पटेल, लोधी, पाल, वहीं चायल में कुर्मी और पाल विरादरी का गठजोड चुनावी परिणाम को प्रभावित करता है। सामान्य जातियों में तीनों विधानसभा में ब्राह्मणों की बडी संख्या है। सरसवां, कौशांबी और नेवादा ब्लाक में ब्राहमण और अति पिछडों का गठजोड चुनावी परिणाम को कौशांबी की विधानसभा और लोकसभा सीटों को प्रभावित करता रहा है।

कौशांबी का इतिहास
कौशांबी जिला उत्तर में प्रतापगढ़, पश्चिम में फतेहपुर, दक्षिण में चित्रकूट और पूर्व में प्रयागराज जिले से घिरा हुआ है। प्राचीन काल में कौशांबी शहर की अपनी अलग पहचान हुआ करती थी। तब यह छेदी-वत्स जनपद की राजधानी थी। महाभारत और रामायण के दौर में भी इस शहर का जिक्र मिलता है। माना जाता है कि शहर की नींव रखने का श्रेय चेदि राजा उपारिका वसु के तीसरे पुत्र कुसंबा को मिलता है तो दूसरे में कुसा के पुत्र कुसंबा को इस शहर का निर्माता बताया गया है। वहीं परमत्थाज्योतिका का कहता है कि कौशांबी का नाम ऋषि कोसम्बा के नाम पर पड़ा।

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