DA Image
6 सितम्बर, 2020|8:32|IST

अगली स्टोरी

कानपुर : फिरौती के लिए 26 बार किया कॉल, तीस लाख रुपये भरा बैग फेंकने के बाद भी युवक की हत्या, 31 वें दिन हुआ खुलासा 

कानपुर के बर्रा लैब टेक्नीशियन संजीत यादव अपहरणकांड में 31 वें दिन का खुलासा हुआ है। संजीत की हत्या कर दी गई है। पुलिस ने चार आरोपितों को पकड़ लिया है लेकिन अभी तक शव नहीं मिला है। यह मामला उस समय चर्चा में आया जब संजीव के अपहरणकर्ताओं ने तीस लाख की फिरौती मांगी थी। पहले परिजनों ने बताया था कि पुलिस के कहने पर उन लोगों ने तीस लाख रुपये से भरा बैग अपहरणकर्ताओं के पास पुल से नीचे फेंका, हालांकि विवाद बढ़ने के बाद परिजन अपने बयान से पलट गए थे, बाद मे उन्होंने कहा कि बैग में पैसे नहीं थे। 

बर्रा अपहरणकांड में कब क्या हुआ
22- जून को लैब टेक्नीशियन लापता हो गया

- 23 जून को परिजनों ने बर्रा की जनता नगर चौकी में कराई गुमशुदगी की रिपोर्ट

- 26 जून को राहुल यादव के खिलाफ एसएसपी के आदेश पर नामजद अपहरण की रिपोर्ट

- 29 जून को अपहरणकर्ता ने संजीत को परिजनों को 30 लाख रुपए की फिरौती के लिए किया फोन

- 29 जून से लगातार अपहरणकर्ताओं ने परिजनों को लगातार किया फोन रविवार तक का दिया समय

 

- 5 जुलाई को कोई कार्रवाई न होने पर परिजनों ने शास्त्री चौक चौराहे पर जाम लगाकर किया हंगामा

- 12 जुलाई को एसपी साउथ कार्यालय में दोबारा प्रार्थना पत्र दिया

- 13 जुलाई को अपहरणकर्ताओं के कहने पर परिजनों ने 30 लाख रुपए से भरा बैग गुजैनी पुल से नीचे फेंका फिर भी नहीं आया बेटा

- 14 जुलाई को परिजनों ने एसएसपी कार्यालय और आईजी जोन से की मामले की शिकायत

- 14 जुलाई को ही एसएसपी ने बर्रा थाने पहुंचकर परिजनों से की बात, संजीत को चार दिन में बरामद करने का दिया भरोसा

-14 जुलाई कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के मामले को लेकर किया ट्वीट

- 16 जुलाई को अपहरणकांड में लगातार किरकिरी कराने में बर्रा इंस्पेक्टर रणजीत राय को संस्पेंड कर सर्विलांस सेल प्रभारी हरमीत सिंह को दिया चार्ज

-22 जुलाई को पुलिस ने बर्रा और मेहरबान सिंह का पुरवा निवासी दोस्तों से की पूछताछ

- 22 जुलाई को पुलिस ने हॉस्पिटल से लेकर आने-जाने वाले रास्तों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले 

-23 जुलाई को चार दबोचे गए

अपहरणकांड में ये रहीं पुलिस की खामियां 
- अपहरणकर्ताओं  ने परिजनों को करीब 26 बार कॉल किया इस दौरान उनसे करीब आधा-आधा घंटे तक बातचीत हुई फिर भी सर्विलांस टीम उन्हें ट्रेस नहीं कर पाई। 

-अपहरण के बाद से पुलिस ने हॉस्पिटल के कैमरे चेक करने के साथ ही कर्मचारियों से भी पूछताछ की। लेकिन एक महीने तक हॉस्पिटल के आसपास या स्मार्ट सिटी के कैमरों के फुटेज नहीं खंगाले। 

-परिजनों का कहना है कि वह बर्रा इंस्पेक्टर के कहने पर ही अपहरणकर्ताओं को फिरौती देने गए थे। आरोप है कि पुलिस ने बिना तैयारी के ही बैग तो फिंकवा दिया लेकिन गुजैनी पुल या आसपास टीम को नहीं लगाया। इतना ही नहीं घटनास्थल की जांच पड़ताल करने के बजाय हाईवे के ऊपर से ही लौट गए। 

संजीत की तलाश में यहां-यहां गई पुलिस टीम
अपहृत संजीत की तलाश में पुलिस टीमें सचेंडी, मेहरबान सिंह का पुरवा, उन्नाव, कानपुर देहात, फतेहपुर, हमीरपुर,  सहित शहर के आसपास के इलाकों में भी गई। अपहरणकर्ताओं ने अलग-अलग दस स्थानों से फिरौती के लिए पिता चमनलाल को फोन किया। टॉवर डॉटा फिल्ट्रेशन की मदद से पुलिस ने इन सभी से आने वाले कॉल्स का ब्यौरा जुटा उससे भी पुलिस को कोई खास सफलता नहीं मिली। 

एसटीएफ, स्वॉट, सर्विलांस टीम के साथ मुखबिर तंत्र भी हुआ फेल  
संजीत अपहरणकांड में पुलिस की हर इकाई फेल नजर आई। चाहे वह एसटीएफ हो स्वॉट,सर्विलांस या फिर मुखबिर तंत्र। अपहरणकर्ताओं ने 29 जून से 13 जुलाई तक परिजनों को कुल 26 बार फोन किया इस दौरान न तो उनकी कॉल ट्रेस की जा सकी और न ही उनकी लोकेशन मिली। हालांकि पुलिस ने अपहरणकर्ताओं के मोबाइल रिचार्ज करने वाले दुकानदार को पकड़कर जरूर अपनी पीठ थपथपा ली लेकिन इससे ज्यादा पुलिस कुछ भी नहीं कर सकी। 

अपहरण की रिपोर्ट लिखाने को चार दिनों तक दौड़े परिजन 
पिता चमनलाल का कहना है कि 22 जून को उनके बेटे संजीत का अपहरण हुआ था। अगले दिन उन्होंने गुमशुदगी दर्ज कराई थी। वहीं जब राहुल से बेटी रुचि की शादी तोड़ने पर जब विश्व बैंक कॉलोनी के राहुल के खिलाफ उन्होंने रिपोर्ट दर्ज करानी चाही तो पुलिस ने उन्हें चार दिनों तक चौकी थाने के चक्कर लगाए। आखिरकार एसएसपी के आदेश पर उनकी रिपोर्ट तो लिख ली गई लेकिन कोई त्वरित कार्रवाई नहीं की गई। 

फिरौती की रकम को परिजनों पर उठाए सवाल 
13 जुलाई की रात पिता चमनलाल ने इंस्पेक्टर रणजीत राय के कहने पर ही अपहरणकर्ताओं को गुजैनी पुल से फिरौती के 30 लाख रुपयों से भरा बैग फेका। इसके बावजूद अगले ही दिन एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता ने कहा कि बैग में रुपए नहीं बल्कि कपड़े थे। परिजन इतनी बड़ी रकम कहां से लाए वह इस सोर्स का पता लगवा रहीं हैं। वहीं बहन रुचि का कहना कि स्वॉट टीम प्रभारी दिनेश यादव ने कहा था कि भाई संजीत की जान को खतरा हो सकता है इसलिए उसने भी कहा कि बैग में रुपए नहीं थे। हालांकि बाद में रुचि ने कहा कि यह बात उसने दिनेश यादव के कहने पर कही थी, बैग में रुपए थे। 

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Kanpur man sanjt yadav killed after Thirty million rupees in ransom after kidnapping disclosed on 31st day Barra Lab technician