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जैसे अयोध्या में राम मंदिर का संकल्प पूरा वैसे ही.... मथुरा में बोलीं साध्वी ऋतंभरा, भागवत भी रहे मौजूद

मथुरा में मंगलवार को सर संघ चालक मोहन भागवत ने दीनदयाल गो विज्ञान अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत का उत्थान तब होगा जब धर्म का उत्थान होगा। 

जैसे अयोध्या में राम मंदिर का संकल्प पूरा वैसे ही.... मथुरा में बोलीं साध्वी ऋतंभरा, भागवत भी रहे मौजूद
Yogesh Yadavहिन्दुस्तान,मथुराTue, 28 Nov 2023 08:40 PM
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मथुरा के फरह स्थित दीनदयाल धाम में गो विज्ञान एवं प्रशिक्षण केंद्र का मंगलवार को लोकार्पण किया गया। इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और साध्वी ऋतम्भरा समेत कई हस्तियां मौजूद रहीं। इस दौरान साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि गौ माता वात्सल्य जननी है। गौ महिमा साधारण व्यक्ति के बिना व्यक्त नहीं की जा सकती। गौ माता कचरे से भूख मिटाती है तो दिल को दर्द होता है। धरती को माता कहते हैं लेकिन रासायनिक खाद्य से गोद को छलनी किया जा रहा है। जैसे अयोध्या में राम मंदिर का संकल्प पूरा हुआ वैसे ही गो संरक्षण का भी होगा। इस अनुसंधान केन्द्र के निर्माण से इन सब चीजों पर कुछ हद तक अंकुश लगेगा। सारे विश्व का कल्याण इस अनुसंधान केन्द्र से होगा।

इस दौरान मोहन भागवत ने कहा कि भारत का उत्थान तब होता है, जब धर्म का उत्थान होता है। विश्व में धर्म के उत्थान के लिए यह जरूरी भी है। भारत हमेशा भारत रहेगा। अगर हम गाय को माता कहते हैं तो हमें पुत्र का कर्तव्य निभाना होगा। डॉ. भागवत ने कहा कि गाय का संबंध सभी प्रकार की उन्नतियों से है। भारत के उत्थान के संग-संग गोमाता भी एक कदम बढ़ाकर चल रही है। गाय, विश्व की माता है। सदियों से गो सेवा होती आई है, जिसमें श्रद्धा और विश्वास की कमी आई है।

अब हमें विश्व को उसकी ही भाषा में गो माता के पंचगव्य को समझाना होगा। इसके लिए सभी चिंताए छोड़कर अमृत मिलने तक मंथन करना होगा। उन्होंने कहा कि हम सबसे प्राचीन कहलाते हैं और आधुनिक बनते हैं। पर्यावरण हमारा पालन करता है, तभी हम पेड़ों के जीवन से कृतत्व और बुद्धि की भी सीख लेते हैं। उसका उपयोग कर उसके दाम दोगुना कर वापस करते हैं। यही भाव है। आज हमारी आत्मा, शरीर, मन और बुद्धि गंदी हो गई है। उसे स्वच्छ करना है। 

संस्कार बचाने का उपाय है गो सेवा
संघ प्रमुख ने अंत्योदय का भी महत्व समझाया और कहा अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की उन्नति होने पर ही भारत की उन्नति होगी। आज यहां रोजगार, हुनर और विषमुक्त खेती करना सिखाया जा रहा है। खेती करने वाला कर्जा कर लेता है, उसका उपाय क्या है? घर में संस्कार नहीं बन रहे हैं, उसका उपाय क्या है? उन्होंने गो सेवा को ही इसका उपाय बताया। 

विश्व को बताएं गाय से विषमुक्त खेती संभव
डॉ. भागवत ने गौ रक्षा के लिए किए गए पहले आंदोलन को याद दिलाते हुए कहा कि जब गायों के गोबर और मूत्र के महत्व को समझाते थे, तब लोगों को सब बाते बेकार लगती थीं। हिंदुओं में ही दकियानूसी शब्द कहे जाते थे। अब इसे सच्चाई से सृष्टि के आगे रखना होगा। गाय की दूध की महिमा सब लोग मानते हैं। गोशाला बन रही हैं।

योगदान के लिए लोग आगे रहे हैं। संघ प्रमुख ने कहा, यह कोई संयोग नहीं है। हम विश्व को एक कुटुम्ब मानते हैं, उसे बताना होगा कि हम गाय से विषमुक्त खेती कर सकते हैं। गाय के दूध में तेजस्विता है, इससे प्राण में तेजस्विता भरेंगे। इसलिए यहां पंचगव्य पर अनुसंधान और आयुर्वेद से उपचार करने के लिए हमको बिना थके-हारे चलना है।

जो निश्चित किया वह संकल्प पूरा होगा
भागवत ने कहा कि हमें अमृत चाहिए। अमृत मिलने तक मंथन होता रहना चाहिए। जो निश्चित किया, वह संकल्प पूरा होगा। तीस साल राम मंदिर बनाने में लग गए। कौन क्या कहता है, इसकी चिंता छोड़कर, प्राणों की भी चिंता नहीं करना है। हमें सृष्टि के कल्याण के लिए यह कार्य करना होगा।

इस कार्य के पीछे संघ की शक्ति है। इसलिए यह काम सतत करना होगा। जो गाय से प्रेम करते हैं, उसे माता मानते हैं तो उसकी सेवा में कोई कमी नहीं आने देनी है। तब विश्व में आनंद ही आनंद होगा। जैसा आंनद हमको अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाला है।

गो संवर्धन का यह प्रकल्प देश को अग्रणी बनाएगा
सरसंघचालक ने कहा दीनदयाल धाम आने पर हमेशा आनन्द की अनुभूति होती है। इस परिसर का प्रकल्प हर बार पांच कदम आगे रहता है। सन् 1983 में मैं पहली बार नगला चन्द्रभान आया था। तब दीनदयाल उपाध्याय जीके छोटे से घर का भूमि पूजन था। उनके साथ नाना जी देशमुख, भाऊ राव देवरस, अटलजी थे। बारिश आने से सब भीग गए थे। इसके बावजूद भूमि पूजन का कार्य सम्पन्न किया गया। सन् 2009 में सरकार्यवाह रहते हुए दूसरी बार यहां आया, तब प्रकल्पों का थोड़ा कार्य शुरू हो चुका था।

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