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Hindi News उत्तर प्रदेशदूसरी शादी मामले में पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद की बेटी संघमित्रा मौर्य को फिर झटका, लखनऊ हाईकोर्ट का राहत देने से इनकार 

दूसरी शादी मामले में पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद की बेटी संघमित्रा मौर्य को फिर झटका, लखनऊ हाईकोर्ट का राहत देने से इनकार 

कथित रूप से बिना तलाक दिए दूसरी शादी करने व धोखा देने के आरोप के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने भाजपा सांसद संघमित्रा मौर्या को राहत देने से इंकार कर दिया है।

दूसरी शादी मामले में पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद की बेटी संघमित्रा मौर्य को फिर झटका, लखनऊ हाईकोर्ट का राहत देने से इनकार 
Dinesh Rathourविधि संवाददाता,लखनऊFri, 26 Apr 2024 09:52 PM
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कथित रूप से बिना तलाक दिए दूसरी शादी करने व धोखा देने के आरोप के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने भाजपा सांसद संघमित्रा मौर्या को राहत देने से इंकार कर दिया है। न्यायालय ने कहा है कि संघमित्रा मौर्या को तलब किए जाने का आदेश पारित कर, निचली अदालत ने कोई त्रुटि नहीं की है। न्यायालय ने यह भी कहा कि इसी मामले में 12 अप्रैल को भाजपा सांसद के पिता एवं पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्या की भी याचिका खारिज की जा चुकी है। इन टिप्पणियों के साथ न्यायालय ने परिवाद की कार्यवाही को निरस्त किए जाने की मांग वाली संघमित्रा मौर्या की याचिका को खारिज कर दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की एकल पीठ ने पारित किया। पत्रावली के अनुसार सुशांत गोल्फ सिटी निवासी वादी दीपक कुमार स्वर्णकार ने अदालत में संघमित्रा व स्वामी प्रसाद मौर्या समेत अन्य के खिलाफ परिवाद दाखिल किया है। वादी का आरोप है कि वह एवं संघमित्रा वर्ष 2016 से लिव इन रिलेशन में रह रहे थे। कहा गया है कि संघमित्रा और उसके पिता स्वामी प्रसाद मौर्य ने वादी को बताया की संघमित्रा की पूर्व शादी से तलाक हो गया है। लिहाजा वादी ने 3 जनवरी 2019 को संघमित्रा से उसके घर पर शादी कर ली। हालांकि, बाद में जब उसे संघमित्रा के तलाक न होने की बात का पता चला तो शादी की बात उजागर न होने पाए इसलिए उस पर जानलेवा हमला कराया गया।

उक्त परिवाद को चुनौती देते हुए, संघमित्रा की ओर से दलील दी गई कि परिवादी द्वारा लगाए गए आरोपों में काफी विरोधाभाष है जिन पर ध्यान देते हुए, निचली अदालत ने याची को तलब किया है। कहा गया कि निचली अदालत ने अपने न्यायिक मस्तिष्क का प्रयोग नहीं किया है। हालांकि, न्यायालय ने इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट के तलबी आदेश में कोई कमी नहीं है।