Janmashtami 2018: Srikrishna janmashtami celebration in mathura ISKCON Temple - Krishna Janmashtami: जानिए इस बार मथुरा में कैसे मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी VIDEO DA Image

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Krishna Janmashtami: जानिए इस बार मथुरा में कैसे मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी VIDEO

laddu gopal puja on janmashtami 2018

कान्हा की नगरी मथुरा में श्रीकृष्ण का जन्म समारोह सोमवार को शहनाई एवं नगाड़ा वादन के साथ शुरू होगा। प्रसिद्ध भागवताचार्य विभू महराज ने बताया कि कान्हा की नगरी उत्तर प्रदेश के मथुरा में जन्माष्टमी अलग अलग मंदिरों में अलग अलग तरीके से मनाई जाती है। यहां के किसी मंदिर में श्री कृष्ण के बालस्वरूप में जन्माष्टमी मनाई जाती है तो कहीं बच्चे के रूप में मनाई जाती है। किसी मंदिर में दिन में तो कहीं रात में जन्माष्टमी मनाई जाती है। साधु संतगण ठाकुर का आशीवार्द लेने के लिए 84 कोस की परिक्रमा करते है।
 उन्होने बताया कि ब्रज का हर मंदिर जन्माष्टमी के आयोजन के लिए मशहूर है। मथुरा भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली होने के कारण यहां तीर्थयात्रियों का जमावड़ा लगा रहता है। यहां स्थित जेल में ही कान्हा ने मानव रूप में जन्म लिया था।
  श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि तीन सितम्बर को शहनाई एवं नगाड़ा वादन के साथ ही श्रीकृष्ण जन्म समारोह शुरू होगा। रजत कमलपुष्प में विराजमान ठाकुरजी के श्रीविग्रह का अभिषेक स्वर्ण मण्डित रजत गौ विग्रह के पयोधरों से निकली दुग्धधारा से होगा। ठाकुरजी के अभिषेक से पूर्व गौमाता का पूजन कर देवताओं का आव्हान किया जायेगा।

 

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उन्होंने बताया कि स्वर्ण चांदी की मिश्र धातु से बनी 51 किलो वजन की गाय, 51 किलो दूध से कान्हों का अभिषेक करेगी। इस अवसर पर तैतीस करोड़ देवी देवताओं का आह्वान किया जाएगा। ठाकुरजी के श्रीविग्रह का दूध, दही, घी, बूरा,  शहद  आदि सामग्री  से दिव्य महा अभिषेक किया जायेगा। जन्माभिषेक  के उपरान्त इस महाप्रसाद का वितरण जन्मभूमि के निकास द्वार के दोनों ओर वृहद मात्रा में किया जायेगा। भगवान का जन्म महाभिषेक रात्रि 12:15 बजे से रात्रि 12:3० बजे तक चलेगा। महा अभिषेक के बाद जन्म की खुशी में जहां कुछ समय तक अनवरत पुष्प वषार् होती है वहीं इस अवसर पर टाफियां और खिलौने भी लुटाए जाते हैं। तदोपरान्त 12:4० से 12:5० तक श्रंगार आरती के दर्शन होंगे।  जन्म के दर्शन रात्रि 1:3० बजे तक खुले रहेंगे।
प्राचीन द्वारकाधीश मंदिर के जनसंपर्क अधिकारी राकेश तिवारी के अनुसार मंदिर में तीन सितम्बर को  प्रात: सवा छह बजे ठाकुर जी का अभिषेक होगा तथा इसके बाद 11 बजे तक चार झांकियां होगी। शाम साढ़े सात बजे से पुन: दर्शन खुलेंगे तो जो रात नौ बजे बंद हो जाएंगे। इसके बाद रात दस बजे दर्शन खुलेंगे और रात 11 बजकर 45 मिनट पर जन्म के दर्शन के बाद प्रसाद वितरण होगा।'

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वृन्दावन के तीन मंदिरों राधारमण, राधा दामोदर एवं टेढ़े खम्भेवाले यानी शाह जी मंदिर में जन्माष्टमी दिन मे ही मनाने के कारण तीन सितम्बर को दिन में वृन्दावन तीर्थयात्रियों का कुंभ बन जाएगा। राधा दामोदर मंदिर में तो अभिषेक के बाद हल्दी मिश्रित दही से होली सी खेली जाती है। श्रीकृष्ण जन्म की खुशी में लोग इस मिश्रण को एक दूसरे पर डालते हैं ।
राधारमण मंदिर में 27 मन दूध ,दही, बूरा, शहद, घी, औषधियों का प्रयोग अभिषेक में होता है। मंदिर के सेवायत दिनेश चन्द्र गोस्वामी के अनुसार यह अभिषेक लगभग तीन घंटे तक चलता है। इस मंदिर में बालस्वरूप में सेवा होती है इसलिए अभिषेक और फिर शुद्ध जल से अभिषेक के बाद मंदिर के सेवायत आचार्य बालकृष्ण को दीघार्यु का आशीवार्द देते है। इसी प्रकार का अभिषेक टेढ़े खंभेवाले मंदिर में होता है। तीनों मंदिरों में अभिषेक के बाद तीर्थयात्रियों में अभिषेक का चरणामृत वितरित किया जाता है।

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