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ISI की महिला जासूस ने बिछाया था जाल, खुद को रिसर्चर बताकर सतेंद्र से मांगती थी भारत की खुफिया जानकारी

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की महिला जासूस ने फर्जी नाम और पता बताकर भारतीय दूतावास के कर्मचारी सतेंद्र को हनी ट्रैप में फंसा लिया था। वर्ष 2021 में जब सतेंद्र की तैनाती रूस...

ISI की महिला जासूस ने बिछाया था जाल, खुद को रिसर्चर बताकर सतेंद्र से मांगती थी भारत की खुफिया जानकारी
Dinesh Rathourमुख्य संवाददाता,मेरठSun, 04 Feb 2024 08:05 PM
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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की महिला जासूस ने फर्जी नाम और पता बताकर भारतीय दूतावास के कर्मचारी सतेंद्र को हनी ट्रैप में फंसा लिया था। वर्ष 2021 में जब सतेंद्र की तैनाती रूस स्थित भारतीय दूतावास में हुई उसी समय सतेंद्र को आईएसआई ने टारगेट किया था। इसके बाद एक फर्जी नाम से आईएसआई की महिला जासूस ने सतेंद्र से पहले सोशल मीडिया और इसके बाद फोन पर बातचीत शुरू कर दी थी। दोनों के बीच अक्सर वीडियो कॉल भी होती थी। इसी बात का फायदा उठाकर आईएसआई की महिला जासूस ने सतेंद्र से तमाम गोपनीय जानकारियां हासिल कीं। एटीएस की पूछताछ में पता चला कि सतेंद्र सिवाल रूस में भारतीय दूतावास में वर्ष 2021 में बतौर आईबीएसए यानी इंडिया बेस्ड सिक्योरिट असिस्टेंट के पद पर तैनात किया गया था। इसके बाद से लगातार सतेंद्र रूस के मास्को में ड्यूटी पर था और कभी कभी हापुड़ आता था। 

फेसबुक पर हुई दोस्ती

सूत्रों के अनुसार इसी दौरान आईएसआई की महिला जासूस ने जाल बिछाया और फेसबुक पर सतेंद्र को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी। आईएसआई की महिला जासूस ने अपना नाम पूजा बताया और यह भी बताया कि वह रिसर्चर है। कुछ माह तक दोनों के बीच बातचीत फेसबुक मैसेजेंर के जरिये होती रही। इसके बाद आईएसआई की महिला जासूस ने सतेंद्र से रिसर्च के बहाने से भारतीय सेना, भारतीय रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय समेत कई तरह की जानकारी मांगी। सतेंद्र को इस काम के लिए रकम भी देने के लिए कहा गया। सतेंद्र इसके बाद से ही आईएसआई की महिला एजेंट को तमाम जानकारियां साझा करता आ रहा है। इनमें से काफी दस्तावेज के फोटो आरोपी ने अपने मोबाइल कैमरे से लिए थे और इसकी पुष्टि मोबाइल की जांच के बाद हो गई है। फिलहाल भारतीय खुफिया एजेंसियां कथित आईएसआई महिला एजेंट के सोशल मीडिया अकाउंट को लेकर जांच में लगी हैं। ये पता किया जा रहा है कि कहीं कोई अन्य सैन्य अथवा दूतावास कर्मी तो उस आईडी के संपर्क में नहीं है। 

ऐसे हनीट्रैप में फंसाते हैं

आईएसआई की महिला जासूस सोशल मीडिया पर फर्जी नाम और पते से प्रोफाइल बनाती हैं। इसके बाद दूसरे देश के सेना से जुड़े जवान, सैन्य अधिकारियों, वैज्ञानिक और दूतावास में काम करने वाले लोगों को टारगेट किया जाता है। इन लोगों से पहले सोशल मीडिया पर संपर्क बढ़ाया जाता है और इसके बाद मोबाइल नंबर भी साझा कर लिया जाता है। इस तरह से प्रेम जाल में फंसाकर अपने काम की जानकारी आईएसआई की महिला एजेंट हासिल कर लेती हैं। पूर्व में भी इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं।

विदेश ट्रेनिंग पर मौजूद सैन्य अधिकारियों का डाटा भी किया लीक

भारतीय दूतावास कर्मी सतेंद्र को हनीट्रैप में फंसाकर आईएसआई ने विदेश ट्रेनिंग पर जाने वाले सैन्य अधिकारियों का डाटा भी हासिल कर लिया था। इससे इन अधिकारियों की सुरक्षा से लेकर तमाम तरह के खतरे बन गए हैं। ऐसी आशंका है कि इन अधिकारियों को टारगेट करने का प्रयास किया गया होगा। साथ ही भारत की रूस से होने वाली काफी जानकारी भी आईएसआई ने सतेंद्र के माध्यम से हासिल की है। एटीएस की पूछताछ में शुरूआत में तो सतेंद्र हर बात को नकारता रहा। हालांकि बाद में जब आरोपी के मोबाइल फोन को साफ्टवेयर के माध्यम से रिकवर किया गया और जांच पड़ताल में कई सैन्य दस्तावेज बरामद हुए तो सतेंद्र ने सारी कहानी बतानी शुरू कर दी। 

सोशल मीडिया से भेजी जानकारी

सूत्रों के अनुसार सत्येंद्र ने पूछताछ में बताया कि उसे आईएसआई की महिला जासूस ने अपने जाल में फंसा लिया था और इसके बाद विदेश मंत्रालय के दस्तावेज सोशल मीडिया पर बनाए गए एक अकाउंट के माध्यम से महिला को भेजे थे। इनमें सबसे महत्वपूर्ण जानकारी उन सैन्य अधिकारियों की थी जो विदेश में ट्रेनिंग के लिए मौजूद थे या जिन्हें बाहर देश भेजा जा रहा था। इन अधिकारियों के नाम और पद समेत के साथ यूनिट जैसी समेत तमाम जानकारी सतेंद्र ने ही लीक की थी। दोनों देशों के बीच सैन्य करार और हथियारों को लेकर होने वाले पत्राचार को लेकर भी जानकारी लीक की गई। इसके अलावा भारत और रूस के बीच होने वाले विदेश मंत्रालय स्तर के कई महत्वपूर्ण समझौतों की कॉपी आरोपी सतेंद्र ने आईएसआई को सौंप दी थी। अब इन सभी जानकारी को सेना और देश की खुफिया एजेंसियों से साझा किया गया है। इनपुट के आधार पर छानबीन शुरू कर दी गई है कि आईएसआई के पास कितनी जानकारी पहुंची है। 

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