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Hindi News उत्तर प्रदेशप्रेशर प्रणाली से होगी गोरखपुर-महराजगंज व सिद्धार्थनगर में सिंचाई, ऐसे मिलेगा फायदा

प्रेशर प्रणाली से होगी गोरखपुर-महराजगंज व सिद्धार्थनगर में सिंचाई, ऐसे मिलेगा फायदा

जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग में नवाचारों को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रेशर प्रणाली से गोरखपुर, महराजगंज व सिद्धार्थनगर में सिंचाई की जाएगी।

प्रेशर प्रणाली से होगी गोरखपुर-महराजगंज व सिद्धार्थनगर में सिंचाई, ऐसे मिलेगा फायदा
Srishti Kunjहिन्दुस्तान टीम,लखनऊThu, 20 Jun 2024 07:04 AM
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जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का कहना है कि सिंचाई विभाग में लगातार नवाचारों को बढ़ावा दिया जा रहा है। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा सिद्धाथर्नगर, महराजगंज एवं गोरखपुर में प्रेशर सिंचाई प्रणाली विकसित किया जा रहा है। यह नई सिंचाई पद्धति है। प्रदेश में प्रथम बार प्रेशर सिंचाई प्रणाली का कार्य कराया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रेशर सिंचाई प्रणाली में सेडिमेंटेशन टैंक, पम्प हाउस तथा पीसीसी पाइप एवं डीआई पाइप का उपयोग किया जा रहा है। प्रेशर सिंचाई प्रणाली में पाइप (800 मिमी तथा 200 मिमी) लाइन जमीन से लगभग 1.5 मीटर नीचे बिछाई जा रही है, जिससे जमीन पर खेती पूर्व की भांति होती रहेगी। इस सिंचाई प्रणाली में लगभग प्रत्येक 200 मीटर पर आउटलेट का प्रावधान है। पाइप में पानी का बहाव दबाव के होने के कारण ग्रेविटी फ्लो तथा पाइप लगाकर कृषक अपने खेत की सिंचाई कर सकता है। स्वतंत्र देव सिंह ने बताया कि प्रेशर सिंचाई प्रणाली की 07 नग परियोजनाओं द्वारा 57 ग्रामों के लगभग 18000 कृषकों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इसकी लागत 111.62 करोड़ है।

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यदि कृषक अपने खेत में स्प्रींकलर प्रणाली विकसित कर रखा है तो उसे सिर्फ़ आउटलेट से अपने स्प्रींकलर प्रणाली को जोड़ कर सिंचाई कर सकता है। जल शक्ति मंत्री ने बताया कि सिंचाई विभाग द्वारा इसके साथ ही बाढ़ से संबंधित निर्माण कार्यों में भी नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में शारदा संगठन अन्तगर्त जनपद पीलीभीत में सनेढ़ी तटबन्ध पर 2 अदद् नये स्पर का निर्माण व एक बाढ़ से क्षतिग्रस्त स्पर को टी (ज) के रूप में परिवर्तित किया गया। 

उन्होंने बताया कि इसमें निम्न प्रकार से नवीन प्राविधान किए गए। इसके तहत फैक्ट्री मेड वायर क्रेट जिसके मेस की साइज 10 सेमी व 12 सेमी होती है जो छोटे बोल्डर पर भी प्रभावी रहता है। इसके तहत डिजाइन में लांचिग एप्रोन के एप्रोन की साइज विभाग में परम्परागत रूप से चल रहे 1 मीx1 मीx1 मी के स्थान पर 1.5 मीx1.5 मीx.5 मी का प्रयोग किया गया। यह डिजाइन अधिक सुरक्षित व लागत में 25 प्रतिशत की कमी परिलक्षित हुई। इस डिजाइन को पूरे पूर्वी संगठन की बाढ़ परियोजनाओं में लागू कराया गया है।