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इनसे सीखेंः मौत के मुंह से बाहर निकाली सैकड़ों जिंदगी, पुलिस भी लेती है मदद

प्रयागराज में एक परिवार ऐसा भी है जो पुल से कूदने वाले सैकड़ों लोगों को नई जिन्दगी दी है। मौत के मुंह से निकाला है। अपनी जान की बाजी लगाकर उनकी जान बचाई है। बिना किसी लोभ व स्वार्थ के ऐसा करने वाला मनोज निषाद का परिवार है। मनोज आज जल पुलिस और कीडगंज पुलिस के लिए रामबाण से कम नहीं है। पुल से किसी युवक या युवती के कूदने की सूचना मिलते ही मनोज का बचाव अभियान शुरू हो जाता है। 

मनोज है एक्सपर्ट गोताखोर 

चौखंडी कीडगंज निवासी मनोज निषाद पुलिस की नजर में एक्सपर्ट गोताखोर है। गंगा या यमुना में कहीं हादसा होने पर जल पुलिस मनोज की मदद लेती है। मनोज निषाद ने बताया कि करीब आठ साल से वह नए यमुना पुल के नीचे नाव में हमेशा मौजूद रहता है। कोई हादसा होने पर वह तुरंत मदद के लिए जाता है। आठ सालों में न जाने कितने लोगों की वह जान बचा चुका है। कोई भी यमुना पुल से छलांग लगाता है, पुलिस उसे कॉल करके बुलाती है। कूदने वालों को बचाने से लेकर डूबे हुए लोगों की लाश तलाशने तक वह लगा रहता है।

टीम में पांच में अब तीन बचे 

मनोज का परिवार वर्षों से समाजसेवा में लगा है। उसके चाचा और ताऊ के साथ चचेरे भाई भी यमुना से कूदने वालों की जान बचाने में मदद करते थे। पहले पांच लोगों की टीम थी। इस टीम में उसके चाचा बुद्धू लाल निषाद, सिपाही लाल, कल्लू, शिवबाबू और मनोज निषाद थे। यमुना पुल के नीचे हर वक्त इन्हीं पाचों में कोई न कोई मौजूद रहता था। सभी अच्छे तैराक के अलावा गोताखोर भी हैं। मनोज से पहले सिपाही लाल, कल्लू और शिवबाबू ही मोर्चा संभालते थे। लेकिन अब परिवार के साथ दो सदस्य कम हो गए हैं। मनोज ने बताया कि सिपाही लाल और कल्लू इस दुनिया में नहीं रहे। वह चाचा बुद्धू लाल के साथ मिलकर बचाव अभियान का हिस्सा बनता है। बड़ी बात यह है कि  मनोज के चाचा दिव्यांग होने के बाद भी तैरने में माहिर हैं।

कोई सरकारी मदद नहीं

मनोज ने बताया कि उन्हें सरकार की ओर से कोई आर्थिक मदद नहीं मिलती है। इसके बाद भी वह बचाव अभियान का हिस्सा बनता है। जिसके परिवार से कोई डूबता है, वही कुछ रुपये दे देते हैं। हजार-दो हजार रुपये मिल जाता है। बताया कीडगंज पुलिस से कोई मदद नहीं मिलती है। जब वेद प्रकाश पांडेंय चौकी प्रभारी नाका थे तब वह आर्थिक मदद करते थे। कुम्भ से पहले मनकामेश्वर मंदिर के पास हुए हादसे में आठ श्रद्धालु डूबे थे। उस वक्त मनोज जल पुलिस के साथ रात भर सर्च ऑपरेशन में शामिल रहा। 

बेटी को पेट से बांधकर कूद गई थी मां

मनोज ने बताया कि कुछ दिन पहले ही एक महिला अपने मासूम बेटी को पेट में बांध कर यमुना पुल से कूद गई थी। उस वक्त वह यमुना में ही मौजूद था। मनोज अपने चाचा के साथ नाव से पहुंचा और महिला और बच्ची को सुरक्षित बचा लिया। दोनों यमुना के अंदर चली गई थी। इसी तरह कुछ माह पहले खुल्दाबाद का एक युवक यमुना में कूदा था। वह बहकर आगे निकल गया था। उसे भी सुरक्षित बचा लिया था।

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  • Web Title:inse seekhein know about family who beat death save Hundreds of lives