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Hindi News उत्तर प्रदेशयूपी भाजपा में भितरघात: इस लोकसभा सीट पर वरिष्ठ नेताओं ने दूसरे दलों के प्रत्याशियों को डलवा दिए वोट

यूपी भाजपा में भितरघात: इस लोकसभा सीट पर वरिष्ठ नेताओं ने दूसरे दलों के प्रत्याशियों को डलवा दिए वोट

अलीगढ़ लोकसभा सीट पर भाजपा को मिली लड़खडाती जीत के लिए जिम्मेवारों की सूची जिलास्तर से तैयार कर प्रदेश नेतृत्व को सौंप दी गई है। जिले में तैनात वरिष्ठ नेताओं के नाम इसमें शामिल हैं।

यूपी भाजपा में भितरघात: इस लोकसभा सीट पर वरिष्ठ नेताओं ने दूसरे दलों के प्रत्याशियों को डलवा दिए वोट
Dinesh Rathourवरिष्ठ संवाददाता,अलीगढ़।Sun, 23 Jun 2024 08:32 PM
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अलीगढ़ लोकसभा सीट पर भाजपा को मिली लड़खडाती जीत के लिए जिम्मेवारों की सूची जिलास्तर से तैयार कर प्रदेश नेतृत्व को सौंप दी गई है। जिले में तैनात वरिष्ठ नेताओं के नाम इसमें शामिल हैं। जिन्होंने पद,दायित्व और झंडा भाजपा का बुलंद किया लेकिन दूसरे दलों के प्रत्याशियों को वोट पड़वाने के लिए जनता के बीच में गए। महानगर स्तर पर भी इस तरह से भितरघात करने वालों की लंबी फेहरिस्त तैयार की गई है। लोकसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद भाजपा नेतृत्व हार व जीत में कम हुए अंतर की समीक्षा करने में जुट गया है। भाजपा को सबसे बड़ा झटका यूपी से लगा है। ऐसे में प्रदेश की सभी लोकसभा सीटों की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अलीगढ़ लोकसभा सीट पर बेशक पार्टी की इज्जत बच गई और तीसरी बार भाजपा परचम फहराने में कामयाब रही लेकिन 2014, 2019 की तुलना में जीत का अंतर बड़े पैमाने पर कम हुआ है।

पिछले चुनाव में जहां करीब ढाई लाख वोटों के अंतर से भाजपा जीती तो इस बार यह अंतर घटकर महज साढ़े 15 हजार वोटों पर सिमट कर रह गया। इस लड़खड़ाती जीत को लेकर अब स्थानीय स्तर पर भी बीते दिनों घंटों मंथन हुआ। प्रदेश महामंत्री व एमएलसी अनूप गुप्ता ने विधानसभा वार, मंडल स्तर के लोगों से बात की। इस दौरान जिलाध्यक्ष के स्तर से भी एक रिपोर्ट सौंपी गई है। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में यह साफ लिखा गया है कि पार्टी को भितरघात के चलते कम वोटों के अंतर से जीत प्राप्त हुई है। बंद लिफाफे में दी गई रिपोर्ट में करीब एक दर्जन नेताओं के नाम है, इनमें से कई ऐसे भी हैं, जिन पर पद भी है। यह सभी अतरौली, बरौली, खैर विधानसभा से है।

शहर व कोल विस सीट पर भी अर्न्तकलह कम नहीं

महानगर ईकाई की बात करें तो शहर व कोल विस सीट पर भी अर्न्तकलह कम नहीं रही। इन दोनों सीटों पर भी भाजपा प्रत्याशी को भितरघात का सामना करना पड़ा। यहीं कारण रहा कि विस स्तर पर भाजपा बीते लोकसभा चुनाव के दृष्टिगत यह दोनों सीटें हार गई। यानि यहां पर वोटों का जो अंतर था, वह भाजपा की तुलना में सपा-कांग्रेस गठबंधन को अधिक मिला। यहां तक कि दोनों सीट पर भाजपा को 2022 में हुए विधानसभा चुनाव के बराबर भी वोट नहीं मिल सके। यहां भी भितरघात करने वालों की लंबी फेहरिस्त तैयार की गई है।

खैर के दो पदाधिकारियों की रिपोर्ट तो पूर्व में ही जा चुकी

खैर विधानसभा के दो पदाधिकारियों की रिपोर्ट पूर्व में ही जिलाध्यक्ष द्वारा प्रदेश नेतृत्व को भेज दी गई थी। जिसमें साफ तौर पर दोनों पदाधिकारियों के द्वारा बसपा प्रत्याशी हितेन्द्र कुमार उपाध्याय का चुनाव लड़ाए जाने की बात कही गई थी।

झटके के बाद अब संगठन स्तर पर होंगे बदलाव

लोकसभा चुनाव में यूपी में भाजपा को लगे सबसे बड़े झटके के बाद प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी ने हार की नैतिक जिम्मेदारी ले ली है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को एक रिपोर्ट भी सौंपी गई है। सूत्रों के अनुसार जुलाई के प्रथम सप्ताह में भाजपा नेतृत्व में बदलाव हो सकता है। प्रदेश स्तर पर बदलाव होने पर स्थानीय स्तर पर जिलाध्यक्ष व महानगर इकाई में भी बदलाव किए जा सकते हैं।

भाजपा जिलाध्यक्ष कृष्णपाल सिंह का कहना है कि भाजपा को अलीगढ़ लोकसभा सीट पर जीत हासिल हुई है। हालांकि जीत का अंतर लाखों से घटकर हजारों में रह गया। निश्चित ही पार्टी प्रत्याशी को भितरघात का सामना करना पड़ा है। प्रदेश महामंत्री को स्थानीय स्तर पर समीक्षा करने के बाद रिपोर्ट दे दी गई है। जिसमें कुछ पार्टी नेताओं व वरिष्ठ पदाधिकारियों के भी नाम हैं।