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तकनीक! ट्रेन की बोगियों में पानी कम होते ही मोबाइल पर मिलेगा अलर्ट, नहीं होगी किल्लत

भारतीय रेलवे की ट्रेनों में कोच में पानी कम होते ही मोबाइल पर अलर्ट मिलेगा। अब बोगियों में पानी की किल्लत नहीं होगी। आए दिन यात्री पानी न होने की शिकायत करते हैं। अब कंट्रोल सेल में अलर्ट आएगा।

तकनीक! ट्रेन की बोगियों में पानी कम होते ही मोबाइल पर मिलेगा अलर्ट, नहीं होगी किल्लत
Srishti Kunjआशीष श्रीवास्तव,गोरखपुरFri, 03 May 2024 07:30 AM
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ट्रेन की बोगियों में पानी की किल्लत को दूर करने के लिए एनई रेलवे के यांत्रिक वर्कशॉप ने एक अभिनव प्रयोग किया है। वर्कशॉप के इंजीनियरों ने एक ऐसी डिवाइस बनाई है जो बोगियों में पानी का स्तर कम होते ही कंट्रोल सेल को मैसेज करेगा और बताएगा अब बोगी में पानी की जरूरत है। इस तरह के नए प्रयोग से जहां बोगियों में पानी की किल्लत दूर होगी वहीं बार-बार आने वाली यात्रियों की शिकायतें भी काफी हद तक कम हो जाएगी। 

दरअसल बोगियों में गर्मी के दिनों में पानी की किल्लत बढ़ जाती है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार ऐसी कोई तकनीक नहीं है जिससे पूर्व में जाना जा सके कि कोच में पानी कम है या भरा हुआ है। अक्सर यात्रियों की शिकायत पर ही पता चलता है कि पानी खत्म हो गया है। यात्रियों की शिकायत के बाद अगले स्टेशन पर पानी की फिलिंग की जाती है। 

ऐसे काम करेगा सिस्टम
इज्जतनगर डिवीजन के वर्कशॉप द्वारा एक कोच वाटर लेवल इंडिकेटर कम अलर्ट सिस्टम बनाया गया है। यह वाटर लेवल सेंसर और माइक्रोकंट्रोलर आधारित नियंत्रण प्रणाली है। जीपीएस मॉड्यूल का उपयोग करके कोच के अंदर अलर्ट यूनिट स्थापित की गई है। यदि चलती ट्रेन में टंकी में पानी भरा हुआ है, तो इस यूनिट में टंकी में पानी भर जाने का संदेश ‘ग्रीन एलईडी’ के साथ डिस्प्ले पर प्रदर्शित होगा। जब जल स्तर 50% तक पहुंचेगा तो डिस्प्ले पर ‘येलो एलईडी’ के साथ एक संदेश दिखेगा। 

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महज पांच मिनट में भर जाता है पानी
क्विक वाटरिंग सिस्टम से ट्रेनों की बोगियों में महज पांच मिनट में ही पानी भर जाता है। एनई रेलवे के लगभग सभी प्रमुख स्टेशनों पर एससीएडीए (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्टिेवशन) कम्प्यूटरीकृत प्रणाली शुरू कर दी गई है। दरअसल पहले किसी ट्रेन की 24 बोगियों में पानी भरने में अभी 20 मिनट लगते थे। जबकि स्टापेज अधिकतम 10 से 15 मिनट को होता है। ऐसे में अक्सर की बिना पूरा पानी भरे ही ट्रेनें चली जाती थीं। लेकिन क्विक वाटरिंग सिस्टम से यह दिक्कत पूरी तरह से दूर हो गई है। महज पांच मिनट में ही सभी बोगियां फुल हो जाती हैं।

80 फीसदी शिकायतें पानी को ही लेकर 
ट्रेनों में मिलने वाली ज्यादातर शिकायतें साफ-सफाई को लेकर होती हैं, जिनमें से 70 से 80 फीसदी शिकायतें कोच में पानी की कमी को लेकर मिलती हैं। अक्सर इसी को लेकर विवाद की स्थिति रहती है। 

सीपीआरओ, पंकज कुमार सिंह ने कहा कि इज्जतनगर मण्डल द्वारा एक अभिनव प्रयोग किया गया है। इससे कोच में पानी कम होते ही संदेश मिल जाएगा। ऐसे में आवश्यकतानुसार कोच में पानी भरा जा सकेगा। इस व्यवस्था के सफल होने पर इसका विस्तार किया जाएगा।