Income Tax Department asked where to buy Bitcoin money - बिटक्वाइन खरीदने के लिए कहां से लाए पैसा, 300 निवेशकों को अायकर का नोटिस DA Image
13 दिसंबर, 2019|3:21|IST

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बिटक्वाइन खरीदने के लिए कहां से लाए पैसा, 300 निवेशकों को अायकर का नोटिस

प्रतीक फोटो।

बिटक्वाइन को लेकर सरकार की सख्ती के बाद आयकर विभाग ने भी नजरें टेढ़ी कर ली हैं। विभाग ने शहर के 300 लोगों को नोटिसें भेजकर बिटक्वाइन का हिसाब मांगा है। उनसे इसमें पैसा लगाने का स्रोत भी मांगा गया है। दूसरी तरफ आरबीआई जल्द ही बिटक्वाइन से बचने के लिए अभियान चलाने जा रहा है। अमेरिकी निवेश बैंक जेपी मॉर्गन चेज के सीईओ जैमी डिमॉन ने बिटक्वाइन के बारे में यह तक बोल दिया है कि ये दुनिया का सबसे बड़ा फ्रॉड है और इसमें निवेश करना बेवफूकी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष भी बिटक्वाइन की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता जता चुका है। 
 बजट भाषण में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि बिटक्वाइन सहित सभी क्रिप्टो मुद्राएं गैरकानूनी हैं और सरकार उन्हें समाप्त करने के लिए पूरा प्रयास करेगी। उन्होंने साफ कहा कि इसे मान्यता देने का सरकार का इरादा नहीं है। इसी के बाद आयकर विभाग ने बिटक्वाइन में निवेश करने वालों को नोटिस भेजे हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन सुशील चंद्रा के बयान के बाद आयकर विभाग क्रिप्टोकरंसी को लेकर सख्त हुआ है। 
सीबीडीटी चेयरमैन ने कहा कि अब विभाग इस निवेश पर कर टैक्स वसूली करेगा। बिटक्वाइन में निवेश करने वालों से न सिर्फ इससे होने वाली कमाई का ब्योरा मांगा जाएगा बल्कि ये भी पूछा जाएगा कि ये पैसा उनके पास कहां से आया। उनके इनकम टैक्स रिटर्न की जांच होगी, जिसमें देखा जाएगा कि उन्होंने बिटक्वाइन में निवेश का जिक्र रिटर्न में किया है या नहीं। अगर गलत पाया गया तो फ्रॉड का मामला अलग से चलेगा। आयकर विभाग ने पिछले साल दिसंबर में इन एक्सचेंजों में सर्वे किया था। वहां बिटक्वाइन में निवेश करने वालों का पूरा ब्योरा विभाग को मिला था। अब सभी को नोटिस भेजे जा रहे हैं। 
बिटक्वाइन पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं
बिटक्वाइन या दूसरी क्रिप्टोकरंसी पर निगरानी के लिए अब तक कोई रेगुलेटर नहीं हैं। न इस पर सरकार का नियंत्रण है और न ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का।  इसके अलावा इस पर सेबी (भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड) का भी कोई कंट्रोल नहीं है। यानी अगर आप जेब-पे, यूनीकॉन और कॉइन सिक्योर जैसे बिटक्वाइन एक्सचेंजों से इसे खरीदते हैं और आपके साथ कोई फ्रॉड होता है तो आपको बड़ा नुकसान हो सकता है। इसमें कोई आपकी मदद नहीं करेगा। आरबीआई कई बार कह चुका है कि जो लोग क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेड कर रहे हैं वो अपने खतरे पर इसमें निवेश करें। 
बिटक्वाइन गुप्त करंसी, छुपाकर रखा जा सकता है
बिटक्वाइन वर्चुअल मुद्रा है जिस पर कोई सरकारी नियंत्रण नहीं हैं। इस मुद्रा को किसी बैंक ने जारी नहीं किया है चूंकि ये किसी देश की मुद्रा नहीं है इसलिए इस पर कोई टैक्स नहीं लगता है। बिटक्वाइन पूरी तरह गुप्त करंसी है और इसे सरकार से छुपाकर रखा जा सकता है। इसे दुनिया में कहीं भी सीधा खरीदा या बेचा जा सकता है। शुरुआत में कंप्यूटर पर बेहद जटिल कार्यों के बदले ये क्रिप्टो करंसी कमाई जाती थी। चूंकि ये करंसी सिर्फ कोड में होती है इसलिए न इसे ज़ब्त किया जा सकता है और न ही नष्ट। बिटक्वाइन ख़रीदने के लिए यूजर को पता रजिस्टर करना होता है। ये पता 27-34 अक्षरों या अंकों के कोड में होता है और वर्चुअल पते की तरह काम करता है। इसी पर बिटक्वाइन भेजे जाते हैं। इन वर्चुअल पतों का कोई रजिस्टर नहीं होता है ऐसे में बिटक्वाइन रखने वाले लोग अपनी पहचान गुप्त रख सकते हैं।
बिटक्वाइन जुए से कम नहीं, दूर रहने में ही भलाई 
-बिटक्वाइन में निवेश करना जोखिम भरा है, क्योंकि इस वर्चुअल करंसी में उतार-चढ़ाव बहुत ज्यादा है। रेगुलेशन न होने से इसमें बहुत ज्यादा उठापटक है। इस साल की शुरुआत में एक बिटक्वाइन की कीमत करीब 1000 डॉलर थी। 29 नवंबर को इसकी कीमत $11,000 के स्तर के पार चली गई जबकि 1 दिसंबर को एक  गिरकर 9540 अमेरिकी डॉलर (करीब 6.15 लाख) पर आ गई।
-सरकार के नियंत्रण से बाहर होने से आतंकवादी, माफिया और हैकर्स द्वारा बिटक्वाइन का इस्तेमाल गैर कानूनी धंधों में करने का शक है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि इसमें लेनदेन में पहचान छुपी रहती है इसलिए सरकार की पकड़ में ऐसे लोग नहीं आ पाते हैं। कुछ महीने पहले रैनसममवेयर के हैकर ने बिटक्वाइन में फिरौती मांगी थी।
-जब हम किसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं तो कंपनी की ग्रोथ होने पर उसके दाम भी चढ़ते हैं लेकिन बिटक्वाइन के मामले में ऐसा नहीं है। 
-बिटक्वाइन से कोई चीज नहीं खरीद सकते जब आप कोई सामान खरीदते हैं वीसा, मास्टर कार्ड और रूपे कार्ड से भुगतान करके उसे ले सकते हैं, जबकि बिटक्वाइन के मामले में ऐसा नहीं है। रिजर्व बैंक का साफ कहना है कि हम ऐसे लेनदेन की गांरटी नहीं लेते हैं।
-न यह कमोडिटी है न ही करंसी पुराने जमाने में सोने-चांदी जैसी धातुओं के सिक्के चलते थे। इसके बाद सरकार द्वारा या आरबीआई की ओर से चलाए गए सिक्के आए जबकि बिटक्वाइन अब तक न करंसी की श्रेणी में है न ही कमोडिटी है। 
-पोंजी स्कीम का रैकेट क्रिप्टोकरंसी में सिर्फ ऑपरेशनल खतरे ही नहीं बल्कि इसमें दूसरे जोखिम भी हैं। ठगी के लिए पोंजी स्कीम लांच की जा रही हैं। 

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