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Hindi News उत्तर प्रदेशHindustan Special: कॉलोनी नही पूरा गांव ही सरकारी, हर परिवार में गवर्नमेंट नौकरी

Hindustan Special: कॉलोनी नही पूरा गांव ही सरकारी, हर परिवार में गवर्नमेंट नौकरी

सभी सरकारी नौकरियों में तो गांव बना ‘पूरे सरकारी’। यह किसी अफसरों या कर्मचारियों की कालोनी नहीं, बल्कि एक गांव का नाम है। इस नाम के पीछे पुरानी कहानी जुड़ी है।

Hindustan Special: कॉलोनी नही पूरा गांव ही सरकारी, हर परिवार में गवर्नमेंट नौकरी
Pawan Kumar Sharmaएसएन शर्मा,गोंडाThu, 13 Jun 2024 10:18 PM
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सुनने में जरूर अजीब सा लगता है लेकिन हकीकत है कि जिले के एक गांव में हर परिवार में सरकारी नौकरी होने की वजह से इसका नाम पूरे सरकारी पड़ गया। जिले के वजीरगंज कस्बे में पक्षियों के अरण्य स्थल के निकट यह गांव तीन तरफ पार्वती आरगा झील से घिरा और जंगलों के बीच में है। यहां के लोग बताते हैं कि करीब दो सौ वर्षो पूर्व उनके पूर्वज सलटौवा मझौवा बस्ती जिले से आए थे। यहीं रहने लगे तो नौकरी मिल गई। इसके बाद सुलतानपुर जिले से उनके रिश्तेदार यहां रोजगार के सिलसिले में आए तो उनकी भी नौकरी लग गई।

गांव के वयोवृद्ध ओम प्रकाश श्रीवास्तव कहते हैं कि वो खुद सिंचाई विभाग में नौकरी करते थे और अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। गांव में जितने लोग है कभी हर घर से लोग सरकारी नौकरियों में जरूर रहे। करीब पांच सौ से अधिक आबादी वाले इस गांव में कोई न कोई सरकारी सेवा में रहा और कई तो अभी भी हैं। जिले के नवाबगंज- मनकापुर मार्ग पर करीब आठ किमी पर पूरे सरकारी गांव बसा है। ग्राम पंचायत का नाम तो बहादुरा है, लेकिन पूरे सरकारी इस गांव का पुरवा है। ग्राम प्रधान भूतीलाल बताते हैं कि सरयू नदी की मुख्य धारा कालान्तर में उनके गांव से होकर बहती थी और अब यहां से करीब 18 किमी दूर चली गई है। अभी भी गहरी झील नुमा है और पक्षियों का अभ्यारण्य है इसे लोग पार्वती आरगा विहार झील के नाम जानते हैं। इसके तट पर बसाा यह गांव अत्यंत मनोरम लगता है। विधि छात्र और गांव के निवासी अनुराग श्रीवास्तव कहते हैं कि उनकी कई पीढ़ियां सरकारी सेवाओं में सेवा दे चुके है, इसीलिए इस गांव का नाम ‘पूरे सरकारी’ लिखा पढ़ी में है और लोग इसे ‘सरकारी पुरवा’ कहते हैं।  

पानी, लकड़ी और सड़क की सुविधा देख बसे थे लोग

मलेरिया विभाग से सेवानिवृत्त इस गांव के निवासी एवं वयोवृद्ध ईश्वर शरण श्रीवास्तव बताते हैं कि उनके पूर्वज यहां पानी, लकड़ी और सड़क  की सुविधा देखकर बसे थे। केन्द्रीय विद्यालय के प्रवक्ता व गांव के निवासी जगदम्बा प्रसाद श्रीवास्तव के मुताबिक यहां का पानी लोगों को न सिर्फ भाया बल्कि अपनी उन्नति व समृद्धि का श्रेय भी इसी को जाता है। इंटर कालेज के प्रवक्ता और यहीं के रहने वाले जय प्रकाश श्रीवास्तव बताते हैं कि पहले कुछ लोग बसे थे, धीरे-धीरे परिवार और आबादी बढ़ती गई। उनकी जानकारी में करीब इस गांव के 50-55 लोग जल्द सरकारी नौकरियों में रहे।

गांव के वासी जो सरकारी सेवाओं में थे

इस गांव के रहने वाले स्व.रामचरन लाल श्रीवास्तव-सेवानिवृत्त कानूनगो, स्व.जमुना प्रसाद श्रीवास्तव -लेखपाल, स्व.राम लाल श्रीवास्तव -नायब रजिस्टार कानूनगो, स्व.बृजभूषण लाल श्रीवास्तव-स्टेशन मास्टर थे। इसके अलावा स्व. काशी प्रसाद श्रीवास्तव -बडे बाबू, स्व.राजकिशोर श्रीवास्तव - बैंक मैनेजर, स्व. ठाकुर जी श्रीवास्तव - बडे बाबू स्व.राम अभिलाष श्रीवास्तव- सहायक निदेशक, स्व. काली प्रसाद श्रीवास्तव - रेलवे, स्व.हरी प्रकाश श्रीवास्तव -रेलवे कर्मी, स्व.अनिल श्रीवास्तव - रेलवे, स्व.छैल बिहारी वर्मा, स्व.राम समुझ कश्यप, स्व.शिव प्रसाद -चीनी मिल, स्व. द्वारिका प्रसाद -अध्यापक, स्व.अशोक कुमार- स्वास्थ्य विभाग रहे। इसके अलावा भी दर्जनों की सूची है। मौजूदा पीढ़ी में उतनी संख्या में नहीं है।