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आईआईटी बीएचयू का झींगे से स्तन कैंसर की दवा बनाने का दावा

आईआईटी बीएचयू के फार्मास्युटिकल इंजीनियरिंग विभाग ने स्तन कैंसर की नैनो दवा बनाने का दावा किया है। झींगा व केकड़ा प्रजाति की मछली से बना यह इंजेक्शन केवल रोग से प्रभावित कोशिकाओं को लक्ष्य कर उन्हें दुरुस्त करता है। इससे आसपास की सामान्य कोशिकाएं प्रभावित नहीं होतीं। डॉ. एमएस मुथु के निर्देशन में शोध छात्रों- अभिशेष कुमार मेहता व काशी विश्वनाथ ने तीन साल के प्रयास के बाद इसे तैयार किया है। चूहों पर किया गया प्रारंभिक प्रयोग भी सफल रहा। इस शोध को साइंस डायरेक्टर की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘कोलाइउ एंड सरफेस बी बायोइंटरफेस' ने अक्तूबर 2018 में प्रकाशित किया है।

डॉ. मुथु ने इस चिकित्सा को टारगेटेड थिरेपी नाम दिया है। समुद्र में मिलने वाली झींगा व केकड़े के प्रजाति वाली मछलियों में मिलने वाले प्राकृतिक पॉलीमर से दवा बनाई गई है। इस दवा में नैनो पॉलीमर मिले हैं जो कैंसर से प्रभावित कोशिका को दुरुस्त करती हैं तथा उसके फैलाव को कम कर देती है। रोग प्रभावित कोशिकाओं के बढ़ने की रफ्तार धीमी होने से चिकित्सक को उपचार का ज्यादा समय मिलता है। इस दवा में घुले प्राकृतिक पॉलीमर रोग प्रभावित कोशिका को खोजकर उसकी मरम्मत कर देते है। प्रो. मुथु ने बताया कि कैंसर कोशिकाएं शरीर में बह रहे खून को तेजी से अपनी ओर आकर्षित करती हैं। इससे कोशिका का अनियंत्रित विकास होने लगता है। इस पर भी यह दवा लगाम लगाती है।

दवा ऐसे करती है काम 

कैंसर की यह नैनो मेडिसिन इंजेक्शन के माध्यम से रक्त में पहुंचा दी जाती है। दवा के साथ मिले नैनो पॉलीमर रक्त प्रवाह के साथ रोग प्रभावित कोशिकाओं तक पहुंचते हैं और उनसे चिपक जाते हैं। इससे प्राकृतिक तौर पर कोशिकाओं की मरम्मत हो जाती है। स्तन कैंसर की प्राथमिक अवस्था में अकेले इस इंजेक्शन का प्रयोग प्रभावकारी है। कैंसर के ज्यादा विकसित रूप में नैनो मेडिसिन इंजेक्शन के साथ सर्जरी और रेडियोथिरेपी भी करनी पड़ती है। 

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  • Web Title:IIT BHU claims to develop breast cancer drug from shrimp