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Hindi News उत्तर प्रदेशHindustan Special: बरेली में बीमार गायों को ठंड से बचाने को बन रहा 'आईसीयू', जाने क्या-क्या होगी व्यवस्था

Hindustan Special: बरेली में बीमार गायों को ठंड से बचाने को बन रहा 'आईसीयू', जाने क्या-क्या होगी व्यवस्था

जब पशु प्रेम की बात हो तो बरेली के धीरज पाठक का नाम सबसे पहले याद आता है। धीरज चौबारी स्थित रुहेलखंड पीएफए के पशु-पक्षी शेल्टर होम गोशाला में गायों को ठंड से बचाने को आईसीयू तैयार करवा रहे हैं।

Hindustan Special: बरेली में बीमार गायों को ठंड से बचाने को बन रहा 'आईसीयू', जाने क्या-क्या होगी व्यवस्था
Dinesh Rathourराघवेंद्र शर्मा,बरेलीSun, 22 Oct 2023 10:08 PM
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जब पशु प्रेम की बात हो तो बरेली के धीरज पाठक का नाम सबसे पहले याद आता है। धीरज चौबारी स्थित रुहेलखंड पीएफए के पशु-पक्षी शेल्टर होम गोशाला में गायों को ठंड से बचाने को आईसीयू तैयार करवा रहे हैं। आईसीयू के लिए सामान भी आने लगा है। धीरज पाठक का कहना है कि आईसीयू में 20-25 गायों को रखने की व्यवस्था होगी। रबर के गद्दे डाले गए हैं और चार हीटर लगाए जाएंगे। ड्रिप स्टैंड, मेडिकल यूनिट आदि आईसीयू में होगा। गायों को कंबल ओढ़ाए जाएंगे। उन्हें दान में बड़ी मात्रा में कंबल मिले हैं। जिला पशु चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में कई डॉक्टरों के नेतृत्व में गोवंशों का उपचार किया जाएगा। अभी उनके पास 15-16 ऐसी गाय हैं, जो बीमार हैं या फिर एक्सीडेंट में घायल हो गई थीं। यह चल नहीं सकती हैं। उनको रबर के गद्दों पर ही लिटाया जाता है। 

इंसानों की तरह होती है गायों की सेवा 

पीएफए के पशु-पक्षी सेल्टर होम में जो भी पहुंचता है, वहां पशुओं और बीमार गायों की सेवा को देखकर भावुक हो जाता है। यहां रेस्क्यू प्रभारी धीरज पाठक और विक्रांत यादव पशुओं की सेवा में जुटे रहते हैं। गायों को गद्दों पर लिटाया जाता है। उनको हाथों से इंसानों की तरह चारा, रोटियां, दवाइयां खिलाई जाती हैं। दिन में तीन बार गद्दे- कंबल बदलते हैं। पशु प्रेम में लीन धीरज पाठक को कई सम्मान मिल चुके हैं। यहां तक कि उनकी गोवंशों की सेवा का प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी भी सम्मान करते हैं। 

लोगों की मदद से बढ़ रहा कारवां 

धीरज पाठक का कहना है कि उनके पशु प्रेम को देखकर उनके साथ 50-60 ऐसे लोग जुड़ चुके हैं जो हर महीने गायों और घायल व बीमार पशुओं की सेवा को गुप्त दान करते हैं। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की ओर से भी पूरा सहयोग मिलता है। यह लोग पशुओं को खाने-पीने की वस्तुएं भेजते रहते हैं। कुछ ऐसे भी लोग हैं जो पशुओं के लिए दवाएं खरीदकर भेजते हैं।