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2 नवंबर, 2020|7:21|IST

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नौकरी छूटी तो एचआर मैनेजर बन गई 'कूड़ा बीनने वाली' , हैदराबाद से पैदल ही गोरखपुर पहुंची 

असफलता की मार पढ़े-लिखे कामयाब माने जाने वालों को भी बीमार बना देती है। ऐसा ही एक मामला यहां सामने आया है। आईएएस बनने का ख्वाब बुनने वाली हैदराबाद की युवती ने डिप्रेशन में मल्टीनेशनल कंपनी की एचआर मैनेजर की नौकरी छोड़ दी। दिमाग की बीमारी बढ़ती गई और वह 'कूड़ा बीनने वाली' बन गई। आठ महीने पहले घर छोड़ दिया। घर से निकलने के बाद मांगते-खाते और भटकते हुए करीब डेढ़ हजार किलोमीटर दूर वह यहां पहुंच गई।

यह युवती है तेलंगाना के वारंगल की रहने वाली रजनी टोपा कुला। वह 23 जुलाई को विक्षिप्त हालत में तिवारीपुर थाने के पास मिली। जुलाई की प्रचंड गर्मी में रजनी के तन पर आठ सेट कपड़े थे। वह कूड़ेदान के पास फेंके हुए सूखे चावल बीन कर खा रही थी। 

किसी ने इसकी सूचना थाने पर दे दी। दो सिपाही उसके पास पहुंचे। रजनी सिपाहियों को देखकर फरार्टेदार अंग्रेजी बोलने लगी। वह टूटी-फूटी हिंदी भी बोल रही थी। सिपाहियों ने इसकी जानकारी अधिकारी को दी। पुलिस वालों ने उसे मातृछाया चैरिटेबल फाउंडेशन के सुपुर्द कर दिया।

तीन महीने चला इलाज 
फाउंडेशन के निदेशक आलोक मणि त्रिपाठी ने बताया कि संस्थान में रजनी का इलाज शुरू हुआ। मनोचिकित्सक डॉ. अभिनव श्रीवास्तव ने इलाज किया। इलाज से रजनी की हालत सुधरने लगी। 

आईएएस बनने का था ख्वाब
रजनी के पिता ने मातृछाया के अधिकारियों से बताया कि वर्ष 2000 में एमबीए की पढ़ाई प्रथम श्रेणी से पास की। इरादा आईएएस बनने का था। दो बार सिविल सर्विसेज की परीक्षा दी। दोनों बार उसे नाकामयाबी मिली। इसके बाद वह अवसाद में आने लगी। उसने अवसाद से बचने के लिए हैदराबाद में एक बड़ी कंपनी में एचआर मैनेजर की नौकरी शुरू की। नौकरी के दौरान भी वह अवसाद से उबर नहीं पाई। रह-रहकर आईएएस न बन पाने की टीस उसके मन में उभरती रही।

अवसाद के कारण घर और नौकरी छोड़ दी 
लंबे समय से डिप्रेशन की शिकार रजनी बीमारी करीब साल भर पहले बढ़ने लगी। ऐसे में उसकी नौकरी भी छूट गई। इसके बाद दिमागी संतुलन तेजी से बिगड़ने लगा। बीते नवंबर उसने घर छोड़ दिया। वह गोरखपुर कैसे पहुंची, यह बता पाने में वह असमर्थ है। बीते 23 जुलाई को उसे पुलिस ने मातृछाया के सुपुर्द किया था।

दिव्यांग पिता ने आने में असमर्थता जताई तो फ्लाइट से पहुंचाया
आलोक ने बताया कि इलाज और काउंसलिंग से रजनी की हालत सुधरी। उसने घर का पता बताया। तेलंगाना के वारंगल के हनमकोंडा में रजनी का परिवार रहता है। मातृछाया की टीम ने उसके परिवारीजनों से संपर्क किया। परिवार में दिव्यांग पिता, बूढ़ी मां और एक भाई है। तीनों ने गोरखपुर आने से इनकार कर दिया। इसके बाद मातृछाया की टीम शुक्रवार को रजनी को हवाई जहाज से हैदराबाद ले जाकर परिवार से मिलाया।

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  • Web Title:hr manager lost his job found while collecting waste in Gorakhpur