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Hindi News उत्तर प्रदेशआकाश आनंद कैसे बचाएंगे बसपा की सिकुड़ती सियासी जमीन, मायावती के उत्‍तराधिकारी का सबसे बड़ा चैलेंज 

आकाश आनंद कैसे बचाएंगे बसपा की सिकुड़ती सियासी जमीन, मायावती के उत्‍तराधिकारी का सबसे बड़ा चैलेंज 

Akash Anand Challenges: उत्‍तर प्रदेश में दलितों पर कमजोर होती पकड़ के बीच मायावती के उत्तराधिकारी आकाश आनंद पर नई जिम्मेदारियों में सफलता पाने में ‘आकाश भर चुनौतयां’ दिखाई दे रही हैं।

आकाश आनंद कैसे बचाएंगे बसपा की सिकुड़ती सियासी जमीन, मायावती के उत्‍तराधिकारी का सबसे बड़ा चैलेंज 
Ajay Singhशैलेंद्र श्रीवास्तव,लखनऊTue, 25 Jun 2024 05:27 AM
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Akash Anand's challenges: यूपी में दलितों वोटों पर एकाधिकार जताने वाली बहुजन समाज पार्टी की सियासी जमीन धीरे-धीरे सिकुड़ रही है। दलितों के दम पर सियासी धाक जमाने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती को आज इन्हें बांधे रखने की जद्दोजहद करनी पड़ रही है। यूपी में दलितों पर कमजोर होती पकड़ के बीच मायावती के उत्तराधिकारी आकाश आनंद पर नई जिम्मेदारियों में सफलता पाने में ‘आकाश भर चुनौतयां’ दिखाई दे रही हैं।

विश्वास पैदा करना होगा 

यूपी में वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के बाद अगर देखा जाए तो बसपा की जमीनी पकड़ धीरे-धीरे दरक रही है। लोकसभा चुनाव में बसपा अपने सबसे निचले पायदान पर पहुंच गई है। उसे मात्र 9.39 फीसदी मत मिले हैं। उसके पीछे मायावती द्वारा लिए गए फैसलों को माना जा रहा है। भाजपा जैसी पार्टियां जहां गठबंधन में दल बढ़ाने में जुटी थीं, वहीं बसपा अपने दम पर चुनाव लड़ने पर अड़ी रही। अंदर खाने की माने तो बसपा कॉडर भी यही चाहता था, लेकिन मायावती नहीं मानी और यह संदेश चला कि भाजपा के इशारे पर वह इंडिया गठबंधन से दूरी बना रहीं हैं। आकाश के सामने यह चुनौती होगी कि खोया विश्वास कैसे पाए।

फिर से लोगों को जोड़ने की चुनौती
कांशीराम ने पार्टी गठन के समय बसपा के साथ हर उस बिरादरी के नेताओं को जोड़ जिनकी अपने बिरादरियों में पकड़ थी। लेकिन मायावती की पकड़ पार्टी पर जैसे-जैसे मजबूत होती गई, वैसे-वैसे इनमें से अधिकतर नेता सपाई या कांग्रेसी हो गए। लोकसभा चुनाव में बसपा से सपाई हुए 13 नेता सांसद बने हैं। आकाश के सामने बड़ी चुनौती बसपा से छिटके नेताओं और बिरादरी के वोटों को साथ लाने की होगी।

तीन सालों में कितनी मजबूत होगी बसपा
यूपी में विधानसभा चुनाव वर्ष 2027 में होना है। बसपा सुप्रीमो मायावती उम्र के ढलान पर हैं। चुनावों को छोड़ दिया जाए तो वह फील्ड छोड़कर पार्टी कार्यालय में ही बैठक करती हैं। मायावती ने आकाश को उत्ताराधिकारी घोषित करने के साथ ही जिलों में संगठन तैयार करने की जिम्मेदारी भी दी है। देखना होगा कि आकाश इन कसौटी पर कितना खरा उतर पाते हैं। आकाश ने विदेश में पड़ाई की है। देखना होगा कि वह जिलों में जाकर जमीन पर बैठक कर बात समझा पाने में कितने सफल हो पाते हैं।

आकाश के सामने प्रमुख चुनौतियां
- चंद्रशेखर आजाद के बढ़ती ताकत को रोकने की

- खिसकते हुए जनाधार को वापस पाने की

- दलितों के साथ पिछड़ों व अति पिछड़ों को साथ लाने की

- कांशीराम की तरह बसपा से हर वर्ग को जोड़ने की

- भाजपा के इशारे पर उम्मीदवार खड़ा करने के दाग को धोने की

- विधानसभा चुनाव में अपने दम पर सीटें जितवाने की चुनौती भी होगी