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पूर्वांचल की जौनपुर सीट पर धनंजय के समर्थन से कैसे रोचक हुई लड़ाई?समझें समीकरण

पूर्वांचल की जौनपुर सीट पर इस बार प्रतिष्ठा दांव पर है। धनन्जय सिंह द्वारा खुलकर भाजपा को समर्थन दिये जाने की घोषणा के बाद जौनपुर लोकसभा सीट पर लड़ाई और रोचक हो गई है।

पूर्वांचल की जौनपुर सीट पर धनंजय के समर्थन से कैसे रोचक हुई लड़ाई?समझें समीकरण
Deep Pandeyअजीत कुमार,जौनपुरSat, 18 May 2024 11:01 AM
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पूर्वांचल की जौनपुर सीट पर इस बार प्रतिष्ठा की लड़ाई है। 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट को जीत चुकी भाजपा हर हाल में इसे बसपा से छीनना चाहती है लिहाजा उसने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। दूसरी तरफ पत्नी का टिकट कटने से नाराज चल रहे क्षेत्र के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता धनंजय सिंह द्वारा खुलकर भाजपा को समर्थन दिये जाने की घोषणा के बाद जौनपुर लोकसभा सीट पर लड़ाई और रोचक हो गई है। कारण इस संसदीय क्षेत्र से 2009 में धनंजय सिंह बसपा के टिकट पर चुनाव जीते थे और उन्होंने सपा के पारसनाथ यादव को हराया था। धनंजय का भी यहां उनका व्यापक जनाधार माना जाता है विशेषकर ठाकुर बिरादरी में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।  

ऐसे में सपा-बसपा और भाजपा तीनों के उम्मीदवारों का सारा ध्यान अब क्षेत्र के सभी पांचों विधानसभा क्षेत्रों की जातीय समीकरणों को साधने में लग गया है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव में तीन विधानसभा सीटों पर बहुत ही कम अन्तर से हार-जीत का फैसला हुआ था। साथ ही पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा ने यह सीट जीत तो ली थी लेकिन हार-जीत का अन्तर मात्र 08 प्रतिशत का ही था। साथ ही जीत का अन्तर एक लाख से कम था। ऐसे में भाजपा के साथ-साथ सपा और बसपा ने भी अपनी पूरी शक्ति जातीय समीकरणों को साधने में लगा दी है। इस सीट पर ठाकुरों के साथ-साथ यादव, और मौर्या की भूमिका अहम मानी जाती हैं।   

क्यों चर्चा में है जौनपुर सीट
जौनपुर लोकसभा क्षेत्र से 2009 में बसपा के टिकट से जीत चुके बाहुबली नेता धनंजय सिंह की पत्नी कला रेड्डी को बसपा से लोकसभा का टिकट मिलना था पर उनका टिकट कट गया। इस फैसले से धनंजय सिंह इतने नाराज हुए कि उन्होंने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा कर दी है। बसपा ने जौनपुर से श्यामसिंह यादव को उम्मीदवार बनाया है। बसपा का कहना है कि जौनपुर से धनंजय सिंह ने ही टिकट लेने से मना कर दिया था। धनंजय सिंह ने इस बात से इंकार किया है। इस सीट पर भाजपा ने कृपा शंकर सिंह को तथा सपा ने बाबूसिंह कुशवाह को उम्मीदवार बनाया है। इस सीट पर 2019 लोकसभा में बसपा के शीमसिंह यादव विजय रहे थे उन्हें कुल 5,21,128 वोट मिले थे जो कुल मतों का 50.02 फीसदी था। वही भाजपा के कृष्ण प्रताप सिंह केपी को 4,40,192 मत मिले जो कुल मतों का 42.25 प्रतिशत था। 

2014 में भाजपा ने जीत ली थी यह सीट
2014 में मोदी लहर में भाजपा ने इस सीट को एक लाख से अधिक मतों से जीत ली थी। उस चुनाव में भाजपा के कृष्ण प्रताप सिंह केपी को 3,67,149 मत मिले थे जो कुल मतों का 36.45 प्रतिशत था जबकि बसपा के सुभाष पांडेय को कुल 2,20,839 मत मिले थे जो कुल मतों का 21.93 फीसदी था। उस चुनाव में सपा के प्रशांत यादव को 1,80,003 वोटों से ही संतोष करना पड़ा था जो कुल मतों का मात्र 17.87 प्रतिशत था। यही नहीं कांग्रेस के रविकिशन को केवल 42,759 मत ही मिल पाये थे जो मात्र 4.25 प्रतिशत था। 

 पांच विधानसभा सीटें हैं इस लोकसभा क्षेत्र में 
जौनपुर संसदीय सीट के तहत पांच विधानसभा सीटें आती हैं। मसलन, बदलापुर, शाहगंज, जौनपुर, मल्हनी एवं मुंगरा बादशाहपुर। 2022 के विधानसभा चुनाव में इन पांचों सीटों में से दो-दो सीटों पर भाजपा और सपा का कब्जा है जबकि एक़ सीट पर निर्बल इंडियन सोशलिस्ट हमारा आमदल (निषाद पार्टी) ने जीत दर्ज की थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में धनंजय सिंह भी मल्हनी विधानसभा सीट से जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर चुनाव लड़े थे लेकिन सपा से हार गया थे।  
 
 विधानसभा चुनाव 2022 में जौनपुर लोकसभा क्षेत्र की पांचो सीटों पर स्थिति -
विधानसभा क्षेत्र    विजयी दल    % मत मिले        पराजित दल        % मत मिले        
बदलापुर                 भाजपा         39.72            सपा            39.08
शाहगंज                 निषाद पार्टी    36.21            सपा            35.91
जौनपुर                    भाजपा        39.35            सपा            36.11
मल्हनी                       सपा        42.57            जद यू            34.91
मुंगरा बादशाहपुर         सपा        41.89            भाजपा            39.52