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Hindustan Special: जिंदगी की उम्मीद खो चुके इस हिन्दुस्तानी को फिर मिलेगा मौका, 30 साल बाद चूमेगा वतन की माटी

सब कुछ ठीकठाक रहा तो जिंदगी की उम्मीद खो चुके इस हिन्दुस्तानी को फिर अपने वतन की मिट्टी चूमने का मौका मिलेगा। जी हां, दुश्मन देश पाकिस्तान में करीब 30 साल से कैद रामपुर के युवक की रिहाई की...

Hindustan Special: जिंदगी की उम्मीद खो चुके इस हिन्दुस्तानी को फिर मिलेगा मौका, 30 साल बाद चूमेगा वतन की माटी
Dinesh Rathourविपिन कुमार शर्मा,रामपुर।Thu, 08 Feb 2024 09:42 PM
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सब कुछ ठीकठाक रहा तो जिंदगी की उम्मीद खो चुके इस हिन्दुस्तानी को फिर अपने वतन की मिट्टी चूमने का मौका मिलेगा। जी हां, दुश्मन देश पाकिस्तान में करीब 30 साल से कैद रामपुर के युवक की रिहाई की प्रक्रिया वहां की अदालत के आदेश पर शुरू हो चुकी है। जिसके तहत उसका सत्यापन कराया गया है। खुफिया तंत्र ने उसके परिजनों से संपर्क कर सत्यापन रिपोर्ट भारतीय उच्चायोग के जरिए पाकिस्तान एंबेसी को भेज दी है। रामपुर जनपद की सदर, स्वार और टांडा तीन तहसील ऐसी हैं जो मुस्लिम बाहुल्य हैं। यहां के तमाम लोगों की रिश्तेदारियां पाकिस्तान में हैं। जिसके चलते यहां के लोग पाकिस्तान और पाकिस्तान के लोग यहां रिश्तेदारी में आते-जाते रहते हैं। इसी सबके चलते रामपुर की टांडा तहसील का एक युवक पाकिस्तान चला तो गया लेकिन, वहां कैद होकर रह गया है। 30 साल का लंबा वक्त हो गया, उसकी घर वापसी नहीं हो पायी। अब जाकर उम्मीद की किरण जगी है कि उसे हिन्दुस्तान की माटी चूमने का मौका मिल सकता है।

पिता से नाराज होकर चला गया था युवक

टांडा के भव्वलपुरी निवासी आलम मियां 1993 में अपने पिता बिट्टन मियां से नाराज होकर चला गया था। उसके भाई अकबर मियां ने खुफिया तंत्र को ज्यादा कुछ तो नहीं बताया लेकिन, इतना जरूर बताया कि उसका भाई कोई एग्जाम देने के लिए जा रहा था, इसी दरम्यान कोई बात हुई और वह पिता से नाराज होकर चला गया। वह कहां है, कैसा है, उसके बारे में कोई जानकारी नहीं है।

आखिर कैसे जेल पहुंचा आलिम, उठा सवाल

आलिम मियां पाकिस्तान कैसे पहुंचा, वहां उसने क्या अपराध किया जो वहां की जेल में कैद हो गया, क्या अवैध तरीके से पाकिस्तान में घुसा था या फिर वीजा अवधि खत्म हुई..., ऐसे तमाम सवाल हैं जिनका जवाब यहां किसी के पास नहीं है। न परिवार को पता है और न ही यहां के खुफिया तंत्र को।

पिता का हो चुका है देहांत

पाकिस्तान की कैद में बंद आलिम मियां के पिता बिट्टन मियां का निधन हो चुका है। खुफिया तंत्र की माने तो स्थानीय स्तर से आलिम मियां की वापसी के लिए कोई ठोस पैरवी भी नहीं हो सकी है।

घर में लग गई आग, नहीं बचा कोई रिकार्ड

सत्यापन के लिए जब खुफिया तंत्र ने फोटो-कोई डाक्यूमेंट मांगा तो परिजनों ने देने से इंकार कर दिया। बताया कि घर में आग लग गई थी, जिसमें रिकार्ड जल गया। किसी एग्जाम का एक प्रवेश पत्र बचा है लेकिन, उस पर फोटो नहीं है।

पाक उच्चायोग को भेजी सत्यापन रिपोर्ट

किसी भी बंदी का अदालत से जब रिहाई परवाना जारी होता है तो उसका एक बार सत्यापन कराया जाता है। इसी क्रम में पाकिस्तान की जेल में बंद आलिम मियां का सत्यापन कराया गया है। पाक उच्चायुक्त ने भारतीय उच्चायोग से वेरीफिकेशन रिपोर्ट मांगी थी। जिसे स्थानीय खुफिया तंत्र ने शासन के जरिए उच्चायोग को भेज दिया है।

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