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Hindustan Special: इस कारागार की दीवार, जितनी भी कोशिश हुई बढ़ती रही दरार, जानें क्या थी वजह 

Hindustan Special: यूपी के इस कारागार की दीवार में ऐसी दरार जो मरम्मत के बाद भी ठीक होने की बजाए बढ़ती रही। शाम तक मजदूर मरम्मत करते और अगली सुबह फिर दरार और चौड़ी बन जाती।

Hindustan Special: इस कारागार की दीवार, जितनी भी कोशिश हुई बढ़ती रही दरार, जानें क्या थी वजह 
Deep Pandeyस्कंद शुक्ला,बस्तीFri, 24 Nov 2023 09:24 AM
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इस कारागार की दीवार में ऐसी दरार जो मरम्मत के बाद भी ठीक होने की बजाए बढ़ती रही। शाम तक मजदूर मरम्मत करते और अगली सुबह फिर दरार और चौड़ी बन जाती। बार-बार दरार बनने से परेशान आकर अंग्रेज अधिकारियों ने स्थानीय पंडितों से परामर्श लेकर इस स्थान पर मां समय माता के मंदिर बनवाया। इसके बाद 1888 में जेल की दीवार बनाई जा सकी। 

चैत्र और आश्विन महीने में विधि-विधान से नवरात्र मनाया जाता है। इस मौके पर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान जेल के स्टाफ व कारागार में निरुद्ध बंदी श्रद्धालु मां के दर्शन करते हैं। हालांकि जेल मैनुअल की बंदिशों की वजह से सभी को दर्शन करने की अनुमति नहीं मिल पाती है। इस मंदिर की प्रसिद्धि दूर-दूर तक है। धार्मिक मान्यता है कि मां के दर्शन मात्र से साधक की मनोकामना पूरी होती है।   

बन रही थी बाऊंड्री, पड़ जा रही थी दरार 

आश्चर्य की बात है कि मंदिर के पास की दीवार की बार-बार मरम्मत कराई जाती थी। फिर भी कारागार की दो फीट मोटी दीवार में दरार पड़ जा रही थी। जेल में सजा निरुद्ध रह चुके पूर्व बंदियों का कहना है कि पूर्व में इस जगह पर एक नीम का पेड़ था। उस समय लोग नीम के पेड़ की पूजा किया करते थे। तकरीबन 135 वर्ष पूर्व स्थान पर जब जेल की चहारदीवारी बन रही थी। उस स्थान पर दीवार बार-बार जोड़ी जाती तो अगले दिन फिर चटक जाती थी। आखिरकार समय माता की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद जेल की चहरदीवारी पूरी हो सकी थी। तभी से यह स्थल आस्था का केंद्र है।   

मंदिर के प्रति जेल स्टॉफ की आस्था 

समय माता मंदिर की स्थापना कराने वाले क्रांतिकारी पुजारी बाबा का भी मंदिर पास में स्थापित है। बताते हैं यहां पर तैनात जेल अधिकारी ज्वाइन करने के बाद अगर समय मां के मंदिर में दर्शन के लिए नहीं जाते हैं तो उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कारागार सूत्रों के मुताबिक ऐसे कई अधिकारी यहां पर सस्पेंड हो चुके हैं। एक अफसर ने निलंबित होने के बाद खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी। 

दूसरी बाउंड्रीवाल भी की गई तैयार 

2012 से बस्ती जिला कारागार में 20 फीट ऊंची दूसरी बाउंड्रीवाल सुरक्षा की दृष्टिकोण से तैयार की गई है। यह बाउंड्रीवाल लगभग सवा किमी के एरिया को कवर करती है। बस्ती जेल लगभग 43 एकड़ में बनी है, जिनमें नौ बैरकों में पुरुष बंदी और कैदी रहते हैं। इसके अलावा एक महिला बैरक भी है। 

कारागार मंत्री भी ले चुके हैं मां का आशीर्वाद 

साल भर पहले जिला कारागार के अधीक्षक का प्रभार एडीएम कमलेश चन्द्र बाजपेयी के पास था तो उस समय तत्कालीन जेलर व वर्तमान में अधीक्षक इटावा सतीश चन्द्र त्रिपाठी ने एडीएम से अनुमति लेकर समय माता मंदिर  व पुजारी बाबा के मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। प्रदेश के कारागार मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने इसका लोकार्पण किया था। इसके बाद जब भी कारागार मंत्री बस्ती जेल का दौरा करते हैं तो परिसर के भीतर समय माता मंदिर में दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद जरूर लेते हैं। धर्मवीर दो बार कारागार का दौरा कर चुके हैं।

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