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Hindustan Special: दारुल उलूम देवबंद ने 130 साल में दिए 10 लाख फतवे, ये हैं सबसे चर्चित मामले

दीनी तालीम के लिए विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले दारुल उलूम के फतवे इस्लामिक जगत में अपनी महत्ता रखते हैं। संस्था ने 130 सालों के दौरान अब तक 10 लाख से ज्यादा फतवे जारी कर चुका है।

Hindustan Special: दारुल उलूम देवबंद ने 130 साल में दिए 10 लाख फतवे, ये हैं सबसे चर्चित मामले
Pawan Kumar Sharmaमुशर्रफ उस्मानी,देवबंदTue, 05 Dec 2023 07:44 PM
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दीनी तालीम के लिए विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले दारुल उलूम के फतवे इस्लामिक जगत में अपनी महत्ता रखते हैं। संस्था के 157 साल से ज्यादा के इतिहास में 130 सालों के दौरान अब तक 10 लाख से ज्यादा फतवे जारी हो चुके हैं। इनमे ऑनलाइन सहित कई फतवे खासे चर्चित भी रहे हैं। फतवा विभाग के रिकार्ड के अनुसर प्रतिवर्ष 8 से 10 हजार फतवे जारी होते हैं। 

1893 में बना दारुल इफ्ता विभाग 

आजादी के लिए 1857 की क्रांति के बाद देवबंद में दीनी तालीम के मरकज दारुल उलूम की स्थापना 30 मई 1866 को की गई। 157 साल के अपनी दीनी तालीम के सफर में संस्था में फतवों के लिए 1893 में अलग से एक विभाग दारुल इफ्ता के नाम से बनाया गया। दारुल उलूम के फतवे देश में ही नहीं इस्लामिक जगत में भी अहम स्थान रखते हैं। इतना ही नहीं इस्लामिक देशों में दिए गए अक्सर फतवों की राय दारुल उलूम के मुफ्ती-ए-कराम से भी ली जाती है। 

आतंकवाद पर दिया था फतवा 

फरवरी 2008 में दारुल उलूम ने आतंकवाद को हराम करार देते हुए फतवा जारी कर एक सम्मेलत आयोजित किया था। इसमें देशभर के सभी फिरकों आलीम-ए-दीन और साल 2013 में जमीयत ने विश्वव्यापी उलेमा का सम्मेलन बुलाकर फतवे पर सर्वसम्मति प्राप्त की थी।   

ऑनलाइन दिए 50 हजार फतवे 

विश्व में आधुनिकीकरण की बयार में दारुल उलूम का शिक्षा विभाग ही नहीं दारुल इफ्ता भी अछूता नहीं रहा। साल 2008 में दारुल उलूम के इफ्ता विभाग को कप्यूटराइज्ड कर दिया गया। देश ही नहीं विदेशों से पूछे जाने वाले सवालों का जवाब ऑनलाइन कर दिया गया। संस्था के फतवा विभाग के ऑनलाइन प्रभारी मुफ्ती महमुदुल्लाह कासमी ने बताया कि 15 साल में 50 हजार से ज्यादा फतवे ऑनलाइन जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि दस्ती एवं डाक से भेजे जा रहे फतवों को भी अब कप्यूटराइज्ड किया जा रहा है। 

यह हैं दारुल उलूम के चर्चित फतवे 

दारुल उलूम देवबंद द्वारा दिए जाने वाले फतवे कुरान और हदीस की किताबों से दिए जाते हैं। फतवा दिए जाने की संस्था में बाकायदा एक खंडपीठ है। लड़के और लड़कियों की सहशिक्षा की मुखालफत सहित इमराना प्रकरण, कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के फौजी आरिफ और उसकी पत्नी गुड़िया के संबंध में दिया गया फतवा हो या शेयर मार्किट और प्रोविडेंट फंड सहित फैशनेबल बुर्के हों या ब्यूटी पार्लर में पुरुष कर्मियों की मौजूदगी सहित कई फतवे आज भी गाहे-बगाहे चर्चा का विषय बनते रहे हैं। 

शरई हुक्म होता है फतवा: मुफ्ती कासिम नोमानी 

दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि फतवा शरई हुक्म होता है जो कि शरई मसलों पर होता है। यह किसी पर लागू नहीं किया जाता। फतवे पर अमल करना या न करना उसके लेने वाले पर निर्भर है।  

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