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हिन्दुस्तान शिखर समागम: गृहमंत्री राजनाथ सिंह का स्पेशल इंटरव्यू

rajnath singh

गृह मंत्री राजनाथ सिंह शब्दों का समूची सामथ्र्य के साथ इस्तेमाल करते हैं। पिछले दिनों लखनऊ में आयोजित तीसरे शिखर समागम में उन्होंने उत्तर भारत के चुनिंदा लोगों के सामने शशि शेखर से बातचीत के दौरान सभी सवालों पर खुलकर अपनी राय व्यक्त की। पेश है प्रमुख अंश

शशि शेखर- आप मंत्रिमंडल में सबसे वरिष्ठ हैं। सरकार ने 70 प्रतिशत कार्यकाल पूरा कर लिया है। इसे कैसे आंकते हैं आप? 

राजनाथ सिंह- वैसे, मैं अपने निजी कामकाज का मूल्यांकन नहीं करना चाहता। लेकिन जहां तक सरकार का सवाल है, तो इस सरकार के आने के बाद अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत की साख और विश्वसनीयता बढ़ी है और ‘इंटरनेशनल पॉलिसी’ में भी भारत की अहमियत और भारत की बातों का महत्व बढ़ा है। दुनिया अब यह महसूस करती है कि भारत इस समय सबसे तेजी से तरक्की कर रही अर्थव्यवस्था है और यह भी मानती है कि अब भारत कमजोर नहीं रहा, वह अब दुनिया के ताकतवर देशों की कतार में खड़ा हो गया है। यह मैं इसलिए नहीं कह रहा कि मैं सरकार का हिस्सा हूं, बल्कि जब राजनीतिक और आर्थिक विश्लेषकों के लेख देखता हूं, तो कहीं पर थोड़ी-बहुत आलोचना भी दिखाई देती है, पर मुझे उसमें प्रशंसा ही ज्यादा दिखाई देती है।

शशि शेखर- लेकिन जैसे जीएसटी, नोटबंदी पर ऐसा लग रहा था, जिस असर की बात की गई थी और जिस वायदे के साथ किया गया था, उसे हासिल नहीं कर पाए, यह एक धारणा हो गई थी?

राजनाथ सिंह- हम जो हासिल करना चाहते थे, काफी हद तक हमने हासिल किया है। नक्सलवाद के फ्रंट पर और पूर्वोत्तर के उग्रवाद पर और जो ‘टेटर फंडिंग’ होती थी, उसमें नोटबंदी से काफी हद तक कमी आई है।

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शशि शेखर- साढ़े तीन साल में खासकर अर्थव्यवस्था पर जोर दिया गया, आप कह रहे हैं कि हम सबसे तेजी से तरक्की कर रही अर्थव्यवस्था हैं।

राजनाथ सिंह- यह मैं नहीं कह रहा हूं, यह पूरी दुनिया कह रही है। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में, जब हमारी सरकार बनी थी, तो हमारी रैंकिंग 130 की थी। उसमें हमने 30 की छलांग लगाई है।

शशि शेखर- यह आंकड़ों का एक पक्ष है, दूसरे पक्ष को देखें, तो हम कई चीजों में बांग्लादेश के भी पीछे चले गए हैं। यह जो द्वैत है, ‘हंगर इंडेक्स’ की बात करें, तों हम नीचे आ गए हैं?

राजनाथ सिंह- देखिए, समय केवल साढ़े तीन वर्षों का हुआ है। सरकार की बहुत सारी योजनाओं, बहुत सी नीतियों को 126 करोड़ की आबादी और बहुत बड़े भूगोल वाले देश में लागू करना आसान नहीं है। कोई चीज लागू की जाती है, उसका प्रभाव पूरी तरह नीचे तक पहुंचने में समय लगता है। कोई यह दावा नहीं कर सकता कि हम जो निर्णय कर रहे हैं, साल-दो साल में उसका प्रभाव पूरी तरह नीचे तक दिखने लगेगा। लेकिन मैं आश्वस्त हूं। भारत से गरीबी को मिटाना हमारी सरकार का संकल्प है। बेरोजगारी का भी बहुत बड़ा संकट है। उस पर भी हम विजय हासिल करना चाहते हैं।

शशि शेखर- लेकिन रोजगार के अवसर घटे हैं। यह सरकार की रिपोर्ट कहती है। क्या आपात स्थिति मानकर कोई योजना बन रही है, जिससे लोगों को लगे कि रोजगार बढ़ने जा रहे हैं?

राजनाथ सिंह- सरकार का जो कौशल विकास कार्यक्रम है, उसका लक्ष्य है कि तीन वर्ष के अंदर ही एक करोड़ नौजवानों को कुशल बनाएंगे और रोजगार मुहैया कराएंगे। जो कुछ कदम उठाए गए हैं, उससे तात्कालिक तौर पर भले ही दिखाई देता हो कि नौकरियां घटी हैं, मगर जब कभी दुनिया में कठोर फैसले हुए हैं, तो अल्प काल के लिए परेशानी होती है, लेकिन दीर्घकालिक फायदा भी दुनिया के देशों को हुआ है।

शशि शेखर- जब हम विकास की बात करते हैं। सबका साथ, सबका विकास का नारा देते हैं, तब सामाजिक समरसता की बात आती है। यह बहुत जरूरी है, लेकिन उस समय जब कहीं कुछ लोग गोरक्षक के नाते कुछ करते हैं, लोग मारे जाते हैं, तो देश की बड़ी बदनामी होती है।

राजनाथ- बिल्कुल होती है।

शशि शेखर- उसके लिए कोई ठोस नीति हो, जिससे लोगों को यह भरोसा हो कि भारत सुरक्षित है?

राजनाथ सिंह- किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं। ये जो मामले आए, गायों की सुरक्षा को लेकर आए थे। मैंने स्वयं गृह मंत्री के तौर पर ‘एडवाइजरी’ जारी की राज्यों को...। यह राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे सुनिश्चित करें कि कोई कानून हाथ में लेने की जुर्रत न करे। मुख्यमंत्रियों,गर्वनरों से मैंने सीधे बात की।

शशि शेखर- आपने कहा कि आईएस से लड़ने में जो सबसे मददगार है, वह मुस्लिम समाज है। कोई उदाहरण बता सकते हैं?

राजनाथ सिंह- कट्टरता एक वैश्विक समस्या है। इंडोनेशिया के बाद सर्वाधिक मुसलमान भारत में रहते हैं, लेकिन भारत में अन्य देशों की अपेक्षा सबसे कम कट्टरता है। इसका श्रेय मैं देना चाहता हूं हिन्दुस्तान में रहने वाले इस्लाम को मानने वालों को...।

शशि शेखर- जब आप यह कहते हैं, तो थोड़ा पार्टी लाइन से आप हट नहीं जाते?

राजनाथ सिंह- नहीं, बिल्कुल नहीं। जो हकीकत है, जो दिल की बात है, वही मैं बोलता हूं।

शशि शेखर- क्या आपको लगता है कि आईएस का खतरा पहले की अपेक्षा बढ़ा है?

राजनाथ सिंह- नहीं, मैं ऐसा नहीं मानता हूं कि खतरा बढ़ा है। यह बात सही है कि हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। भारत को परेशान करने की कोशिश करता रहता है। लेकिन हमारी खुफिया एजेंसियों, सेना, अद्र्धसैनिक बलों के बेहतर तालमेल से हमको कामयाबी मिल रही है। 

शशि शेखर- पाकिस्तान की बात आती है, तो कश्मीर हमारे जेहन में आ जाता है। नोटबंदी से पत्थरबाजी कम होने की बात कही जा रही है, लेकिन इन दिनों वहां 18 राजनेता मारे गए हैं।

राजनाथ सिंह- 1995 में 6,000 घटनाएं हुईं केवल एक साल में, लेकिन इस समय 300 घटनाएं हुईं। कश्मीर के हालात में सुधार हुआ है। इसीलिए भारत सरकार के विशेष प्रतिनिधि दिनेश्वर शर्मा को विशेष तौर पर भेजा गया है कि वहां वह सभी पक्षों से बातचीत करें। जो भी व्यवधान हैं, उनको दूर करने के लिए भारत सरकार को क्या करना चाहिए, इस पर सुझाव दें।

शशि शेखर- कश्मीर में माना जाता है कि सरकार बनाने की जल्दी नहीं की गई होती, आप लोग भी सरकार में शामिल होने की जल्दी में नहीं होते, तो शायद स्थिति सुधर जाती?

राजनाथ सिंह- यह केवल अटकल है, दूसरी बात भी हो सकती थी। सरकार बनने में देरी होने पर जनता में आक्रोश पैदा हो सकता था। 75 प्रतिशत मतदान हुआ। किसी को बहुमत नहीं मिला था। 

शशि शेखर- आप लोगों का एक वायदा था। आपने और प्रधानमंत्री ने भी कहा था चुनाव से पहले कि कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास होगा। इस संबंध में कोई काम तो नहीं हुआ?

राजनाथ सिंह- मुफ्ती मोहम्मद सईद मुख्यमंत्री बनने के बाद मिलने आए, तो मैंने उस समय इसका आग्रह किया था। उस समय उन्होंने सहमति व्यक्त की थी कि कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास होना चाहिए। उन्होंने जमीन का आवंटन भी कर दिया था।  बाद में कुछ गतिरोध से मामला रुका हुआ है। वर्तमान मुख्यमंत्री ने भी सहमति दी है। उन्होंने भी कहा है कि प्रभावी कदम उठाएंगे और यह काम जरूर करेंगे। 

शशि शेखर- रोहिंग्या का भी कश्मीर से जुड़ा मुद्दा है। सर्वाधिक रोहिंग्या जम्मू में हैं। वहां बसाने का क्या उद्देश्य हो सकता है?

राजनाथ सिंह- इसका जवाब तो पहले की सरकार ही दे पाएगी, लेकिन एक स्थान पर बसने देने में एहतियात बरतना चाहिए था।

शशि शेखर- उनको हटाने में कितनी कामयाबी मिली है?

राजनाथ सिंह- अभी इस संबंध में हम कोई जवाब नहीं देंगे। फिर भी, मैं बता दूं कि जो भी फैसला होगा, मानवीय आधार पर करेंगे। 

शशि शेखर- आपके पुराने दोस्त राज ठाकरे कहते हैं कि आपके अगले चुनाव में जो कुछ सहारे और आसरे हैं, उसमें दाऊद भी है। दाऊद खुद आना चाहता है, बीमार है। उसे लगता है कि अपनी जन्मभूमि पर मरें। आप लोग उसे प्रचारित करना चाहते हैं?

राजनाथ सिंह- यह संदेश तो मुझे आज तक नहीं मिला। मिलेगा, तो देश के गृह मंत्री को ही मिलेगा। मुझे ही मिलेगा। हम चाहते हैं कि दाऊद आए, उसके लिए जो भी दस्तावेज जरूरी हैं, वे सारे पाकिस्तान को मुहैया कराए जा चुके हैं। लेकिन कब आएगा, कैसे आएगा, क्या होगा, उसके लिए प्रतीक्षा करनी होगी।

शशि शेखर- एक काम आपके मंत्रालय ने बहुत अच्छा किया है। आंकड़े बताते हैं कि देश में नक्सलवाद का दायरा घट रहा है।  देश के 100 जिलों से घटकर अब उसका प्रभाव 15-20 जिलों में ही रह गया है। 

राजनाथ सिंह- 15-20 जिले क्या, मान लीजिए कि पांच-सात जिलों तक सिमटकर रह गया है। लक्ष्य यह है कि 2022 तक नक्सलवाद और उग्रवाद को हिन्दुस्तान से समाप्त कर दें।

शशि शेखर- ये जादू हुआ कैसे? समस्या बहुत बड़ी थी?

राजनाथ सिंह- दो कारण हैं। जिन क्षेत्रों में ये शरण लेते थे। उन पिछड़े क्षेत्रों के लोगों का शोषण करते थे। वहां पर हम लोगों ने, राज्य सरकारों ने पहुंचने की कोशिश की। जनता से संपर्क और संवाद बढ़ाया, विकास किया। लोग यह महसूस करने लगे कि विकास चाहते हैं, तो हमें सरकार के साथ खड़े होना चाहिए। पहले नक्सलवाद का जो प्रभाव था, उसमें 55 फीसदी की कमी आई है। और पूर्वोत्तर के उग्रवाद में तो 75 फीसदी की कमी आ गई है। 

शशि शेखर- एक सवाल है कि हुर्रियत नेताओं को भारत सरकार सुरक्षा क्यों प्रदान करती है, जबकि वे पाकिस्तानपरस्त हैं?

राजनाथ सिंह- भारत सरकार सुरक्षा प्रदान नहीं करती, वह राज्य सरकार करती है।

शशि शेखर- राज्य सरकार भी क्यों करती है? गोरक्षकों के लिए एडवाइजरी भेज सकते हैं, तो इसके लिए भी भेज सकते हैं?

राजनाथ सिंह- ‘एडवाइजरी’ तो भेजते हैं, माने न माने यह उनकी मर्जी...।

शशि शेखर- कश्मीर में अनुच्छेद  370 और 35-ए पर आपकी सरकार की क्या योजना है?

राजनाथ सिंह- दोनों पर सरकार ने कोई छेड़छाड़ नहीं की है। कुछ संगठन हैं, जिन्होंने पीआईएल दायर की हैं। इस समय गेंद कोर्ट के पाले में है। कुछ लोग अफवाहें फैला रहे हैं कि सरकार ने यह कोशिश की है, पार्टी ने पहल की है। मैं दो टूक कहना चाहता हूं कि न पार्टी ने, न सरकार  ने ऐसी कोई पहल की है। हमें कश्मीर की समस्या का समाधान वहां के लोगों को विश्वास में लेकर करना है। हम लोगों में डर नहीं, भरोसा पैदा कर समाधान चाहते हैं। 

शशि शेखर- सीमा पर अद्र्धसैनिक बलों की कमी है, सिर्फ संख्या नहीं, हथियारों-संसाधनों, ट्रेनिंग आदि की भी कमी है? क्या सरकार कोई कदम उठा रही है?

राजनाथ सिंह- अद्र्धसैनिक बलों में जवानों की संख्या लगभग दस लाख है। हम बढ़ा रहे हैं। नई बटालियन आ रही है। मंजूरी दे दी है।

शशि शेखर- असलहे और ट्रेनिंग के लिए कोई काम हो रहा है?

राजनाथ सिंह- बहुत अच्छे-अच्छे असलहे हैं। जो भी उनको चाहिए। तीन महीने पहले एनएसजी मुख्यालय में अफसरों से चर्चा हुई थी। उन्होंने बताया कि उक्त हथियारों-संसाधनों की जरूरत है। 

शशि शेखर- अक्सर ऐसा होता है कि दंतेवाडा में हमला होता है, पर वहां ‘लैंड माइन्स’ से निपटने वाले वाहन नहीं हैं?

राजनाथ सिंह- यह समस्या अभी है। ‘लैंड माइन्स’ वाली चुनौती बहुत बड़ी है। दुनिया के दूसरे देशों से तकनीकी ला रहे हैं।

शशि शेखर- क्या इजरायल से कुछ सीख रहे हैं?

राजनाथ- ‘कमांड ऐंड कंट्रोल सिस्टम’ जो इजरायल का है, मैंने वहां देखा था, वह बहुत अच्छा है। सीमा पर जो बाड़ थी, मैंने कहा कि केवल इससे काम नहीं चलेगा, बल्कि आवश्यकता है वृहद एकीकृत सीमा प्रबंधन की। और कई हजार किमी ऐसे हैं, जो नदी-जंगल हैं, जहां बाड़ लगाना संभव नहीं। वहां तकनीकी समाधान का प्रयोग होता है। राडार, सेंसर, थर्मल इमेजर का प्रयोग होता है।  

शशि शेखर- इन दिनों दिल्ली में प्रदूषण के जो हालात हैं। क्या केंद्र  एनसीआर को प्रदूषण मुक्त बनाने की कोई योजना ला रहा है?

राजनाथ सिंह- हम दिल्ली सरकार को हर तरह की मदद दे रहे हैं। दिल्ली सरकार कदम उठा रही है।

शशि शेखर- प्रदूषण के लिए पांच-छह राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं, इनको बुलाकर बात क्यों नहीं करते? दिल्ली की हालत तो सब जानते हैं, पर वाराणसी, पटना में भी प्रदूषण का स्तर समान है। 

राजनाथ सिंह- प्रदूषण एक बड़ा संकट है। देश ही नहीं, यह पूरी दुनिया की समस्या है। इस चुनौती का मुकाबला करेंगे। 

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  • Web Title:Hindustan Shikhar Samagam Special interview with HM Rajnath singh
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