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हिन्‍दुस्‍तान पूर्वांचल समागम: अब हर क्षेत्र में बज रहा है प्रतिभाओं का डंका

मुख्‍य संवाददाता ,गोरखपुर Published By: Ajay Singh
Mon, 02 Aug 2021 12:23 PM
हिन्‍दुस्‍तान पूर्वांचल समागम: अब हर क्षेत्र में बज रहा है प्रतिभाओं का डंका

पूर्वांचल पिछड़ेपन के दंश से तेजी से उबर रहा है। पूर्वांचल की कभी उबड़-खाबड़ रहती सड़कें अब गड्ढामुक्त हो गई हैं। फोरलेन, सिक्सलेन और एक्सप्रेस-वे का तेजी से निर्माण हो रहा है। सड़कों का संजाल बनने से पूर्वांचल के विकास को भी रफ्तार मिली है। कल-कारखाने स्थापित होने से युवाओं का पलायन भी रुका है। सरकार से मदद और जरूरी संसाधन तथा बाजार मिलने से युवाओं में स्वरोजगार का जज्बा बढ़ा है। युवाओं ने ऐसा कर दिखाया है जिसकी लोग दाद दे रहे हैं। आपका अपना समाचार पत्र ‘हिन्दुस्तान’ 4 अगस्त को गोरखपुर में पूर्वांचल समागम कर रहा है। इस आयोजन में गोरखपुर-बस्ती मंडल की 50 ऐसी शख्सियतों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में प्रतिभा और दक्षता का लोहा मनवाया है। सम्मानित की जाने वाली शख्सियतों से हम आप को लगातार रू-ब-रू करा रहे हैं।

ऐश्वर्य उपाध्याय, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, गोरखपुर

ऐश्वर्य उपाध्याय सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। ऐश्वर्य ने वन प्वाइंट एप के माध्यम से ऑनलाइन डिजिटल मण्डी का प्लेटफार्म तैयार किया। इससे न केवल आम नागरिकों को मदद मिल रही है बल्कि प्रशासन ने भी होम डिलीवरी के लिए इस प्लेटफार्म का इस्तेमाल किया। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में जिला प्रशासन ने आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति लोगों तक पहुंचाने के लिए इस एप का इस्तेमाल किया।

 

जैनुल आब्दीन, स्टार्टअप ब्योम, गोरखपुर

जैनुल आब्दीन वर्तमान समय में बीएससी के छात्र हैं। इन्होंने एयरोस्पेस क्षेत्र में काम करने के लिए पूर्वी यूपी में पहला स्टार्टअप ब्योम शुरू किया। जैनुल की अगुआई में टीम ने टायकॉथन में शिरकत की। इनकी टीम अंतिम राउंड तक पहुंची थी। ब्योम को एमएसएमई मंत्रालय के साथ ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मान्यता दी। एयरोस्पेस के क्षेत्र में काम करने को लेकर उन्होंने कई योजनाएं तैयार की हैं।

दीपक यादव, स्टार्टअप, गोरखपुर

दीपक यादव दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के छात्र हैं। इन्होंने पांच बार नेट क्वालीफाई किया है। अपने हुनर के बल पर दीपक अच्छी कमाई कर रहे हैं। गांव की महिलाओं से आचार व सिरका बनवाकर ऑनलाइन बेच रहे हैं। इसके साथ ही सहपाठियों के साथ स्टूडेंट लस्सी कॉर्नर संचालित कर रहे हैं। रोजाना करीब 90 कुंतल दही खप रही है। इन्होंने 40 युवाओं को रोजगार दिया है।

 

वैष्णवी सिंह, उचवा टोला, गोरखपुर छावनी

बांसगांव तहसील क्षेत्र के दुबौली गांव में स्थित इंटरमीडिएट कालेज की छात्रा वैष्णवी सिंह ने गोरखपुर का नाम रोशन किया है। वैष्णवी सिंह ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में 65 किलोग्राम भार वर्ग कुश्ती में गोल्ड मेडल जीता है। यह प्रतियोगिता गौतमबुद्ध नगर में आयोजित हुई थी। वर्ष 2021 में हुई नेशनल प्रतियोगिता में वैष्णवी सिंह ने तीसरा स्थान हासिल कर परचम लहाराया था। वह नेशनल कैंप में चयनित हुई हैं।

संगीता चौधरी, महिला ऑटो चालक, गोरखपुर

गोरखपुर शहर की रहने वाली संगीता किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। संगीता ने समाज के बंधनों और कुरीतियों की परवाह नहीं की। झिझक तोड़कर पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। इन्होंने शहर में ऑटो चलाना शुरू कर दिया। संगीता ने पूर्वांचल की पहली महिला ऑटो चालक होने की शोहरत हासिल की। उनकी प्रेरणा से अब कई महिलाएं ऑटो चला रही हैं। इन्हें सरकार की पिंक ऑटो योजना का लाभ भी मिला है।

 

स्निग्धा चटर्जी, सरस्वतीपुरम, गोरखपुर

स्निग्धा चटर्जी बचपन से मेजर थैलेसीमिया पीड़ित हैं। उन्हें हर 15 दिन पर दो यूनिट खून की जरूरत होती है। इस बीमारी से लड़ते हुए वह प्रदेश की पहली मेजर थैलेसीमिया पीड़ित नेट क्वालीफायर बनीं। वर्तमान में स्निग्धा एक कॉलेज में सहायक प्रोफेसर हैं। स्निग्धा ने इस मुश्किल को कमजोरी नहीं बनने दी। अस्पताल में जब ब्लड चढ़ाया जाता है तो उस वक्त भी मौका निकालकर पढ़ाई कर लेती हैं।

आदित्या यादव, दिव्यांग खिलाड़ी, गोरखपुर

आदित्या जन्म से ही बोल-सुन नहीं पाती हैं। मूकबधिर होने के बाद भी अपने जज्बे के बल पर खेल के क्षेत्र में वह मुकाम हासिल कर लिया जो बिरले ही कर पाते हैं। महज 11 वर्ष की उम्र में वर्ष 2019 में मूकबधिर विश्व चैंपियनशिप में सीनियर वर्ग में चीनी ताइपे में खेली थीं। उसमें वे क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थीं। राष्ट्रीय स्तर पर भी मूकबधिर वर्ग और सामान्य वर्ग में जूनियर और सीनियर वर्ग में कई तमगा हासिल किया है।

 

हिना फातिमा, नेशनल हैंडबाल प्लेयर, बस्ती

बस्ती जिले की टीम को स्टेट चैंपियन बनाने वाली हैंडबाल की सीनियर नेशनल प्लेयर हिना ने मुफलिसी को मात देकर यह मुकाम बनाया है। हिना का बचपन काफी अभावों में बीता है। परिवार के सदस्यों ने मजदूरी की है। ठेला लगाकर परिवार का गुजारा किया है। प्रशासन ने आवास के साथ ही फोरलेन किनारे जिस जगह हिना की मां ठेला लगाती हैं, उस नजूल की भूमि को उनके नाम कर दिया है।

डॉ. संजय श्रीवास्तव, मत्स्य पालक, महराजगंज

मछलियों की ब्रीडिंग पर शोध करने के बाद डॉ. संजय श्रीवास्तव ने मत्स्य पालन शुरू कर दिया। डा. संजय मछलियों का खुद बीज तैयार कराते हैं और उसे मत्स्य पालकों को भी उपलब्ध कराते हैं। पंतनगर विश्वविद्यालय में रिसर्च करने वाले डॉ. संजय बैंकाक और वर्सोवा मुंबई में भी ट्रेनिंग प्रोग्राम चला चुके हैं। वर्ष 2015 में इन्हें लखनऊ में बेस्ट फिश फार्मर अवार्ड भी मिल चुका है।

 

रामनयन,मुखलिसपुर, संतकबीरनगर

लुधियाना में होजरी उद्योग का काम सीखने के बाद रामनयन अपने घर संतकबीर नगर जिले के मुखलिसपुर आ गए। रामनयन ने यहां कस्बे में ही मशीन लगा ली। यहां इन्होंने कच्चा माल मंगवाकर होजरी का काम शुरू कर दिया। तकरीबन 20 साल में यहां आसपास के 200 से ज्यादा परिवारों में यह काम होने लगा है। इस कस्बे में मिनी लुधियाना जैसा माहौल दिखता है। कस्बे में रामनयन की खूब ख्याति है।

महेश शुक्ल स्वच्छता अग्रदूत, गोरखपुर

कम्प्यूटर व्यवसायी महेश शुक्ल ने अपने काम और स्वभाव से लोगों के बीच ख्याति अर्जित की है। इनकी पहचान अब स्वच्छता अग्रदूत के रूप में होती है। विगत 11 साल से महेश शुक्ल अपने मोहल्ले के साथ ही रामगढ़ झील क्षेत्र के नौकाविहार पर स्वच्छता अभियान चलाते हैं। रोज सुबह चार बजे से यह गाड़ी से झाड़ू लेकर निकल जाते हैं। वह इधर-उधर बिखरे कूड़ा-कचरा को उठाते हैं और झाड़ू भी लगाते हैं। इस अभियान से अब लोग भी जुड़ने लगे हैं।

 

प्रियंका कुमारी रामनाथ देवरिया, देवरिया

अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी प्रियंका ने अपनी प्रतिभा से न केवल देवरिया जिले का बल्कि प्रदेश व देश का नाम रोशन किया है। वर्ष 2018 में बैंकाक में हुई अंतराष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में प्रियंका ने 69 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर सनसनी फैला दी। इसके बाद मार्च 2020 में इस खिलाड़ी ने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स पटियाला में प्रतिभाग किया। प्रियंका इन दिनों खुद प्रैक्टिस करने के साथ ही लड़कियों को नि:शुल्क आत्मरक्षा के गुर सिखा रही हैं।

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