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Hindsutan Special: आगरा के अब्दुल की दीवानी थीं ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया, नजदिकियां इतनी कि नाइटहुड देने को तैयार थीं

ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया आगरा के अब्दुल करीम की दीवानी थीं। कहने को तो वह उनके यहां नौकरी पर भेजे गए थे। लेकिन वह उन्हें हिन्दुस्तानी भाषा सिखाते थे। यहां तक कि महारानी को खाना बनाकर भी खिलाया।

Hindsutan Special: आगरा के अब्दुल की दीवानी थीं ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया, नजदिकियां इतनी कि नाइटहुड देने को तैयार थीं
Pawan Kumar Sharmaमनोज मिश्र,आगराWed, 12 Jul 2023 09:24 PM
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ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया आगरा के करीम की दीवानी थीं। कहने को तो वह उनके यहां नौकरी पर भेजे गए थे। लेकिन वह उन्हें हिन्दुस्तानी भाषा सिखाते थे। यहां तक कि महारानी को खाना बनाकर भी खिलाया। महारानी की उनसे इतनी नजदीकी हो गई कि वह उनकी दीवानी हो गईं। उन्होंने मरते दम तक करीम का साथ निभाया। मरने से पहले उन्होंने करीम को आगरा भेज दिया। इन दोनों की करीबी पर हॉलीवुड की फिल्म विक्टोरिया एंड अब्दुल भी बनी। करीम की मौत के बाद उसे आगरा के पचकुइयां कब्रिस्तान में दफना दिया गया।‌ हर साल एक खास तारीख को यहां उर्स लगता है। 

दुनिया के सबसे शक्तिशाली साम्राज्य की रानी और एक गुलाम नस्ल के बंदे से रिश्ता। कोई राजा-महाराजा होता तो तभी देख लेते, लेकिन अब्दुल न राजा था न राजकुमार। वह एक खिदमतगार था। महारानी के खाने के वक़्त टेबल के आसपास जो लोग खड़े रहते। उनमें से करीम भी शामिल रहता था। उन दोनों की नजदीकियां इतनी बढ़ गई थीं कि एक बार तो रानी अब्दुल को नाइटहुड देने के लिए तैयार हो गयी थी। राजपरिवार के लोगों ने उन्हें समझाया था। 

इस रह से खुली अब्दुल की कहानी 

1990 के दौर में श्रावणी बसु भारतीय खान-पान पर रिसर्च कर रही थीं। इसी दौरान उन्होंने ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के एक निजी महल का दौरा किया। आइल ऑफ वाइट में बने ऑस्बोर्न होम में श्रावणी को एक तस्वीर दिखाई दी। ब्रिटेन की राजशाही में ऐसी तस्वीरों को बनाने का रिवाज था। इसलिए श्रावणी को लगा ज़रूर किसी राजा-महाराजा की तस्वीर होगी। लाल और सुनहरे रंग की पेंटिंग में रंगा ये शख्स चेहरे से भारतीय लगता था। थोड़ा और रिसर्च करने पर श्रावणी को पता चला कि पेंटिंग अब्दुल करीम की थी। जिसे 1887 में विक्टोरिया की खिदमत करने के लिए भारत से ब्रिटेन ले जाया गया था, लेकिन एक नौकर की पेंटिंग वो भी महारानी की तस्वीर के बगल में होना अचरज की बात थी। आगरा से आया एक मुसलमान लड़का सर्वशक्तिमान ब्रिटिश राज्य की महारानी तक कैसे पहुंचा? अब्दुल पर महारानी की ऐसी अनुकम्पा कैसे हुई? और सबसे बड़ा सवाल ये कि ये बात इतने सालों तक छुपी कैसे रही? 

समारोह के बाद अब्दुल को साथ ले गईं महारानी 

गोल्डन जुबली समारोह के तुरंत बाद विक्टोरिया अपने आइल ऑफ वाइट वाले घर में गईं। साथ में अब्दुल को भी ले गईं। यहां अब्दुल ने पहली बार उन्हें चिकन करी बनाकर खिलाई। विक्टोरिया के बायोग्राफर एएन विल्सन के अनुसार विक्टोरिया को ये डिश इतनी पसंद आई कि उन्होंने उसे अपने रोजमर्रा के खाने का हिस्सा बना लिया था। विक्टोरिया भारतीय रहन-सहन में दिलचस्पी लेने लगी थीं। इसलिए उन्होंने अब्दुल से बात करने के लिए हिंदुस्तानी (हिंदी और उर्दू का मिलाजुला स्वरूप) सीखनी शुरू कर दी। साथ ही उन्होंने अब्दुल को इंग्लिश के ट्यूशन भी दिलवाने शुरू कर दिए, ताकि दोनों को बात करने में आसानी हो। हालांकि अब्दुल को ख़िदमतगार के रूप में रखा गया था। लेकिन जल्द ही रानी ने उसे मुंशी बना दिया। साथ में इंडियन क्लर्क टू द क्वीन एम्प्रेस का पद भी दे दिया। तनख़्वाह भी बढ़ा कर 12 पाउंड महीना कर दी गई। इतना ही नहीं महारानी जहां भी जातीं। अब्दुल को अपने साथ ले जातीं। देश विदेश के दौरों पर भी। अब्दुल का क़द इतना बड़ा हो गया था कि महल के बाकी नौकर उससे चिढ़ने लगे। राज परिवार के लोगों ने विरोध जताया तो विक्टोरिया ने अब्दुल का समर्थन किया। उन्होंने ये तक कह दिया कि बाकी लोग नस्लभेद के कारण अब्दुल की शिकायत करते हैं। 

अब्दुल की महारानी से नज़दीकी 

अब्दुल को भी महारानी से नज़दीकी का बहुत फ़ायदा मिला। वो रानी के सेक्रेटरी के पद तक पहुंच गया था। यानी वह अपने साथ एक तलवार लेकर चल सकता था। उसे अपने परिवार को भारत से ब्रिटेन लाने की इजाज़त थी। यहां तक कि एक बार अब्दुल के पिता ने विंडसर के क़िले में हुक्का भी पिया था। जबकि महारानी ने कभी किसी को विंडसर किले में हुक्का या सिगरेट पीने की इजाज़त नहीं दी थी। 

विक्टोरिया को अब्दुल में ऐसा क्या दिखा? 

किताब विक्टोरिया एंड अब्दुल की लेखक श्रावणी बसु ने एक साक्षात्कार में बताया था कि अब्दुल विक्टोरिया से ऐसे बात करता था जैसे एक इंसान दूसरे इंसान से करता है, जबकि बाकी सब लोग विक्टोरिया के अपने बच्चे भी उनसे रानी की तरह पेश आते थे। अब्दुल उन्हें भारत और भारतीयों के बारे में बताता था। साथ ही विक्टोरिया भी अब्दुल से अपने दिल की बातें शेयर करती थीं। 

महारानी की मौत के बाद अब्दुल आगरा भेजा गया 

महारानी जानती थीं कि राजपरिवार उनके जाने के बाद उसे तंग करेगा। इसलिए उन्होंने भारत के वायसरॉय से कहकर आगरा में ज़मीन दिलवाई। अब्दुल ने आगे की ज़िंदगी यहीं पर गुज़ारी। 20 अप्रैल 1909 को अब्दुल भी इस दुनिया से चल बसे। तब उनकी उम्र सिर्फ़ 46 बरस थी। पचकुइयां कब्रिस्तान में उनको दफन कर दिया गया। 

प्रेम कहानी पर बन चुकी है फिल्म 

महारानी विक्टोरिया और अब्दुल करीम के रिश्ते पर भारतीय लेखिका श्रावणी बसु की किताब पर 2017 में हालीवुड की फिल्म विक्टोरिया एंड अब्दुल भी बनी है। इस फिल्म की कुछ शूटिंग आगरा में भी हुई थी। फिल्म में हालीवुड अदाकारा जूडी बेंच ने महारानी विक्टोरिया की भूमिका निभाई थी और करीम का किरदार भारतीय अभिनेता अली फजल ने निभाया था। 

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