ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News उत्तर प्रदेशतलाकशुदा बीवी को 21 साल तक गुजारा भत्ता न दिला पाना मानवाधिकार का हनन : हाईकोर्ट

तलाकशुदा बीवी को 21 साल तक गुजारा भत्ता न दिला पाना मानवाधिकार का हनन : हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता दिलाने में देरी मानवाधिकार का हनन है। शौहर अपनी तलाकशुदा बीवी को गरिमामय जीवन जीने से वंचित नहीं कर सकता।

तलाकशुदा बीवी को 21 साल तक गुजारा भत्ता न दिला पाना मानवाधिकार का हनन : हाईकोर्ट
Dinesh Rathourविधि संवाददाता,प्रयागराज।Mon, 11 Dec 2023 10:13 PM
ऐप पर पढ़ें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता दिलाने में देरी मानवाधिकार का हनन है। शौहर अपनी तलाकशुदा बीवी को गरिमामय जीवन जीने से वंचित नहीं कर सकता। न्यायिक प्रक्रिया के बहाने पति को पत्नी का शोषण करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया न्याय देने में बाधक नहीं बन सकती। प्रक्रियात्मक उलझाव के कारण न्याय रथ का पहिया रुक नहीं सकता। इसी के साथ कोर्ट ने कहा कि पिछले 21 साल से गुजारा भत्ते का एक पैसा भी भुगतान न हो पाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। परिवार न्यायालय बलिया ने चार बार अंतरिम गुजारा भत्ता देने का एकपक्षीय आदेश दिया, जिसे शौहर ने अर्जी देकर चार बार वापस कराया। शौहर ने आदेश का पालन न कर न्याय प्रशासन में न केवल अवरोध उत्पन्न किया बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया है, जिससे कड़ाई से निपटना चाहिए।

यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने सहाबी खातून की याचिका को मंजूर करते हुए दिया है। कोर्ट ने प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया और पूर्व के आदेश को बहाल करते हुए शौहर को एक माह में पूरी बकाया राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि याची को पांच हजार रुपये प्रतिमाह के हिसाब से 20 दिसंबर 2002 अर्जी दाखिल करने की तिथि से भुगतान करने का आदेश दिया है। साथ ही आगे भी लगातार पांच हजार रुपये प्रत्येक माह की 10 तारीख को जमा करते रहने का निर्देश दिया है। साथ ही आदेश का पालन न करने पर परिवार न्यायालय को वसूली कार्रवाई करने की छूट दी है। परिवार न्यायालय को पूरे बकाये का भुगतान सुनिश्चित कराने का आदेश भी दिया है।

याची और जमाल ख़ान की 12 जून 1986 को शादी हुई। उनके तीन बच्चे हुए। शादी के 13 साल बाद उनमें मनमुटाव हो गया और शौहर ने तलाक देकर याची को घर से बाहर कर दिया। वह अपने पिता के घर रहने लगी। शौहर ने बच्चों को अपने पास ही रखा। याची ने दो हजार रुपये गुजारे भत्ते के लिए अर्जी दी। चार बार एकपक्षीय अंतरिम आदेश हुआ, जिसे शौहर की अर्जी पर चार बार आदेश वापस ले लिया गया। याची को कोई भुगतान नहीं किया गया। शौहर कोल फील्ड कंपनी वर्धमान में सर्वेयर है और 96,616 रुपये उसका वेतन है।

परिवार न्यायालय ने पांच हजार रुपये प्रतिमाह की दर से 18 दिसंबर 2021 को 12 लाख रुपये बकाया के भुगतान का आदेश दिया, जिसका पालन नहीं किया गया तो वसूली वारंट जारी हुआ। परिवार न्यायालय ने पांच जून 2023 को बतौर हर्जाना 80 हजार रुपये देने का आदेश दिया। शौहर ने हीलाहवाली के बाद जमा किया। याची को एक पैसा नहीं मिला। कोर्ट ने कहा कि 21 साल से बीवी को शौहर ने एक पैसे गुजारा भत्ता न देकर न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है।

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें