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हिंदी न्यूज़ उत्तर प्रदेशइस वजह से एक झटके में अवैध हो गईं ज्‍वेलरी की सैकड़ों दुकानें, जानें सराफा कारोबारियों को सता रहा कौन सा डर 

इस वजह से एक झटके में अवैध हो गईं ज्‍वेलरी की सैकड़ों दुकानें, जानें सराफा कारोबारियों को सता रहा कौन सा डर 

वरिष्‍ठ संवाददाता ,गोरखपुरAjay Singh
Thu, 02 Dec 2021 01:26 PM
इस वजह से एक झटके में अवैध हो गईं ज्‍वेलरी की सैकड़ों दुकानें, जानें सराफा कारोबारियों को सता रहा कौन सा डर 

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पहली दिसम्बर से सिर्फ हॉलमार्किंग वाले आभूषणों की बिक्री की अनिवार्यता से एक झटके में 4700 से अधिक आभूषणों की दुकानें अवैध हो गई हैं। जीएसटी में रजिस्टर्ड 5000 से अधिक सराफा कारोबारियों में से बमुश्किल 300 ने ही हॉलमार्किंग में रजिस्ट्रेशन कराया है। अनिवार्यता के बाद सराफा कारोबारियों में कार्रवाई का खौफ तो है लेकिन वह रजिस्ट्रेशन को लेकर वह सक्रिय नहीं दिख रहे हैं।

केंद्र सरकार ने जुलाई महीने से ही हॉलमार्किंग वाले आभूषणों की बिक्री को अनिवार्य कर दिया था लेकिन कारोबारियों को हॉलमार्किंग में रजिस्ट्रेशन के लिए 30 नवंबर तक की छूट दे दी थी। छूट के बाद भी अधिसंख्य कारोबारियों ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। अब भारतीय मानक ब्यूरो के अधिकारी दुकानों पर पहुंच कर सर्वे करने की तैयारी में है। बिना हॉलमार्किंग के आभूषण बिक्री पर लाइसेंस रद्द होगा और जुर्माना भी भरना होगा। नए नियम के लागू होने के बाद घंटाघर, अलीनगर, असुरन आदि बाजारों में बिना रजिस्ट्रेशन के कारोबार करने वाले खौफ में दिखे। हालांकि ग्राहकों में इस बावत जानकारी का अभाव होने से बाजार में सामान्य दिनों की तरह ही खरीदारी हुई। विवाह को लेकर खरीदारी होने से बाजार में काफी भीड़ भी दिखी।

मानकविहीन आभूषणों की बिक्री संभव नहीं: हॉलमार्किंग सेन्टर चलाने वाले महेश वर्मा का कहना है कि पहली दिसंबर से आने वाली दिक्कत को लेकर सभी को जागरूक किया जा रहा था। लेकिन कारोबारी उदासीन दिखे। अब जब कार्रवाई का अंदेशा हो रहा है तो पूछताछ बढ़ी है। ऑनलाइन आवेदन काफी आसान है। अब सभी को समझना होगा कि बिना हॉलमार्किंग के रजिस्ट्रेशन के कारोबार करना मुश्किल है। सराफा कारोबारी अतुल सराफ का कहना है कि हॉलमार्किंग सराफा कारोबारियों के साथ ग्राहकों के लिए भी अच्छा है। अब मानकविहीन आभूषणों की बिक्री संभव नहीं है। हॉलमार्किंग वाले आभूषण निवेश के लिहाज से अच्छे हैं। दुबारा बिक्री पर ग्राहकों को अच्छा रिटर्न भी मिल रहा है।

हॉलमार्किंग की अनिवार्यता के बाद भी पुराने आभूषण को बेचने में दिक्कत नहीं होगी। लेकिन सराफा कारोबारी को खरीद बिक्री की रसीद देनी होगी। हॉलमार्किंग सेंटर चलाने वाले महेश वर्मा का कहना है कि घरों में रखे पुराने आभूषण बेचने में कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन बिना कागज के बिक्री आसान नहीं होगी। सराफा मंडल के अध्यक्ष पंकज गोयल ने बताया कि बिना हॉलमार्क के नए आभूषणों को बेचना अपराध की श्रेणी में आ गया है। ग्राहकों को खरीदारी के पहले हॉलमार्क का निशान जरूर देखना चाहिए। इससे उन्हें आभूषण की विश्वसनीयता का पता चलेगा।

क्यों जरूरी है हॉलमार्किंग

हॉलमार्किंग सोने की शुद्धता का प्रमाण है। भारत में सोने के आभूषणों में हॉलमार्क की शुरुआत वर्ष 2000 से हुई। हॉलमार्क का निशान बताता है कि सोना अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड का है। इसे भारत सरकार की संस्था ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड यानी बीआईएस जारी करता है।

आभूषण निवेश के लिहाज से भी ठीक

निदेशक पीसी ज्वेलर्स संजय अग्रवाल ने बताया कि बिना हॉलमार्क के आभूषण लेना सही नहीं है। सरकार ने कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए इस नियम को लागू किया है। अब शादियों के लिए आभूषण खरीदने से पहले लोग हॉलमार्किंग की जानकारी ले रहे हैं। ये आभूषण निवेश के लिहाज से भी ठीक हैं।
 

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