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ज्ञानवापी की परिक्रमा का ऐलान, पुलिस की सख्ती से मठ से निकल भी नहीं सके शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

ज्ञानवापी की परिक्रमा का ऐलान करने वाले त्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने मठ से बाहर भी नहीं निकल सके। पुलिस ने सुबह से ही उनके मठ को घेर लिया और उन्हें बाहर नहीं आने दिया।

ज्ञानवापी की परिक्रमा का ऐलान, पुलिस की सख्ती से मठ से निकल भी नहीं सके शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
Yogesh Yadavहिन्दुस्तान,वाराणसीMon, 29 Jan 2024 11:12 PM
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ज्ञानवापी में मूल विश्वनाथ मंदिर की परिक्रमा का ऐलान करने वाले ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को पुलिस ने उनके मठ से भी नहीं निकलने दिया। सोमवार की सुबह से मठ के बाहर गली और घाट की तरफ पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। पूर्व निर्धारित समय पर जब शंकराचार्य कूच करने के लिए मठ से निकले तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। स्वामीजी ने अधिकारियों से जानना चाहा कि उन्हें क्यों रोका जा रहा है तो मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने कहा कि ऐसा आदेश है।

शंकराचार्य ने कहा कि सनातनधर्मियों के सर्वोच्च प्रतिनिधि होने के नाते मूल विश्वनाथ की परिक्रमा कर उन्हें प्रणाम करना चाहते हैं। अगर प्रशासन कह रहा है कि धारा 144 लागू है तो हम केवल दो लोगों के साथ जाकर परिक्रमा कर लेंगे। इससे न्यायालय के आदेश एवं कानून व्यवस्था का उल्लंघन भी नहीं होगा। इसके बावजूद यदि हमें रोका जाएगा तो यह मूल अधिकारों का हनन होगा। इस बारे में एसीपी दशाश्वमेध अवधेश कुमार पांडेय ने बताया कि न्यायालय से अनुमति नहीं होने पर शंकराचार्य को रोका गया था। शंकाराचार्य के वकील ने मौके पर अनुमति के लिए आवेदन दिया था। जिसे पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय में देने के लिए कहा गया। इसके अलाव ज्ञानवापी परिक्षेत्र में धारा 144 भी लागू थी।

शंकराचार्य: मैं नई परंपरा नहीं शुरू कर रहा: अविमुक्तेश्वरानंद

ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा है कि ज्ञानवापी की परिक्रमा करके मैं कोई नई शुरुआत नहीं कर रहा हूं। न ही ज्ञानवापी की परिक्रमा मेरे द्वारा पहली बार की जा रही है। पूर्व में भी मैं ज्ञानवापी जाता रहा हूं। यही नहीं हमारे पूर्व आचार्य भी समय-समय पर ज्ञानवापी की परिक्रमा करते रहे हैं।

इसके कई प्रमाण भी हमारे पास हैं। शंकराचार्य ने पुलिस अधिकारियों से कहा कि यदि आप धारा 144 के कारण मुझे वहां जाने से रोक रहे हैं तो मैं आप को विश्वास दिलाता हूं कि हम सिर्फ दो लोग ही ज्ञानवापी जाएंगे। ऐसा करने पर न तो कानून का उल्लंघन होगा और न ही कानून व्यवस्था को खतरा होगा। मैं स्वयं पुलिस और प्रशासन का सहयोग करना चाहता हूं। शंकराचार्य की ओर से ज्ञानवापी की परिक्रमा की अनुमति के लिए तत्काल एक पत्र अधिकारियों को दिया गया। अधिकारियों ने पत्र तो ले लिया लेकिन अनुमति नहीं दी। 

प्रतिबंधित क्षेत्र से बाहर करनी है परिक्रमा
शंकराचार्य ने कहा कि हम सनातनधर्मियों के सर्वोच्च प्रतिनिधि होने के नाते और स्वयं सनातनधर्मी होने के नाते मूल विश्वनाथ मंदिर की परिक्रमा कर उन्हें प्रणाम करना चाहते हैं। हम यह परिक्रमा प्रतिबंधित क्षेत्र के बाहर से करना चाहते हैं। जहां से आमजन का आवागमन हो रहा है। प्रशासन सनातनधर्मियों के धार्मिक एवं मौलिक अधिकारों का हनन करते हुए हमें रोक रहा है जबकि मुस्लिम पक्ष के सैकड़ों लोग प्रतिदिन वहां नमाज पढ़ रहे हैं। मुझे परिक्रमा से रोकना सौ करोड़ सनातनधर्मियों का अपमान है। 

पूजा और राग-भोग से वंचित हैं देवता
उन्होंने कहा कि विगत डेढ़ वर्ष से मुकदमा चल रहा है और मूल विश्वनाथ को पूजा, राग-भोग से वंचित कर दिया गया है। जबकि यही स्थिति अयोध्या में थी। वहां भी मुकदमा चल रहा था लेकिन रामलला की पूजा और राग-भोग सुनिश्चित किया गया था। हाईकोर्ट के आदेश में कहा गया है कि उक्त स्थल मंदिर है अथवा मस्जिद इसका निर्णय न्यायालय करेगा लेकिन जब तक निर्णय नहीं हो जाता तब तक देवता की पूजा और राग भोग की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

एक दिन पहले भी हुई थी वार्ता
शंकराचार्य कार्यालय की ओर से पुलिस-प्रशासन को पत्र भेज कर अवगत कराया गया था कि 29 जनवरी को दिन में 3:30 बजे वह ज्ञानवापी स्थित मूल विश्वनाथ मंदिर की परिक्रमा करने जाएंगे। पत्र मिलने के बाद 28 जनवरी को पुलिस के कुछ वरिष्ठ अधिकारी श्रीविद्या मठ पहुंचे थे। शंकराचार्य महाराज से बातचीत में उन्होंने वहां धारा 144 लागू होने की बात कही थी। तब भी शंकराचार्य ने यह प्रस्ताव दिया था कि यदि ऐसी बात है तो मैं अपने एक शिष्य के साथ ही परिक्रमा कर लूंगा। तब भी अधिकारी कुछ भी स्पष्ट किए बिना लौट गए थे।

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