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ज्ञानवापी के दक्षिणी तहखाने का खुला ताला, वाराणसी डीएम ने अपनी सुपुर्दगी में लिया

ज्ञानवापी के नीचे बना दक्षिणी तहखाना का ताला बुधवार को खोला गया। डीएम ने जिला जज के आदेश पर बतौर रिसीवर इसे अपनी निगरानी में ले लिया। बतौर नोडल अफसर एडीएम प्रोटोकॉल ज्ञानवापी पहुंचे थे।

ज्ञानवापी के दक्षिणी तहखाने का खुला ताला, वाराणसी डीएम ने अपनी सुपुर्दगी में लिया
Yogesh Yadavहिन्दुस्तान,वाराणसीWed, 24 Jan 2024 11:25 PM
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वाराणसी जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश के आदेश के क्रम में ज्ञानवापी परिसर स्थित दक्षिणी तहखाना (वादग्रस्त संपत्ति) डीएम की सुपुर्दगी में ले लिया गया है। बतौर नोडल अफसर पहुंचे एडीएम प्रोटोकॉल प्रकाशचंद ने तहखाने का ताला खुलवाया और सुपुर्दगी में लिया। जिला जज की अदालत ने इस मुकदमे की अगली सुनवाई के लिए 25 जनवरी की तारीख तय की थी। इससे एक दिन पहले सुपुर्दगी ले ली गई।

बता दें यह तहखाना मस्जिद के दक्षिणी भाग और विश्वनाथ मंदिर में बने नंदी के ठीक सामने स्थित है।परिसर में स्थित व्यास पीठ के सोमनाथ व्यास के नाती शैलेन्द्र व्यास पाठक की ओर से जिला जज की अदालत में याचिका दाखिल की गई थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने 17 जनवरी को डीएम को दक्षिणी तहखाने (वादग्रस्त संपत्ति) का रिसीवर नियुक्त किया था। ‘वादग्रस्त सम्पत्ति’ को अपनी अभिरक्षा में सुरक्षित रखने का आदेश दिया था।

यह भी आदेश दिया था कि उसकी स्थिति में कोई परिवर्तन न होने दें। आदेश के अनुपालन में बुधवार को डीएम के प्रतिनिधि के तौर पर एडीएम प्रोटोकाल ने तहखाने पर प्रशासन की अभिरक्षा का नोटिस भी चस्पा कर दिया। तहखाना सुपुर्दगी में लिये जाने के दौरान विश्वनाथ धाम के मुख्य कार्यपालक अधिकारी व अन्य अधिवक्ता मौजूद थे। 

तहखाने को लेकर क्या है मामला
स्व. पं. सोमनाथ व्यास के नाती शैलेंद्र कुमार पाठक व्यास ने जिला जज की अदालत में अर्जी देकर तहखाने को डीएम के संरक्षण में देने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि उनके पूर्वज ज्ञानवापी परिसर के तहखाने में पूजा-पाठ करते थे। 1993 में सरकार के आदेश पर पूरे क्षेत्र की लोहे की बैरेकेडिंग कर दी गई। इससे पूजा-पाठ बाधित हो गया। चूंकि उसी परिसर में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के लोगों का आवागमन है, इसलिए वे इस पर कब्जा करने पर आमादा हैं। इसलिए दक्षिणी तहखाने को डीएम की निगरानी में सौंपने और फिर से पूजा-पाठ करने का अधिकार दिया जाए। 

वाद मित्र ने भी की थी पक्षकार बनने की अर्जी
शैलेन्द्र पाठक की ओर से वाद दाखिल होने के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता विजयशंकर रस्तोगी ने पक्षकार बनने के लिए जिला जज कोर्ट में आवेदन किया था। इस पर शैलेंद्र कुमार पाठक की ओर से लिखित आपत्ति दाखिल कर विरोध जताया गया था। आरोप लगाया था कि विजयशंकर रस्तोगी व्यक्तिगत लाभ के लिए पक्षकार बनना चाह रहे हैं। यह भी कहा गया कि उन्होंने पूर्व के मुकदमे में सम्बंधित वादी के साथ धोखाधड़ी की है। लिहाजा पक्षकार बनने वाली अर्जी खारिज की जाए।

विजयशंकर रस्तोगी ने जिला जज के समक्ष प्रति आपत्ति दाखिल कर वाद पर सवाल उठाए थे। उन्होंने दलील दी थी कि जिस सम्पत्ति पर अधिकार की मांग की जा रही है, वह देवता की है। वाद में देवता को पक्षकार नहीं बनाया गया है। इसलिए पूर्व से देवता के रूप में वादमित्र के तौर पर उन्हें पक्षकार बनाया जाना चाहिए। रस्तोगी ने अपनी आपत्ति में यह भी कहा था कि पहले के मुकदमे में ज्ञानवापी के संपूर्ण परिसर पर हिंदू पक्ष की ओर से दावा किया गया था। अब पुजारी सोमनाथ व्यास के नाती की ओर से केवल तहखाने की मांग करना परिसर का एक हिस्सा पाने का प्रयास है। यह हिंदुओं के साथ छल है। कोर्ट ने पक्षों के सुनने व पत्रावली के अवलोकन के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था।

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