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जुमे की नमाज से पहले छावनी बना ज्ञानवापी-काशी विश्वनाथ इलाका, तीन जिलों से मंगाई फोर्स, गलियों में भी फ्लैग मार्च

ज्ञानवापी के दक्षिण में स्थित व्यासजी के तहखाने में कोर्ट के आदेश पर पूजा शुरू होने और मुस्लिम इलाकों में बंदी के बाद वाराणसी में हाईअलर्ट घोषित कर दिया गया है। पड़ोसी जिलों से भी फोर्स मंगाई गई है।

जुमे की नमाज से पहले छावनी बना ज्ञानवापी-काशी विश्वनाथ इलाका, तीन जिलों से मंगाई फोर्स, गलियों में भी फ्लैग मार्च
Yogesh Yadavहिन्दुस्तान,वाराणसीThu, 01 Feb 2024 11:45 PM
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ज्ञानवापी के दक्षिणी हिस्से में स्थित व्यासजी के तहखाने में कोर्ट के आदेश पर पूजा-पाठ शुरू हो गया है।मुस्लिम समाज के विरोध और जुमे की नमाज से पहले पूरे ज्ञानवापी इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। वाराणसी में हाईअलर्ट घोषित कर तीन जिलों से पुलिस फोर्स मंगाई गई है। गलियों में भी पुलिस के दस्तों ने अधिकारियों के साथ गश्त और फ्लैग मार्च किया। मुस्लिम पक्ष की ओर से पूजा को लेकर नाराजगी जताने और शुक्रवार को विरोध स्वरूप बनारस में बंद का ऐलान करने से सतर्कता और ज्यादा बढ़ा दी गई है। जिले में शांति व्यवस्था कायम रखने और सौहार्द बनाये रखने के लिए कमिश्नरेट पुलिस के अलावा तीन कंपनी पीएसी, एक कंपनी आरएएफ के साथ जौनपुर, गाजीपुर और चंदौली की फोर्स सड़कों पर उतर गई हैं।

मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में छह दिसंबर जैसी बंदी, जगह-जगह पुलिस फोर्स तैनात

बाहर से आई फोर्स और पीएसी को संवेदनशील इलाकों में गश्त के लिए लगाया गया है। अति संवेदनशील इलाकों में आरएएफ तैनात रहेगी। जुमे के दिन छोटी-बड़ी मस्जिदों के साथ ही सभी धार्मिक स्थलों के बाहर पुलिस की तैनाती कर दी गई है। पुलिसकर्मियों को अफसरों ने निर्देशित किया है कि जुमे की नमाज के बाद या फिर किसी भी पूजा स्थल पर किसी तरह की जुटान न हो। 

छावनी बना ज्ञानवापी काशी विश्वनाथ इलाका
कोर्ट का फैसला आने के बाद बुधवार रात से ही ज्ञानवापी परिक्षेत्र को छावनी में बदल दिया गया है। विश्वनाथ धाम के सामने से लेकर मुख्य सड़कों, गलियों में पुलिस की कड़ी चौकसी है। खासतौर से मिश्रित आबादी वाले इलाकों, संवेदनशील व अति संवेदनशील इलाकों में निगरानी रखी जा रही है। प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए विश्वनाथ धाम के गेट नंबर चार के सामने कमांडो की तैनाती की गई है। आरएएफ और सीआरपीएफ के जवानों की संख्या बढ़ा दी गई है। 

ज्ञानवापी में पूजा से मुसलमान नाराज, वाराणसी में कल कारोबार बंद रखने का ऐलान

बुधवार रात से ही एक प्लाटून पीएसी ज्ञानवापी परिक्षेत्र में तैनात कर दी गई। गुरुवार को नमाज तथा सुरक्षा के दृष्टिगत दोपहर 12 से 3 बजे के बीच धाम के सामने से वाहनों का आवागमन भी बंद कर दिया गया था। लोगों को गलियों के रास्ते से जाने के लिए कहा गया। मंदिर के बाहर पुलिस आयुक्त मुथा अशोक जैन, अपर पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था एस. चन्नप्पा, डीसीपी काशी जोन आरएस गौतम, एसीपी दशाश्वमेध प्रज्ञा पाठक ने फोर्स के साथ फुट पेट्रोलिंग भी की। 

‘गुप्त’ बैठकों पर खुफिया एजेंसियों की नजर
ज्ञानवापी के दक्षिणी तहखाने में पूजा-पाठ के आदेश के बाद खुफिया एजेंसियों ने शरारतीतत्वों पर निगरानी बढ़ा दी है। एलआईयू समेत अन्य एजेंसियां अराजकतत्वों की धरपकड़ के लिए सतर्क हैं। संवेदनशील व अति संवेदनशील इलाकों में जुमे की नमाज के पूर्व गोपनीय बैठकें करने की सूचना के बाद खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। गुरुवार को भी मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में दुकानें बंद रहीं।

लोग शांतिपूर्ण ढंग से विरोध जताएं: मुफ्ती-ए-बनारस
ज्ञानवापी के दक्षिणी तहखाने में पूजा की अनुमति से मुस्लिम समाज में रोष है। गुरुवार को अमानुल्लाहपुरा में हुई बैठक में शुक्रवार को ‘बनारस बंद’ का ऐलान किया गया। वहीं अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद के महासचिव एवं मुफ्ती-ए-बनारस मौ.अब्दुल बातिन नोमानी ने अफवाह पर ध्यान न देने और शांतिपूर्ण ढंग से विरोध जताने की लोगों से अपील की है। उन्होंने 1993 तक दक्षिणी तहखाने में पूजा होने के दावे का खंडन करते हुए कहा कि सिर्फ अफवाहें फैलाई जा रही है। वहां कभी पूजा नहीं हुई। करीब एक घंटे तक अंजुमन इंतेजामिया के सदस्यों व शहर के मुस्लिम समाज के लोगों ने ज्ञानवापी मामले पर चर्चा की। मौ.बातिन ने कहा कि जिला जज के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है। हम कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

क्या है पूरा मामला
काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे ज्ञानवापी के दक्षिणी हिस्से में स्थित व्यासजी के तहखाने में पूजा के लिए जिला जज की अदालत से इजाजत मांगी गई थी। व्यास जी के परिवार के ही शैलेंद्र पाठक ने याचिका दायर कर दावा किया कि 1993 से पहले उनके परिवार के लोग यहां पूजा करते थे। इस पर जिला जज ने पूजा की इजाजत देते हुए बुधवार को डीएम को आदेश दिया कि वह जरूरी इंतजाम कराएं। कोर्ट का आदेश मिलते ही डीएम बुधवार की रात ज्ञानवापी पहुंचे और तहखाने के सामने लगी लोहे की बैरिकेडिंग हटवाकर पूजा का इंतजाम करा दिया। इसके बाद भोर से पूजा भी शुरू हो गई। गुरुवा की शाम से आम लोगों को तहखाने में रखी मूर्तियों का दर्शन भी मिलने लगा। रात 10.30 बजे शयन आरती तक लोगों को दर्शन मिलता रहा। 

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