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वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद के ASI सर्वे की रिपोर्ट सार्वजनिक होगी, हिन्दू पक्ष की मांग पर वाराणसी कोर्ट का आदेश

ज्ञानवापी के एएसआई सर्वे की रिपोर्ट हिन्दू और मुस्लिम दोनों पक्षों को दी जाएगी। इस बारे में बुधवार को वाराणसी की जिला जज की अदालत ने आदेश कर दिया। हिन्दू पक्ष के वकील के अनुसार हार्ड कापी दी जाएगी।

वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद के ASI सर्वे की रिपोर्ट सार्वजनिक होगी, हिन्दू पक्ष की मांग पर वाराणसी कोर्ट का आदेश
Yogesh Yadavलाइव हिन्दुस्तान,वाराणसीWed, 24 Jan 2024 08:44 PM
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वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर से सटी ज्ञानवापी मस्जिद की तीन महीने तक चली एएसआई रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी। वाराणसी जिला जज की अदालत ने बुधवार को इस बारे में आदेश देते हुए कहा कि रिपोर्ट की कापी हिन्दू और मुस्लिम दोनों पक्षों को मिलेगी। एएसआई ने 18 दिसंबर को रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में कोर्ट में दाखिल की थी। हिन्दू पक्ष ने उसी समय रिपोर्ट देने की मांग की थी लेकिन मुस्लिम पक्ष की आपत्ति और एएसआई के चार हफ्ते तक रुकने के आग्रह पर रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हो सकी थी।

हिन्दू पक्ष के वकीलों का कहना है कि उनकी तरफ से रिपोर्ट की नकल के लिए प्रार्थना पत्र दिया जाएगा। कुछ वैधानिक प्रक्रिया और बीच में सार्वजनिक अवकाश के चलते पक्षकारों को अगले सोमवार तक ही सर्वे रिपोर्ट की प्रति मिल पाने की संभावना है। दोनों पक्षों में रिपोर्ट को लेकर सहमति बनने की बात भी कही जा रही है। हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु जैन के अनुसार दोनों पक्षों को हार्ड कापी सौंपी जाएगी। हिन्दू पक्ष ने ही रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की थी।

इससे पहले बुधवार को ही एएसआई ने सर्वे की रिपोर्ट यहां की फास्ट ट्रैक कोर्ट में भी दाखिल की थी। 1991 से ज्ञानवापी का मूल विवाद यहीं पर चल रहा है। 18 दिसंबर को जब एएसआई ने रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं करने का आग्रह करते हुए इसी कोर्ट का हवाला दिया था। एएसआई ने कहा था कि वहां भी रिपोर्ट दाखिल करनी है इसलिए सार्वजनिक अभी नहीं किया जाए। एएसआई के आग्रह पर ही अदालत ने रिपोर्ट के सार्वजनिक करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई 24 जनवरी तक के लिए टाल दी थी। बताया जाता है कि चार हिस्सों में एएसआई ने करीब दो हजार पन्नों की यह रिपोर्ट अदालत में सील बंद लिफाफे में दाखिल की है।

क्या है अदालत का आदेश

वाराणसी के जिला जज डॉ. अजयकृष्ण विश्वेश ने ज्ञानवापी परिसर की एएसआई सर्वे रिपोर्ट सभी पक्षकारों को उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश बुधवार को तीन अर्जियों पर सुनवाई के बाद दिया। उक्त अर्जियां एएसआई रिपोर्ट सार्वजनिक करने और न करने से संबंधित थीं।  

जिला जज कोर्ट ने आदेश में कहा है कि एएसआई की सर्वेक्षण रिपोर्ट मुकदमे के दोनों पक्षों को प्रदान की जानी चाहिए ताकि वे उस रिपोर्ट के खिलाफ आपत्तियां दाखिल कर सकें। सर्वे रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराए बिना आपत्ति दर्ज कराना संभव नहीं होगा। वहीं दूसरे लंबित आवेदनों के निस्तारण के लिए कोर्ट ने छह फरवरी की तारीख निर्धारित की। 

आपत्ति के बाद बदल गया मुस्लिम पक्ष
एएसआई ने बीते 18 दिसम्बर को जिला जज की अदालत में सर्वेक्षण रिपोर्ट दो बंद लिफाफों में सौंपी थी। उसी दिन हिन्दू पक्ष की चार महिलाओं ने प्रार्थनापत्र देकर बिना सील लिफाफे में सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में सौंपने और रिपोर्ट को वादी के अधिवक्ता अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के ई-मेल पर भेजने की मांग की थी। इस मांग पर अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने आपत्ति दाखिल की। उसकी दलील थी कि यह बहुत गंभीर व संवेदनशील मामला है।

संवेदनशीलता और भाईचारे को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट को वादी सहित किसी दूसरे से साझा नहीं किया जा सकता है। रिपोर्ट को सीलबंद कवर में दिया जाए। बाद में मुस्लिम पक्ष ने पक्षकारों को सर्वे की रिपोर्ट की प्रतियां सशर्त उपलब्ध कराने पर सहमति जताई थी। शर्त यह थी कि इसे सार्वजनिक न किया जाए। मुस्लिम पक्ष ने यह भी क कि यदि हिंदू पक्ष को रिपोर्ट की प्रतियां उपलब्ध कराई जाती हैं, तो उन्हें भी दी जाएं।

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