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सपा सरकार में ग्राम प्रधानों ने खूब सरकारी धन लूटा, वार्षिक रिपोर्ट में खुलासा 

सपा शासन में ग्राम प्रधानों ने सरकारी धन खूब लूटा। हजारों मामलों का खुलासा त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं की वर्ष 2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट में हुआ है।

सपा सरकार में ग्राम प्रधानों ने खूब सरकारी धन लूटा, वार्षिक रिपोर्ट में खुलासा 
Deep Pandeyसंतोष वाल्मीकि,लखनऊThu, 07 Dec 2023 11:25 AM
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सपा शासन में प्रधानों ने सरकारी धन खूब लूटा। देवरिया जिले के विकास खण्ड भटनी की ग्राम पंचायत अघैला में वित्तीय वर्ष 2016-17 में ग्राम पंचायत के बैंक खाते से एक लाख 40 हजार रुपये की निकासी की गई। इस निकासी को कैशबुक में पाण्डेय ब्रिक्स फील्ड से ईंट खरीद के मद में दिखाया गया जबकि बैंक खाते के अनुसार तत्कालीन ग्राम प्रधान शीला देवी द्वारा यह भुगतान प्राप्त किया गया।

नियमानुसार कोई भी सामग्री की खरीद जो 20 हजार रुपये से ज्यादा की है, का भुगतान नकद न कर संबंधित फर्म को चेक से किया जाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इससे साफ है कि राज्य वित्त और 15वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर बैंक खाते से नकद भुगतान स्वयं ग्राम प्रधान द्वारा प्राप्त कर अवास्तविक ईंट खरीद दिखाकर ग्राम पंचायत धन का गबन किया गया। जिसके लिए ग्राम पंचायत अधिकारी जय प्रकाश यादव और ग्राम प्रधान शीला देवी संयुक्त रूप से जिम्मेदार हैं। इन दोनों से ब्याज समेत वसूली की सिफारिश आडिट रिपोर्ट में की गई है।

यह तो एक बानगी है, ऐसे हजारों मामलों का खुलासा त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं की वर्ष 2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट में हुआ है। निदेशक सहकारी समितियां एवं पंचायत लेखा परीक्षा निदेशालय उत्तर प्रदेश की इस आडिट रिपोर्ट में प्रदेश की हजारों ग्राम पंचायतों में ऐसे गबन सामने आए हैं। केंद्र और राज्य सरकार से करोड़ों रुपये की धनराशि गांवों के विकास कार्यों के लिए विभिन्न मदों में ग्राम पंचायतों को मिलती है।

प्रधानों व वीडीओ ने ऑडिट टीम को दस्तावेज नहीं दिए
केंद्र और राज्य सरकारों से मिली धनराशि के खर्च का ब्यौरा आडिट टीम को मय बिल, बाउचर, फोटोग्राफ के आडिट टीम को उपलब्ध करवाना होता है। मगर ग्राम प्रधानों और ग्राम पंचायत सचिव तथा ग्राम विकास अधिकारी ने आडिट टीम को यह दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाए। आडिट टीम ने ऐसे सभी मामलों को गबन मान लिया। आडिट के दौरान ग्राम पंचायत सचिव से पूछताछ की गई तो मौखिक तौर पर ग्राम पंचायत सचिवों ने कहा कि ग्राम पंचायत के पास अभिलेख उपलब्ध ही नहीं हैं।

विधान सभा के अनुपूरक बजट सत्र में पेश की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्राम पंचायतों में लेखा परीक्षा प्रतिवेदनों की स्थिति संतोषजनक नहीं रही। संबंधित प्रशासनिक विभाग द्वारा भी इस मामले में कोई विशेष रुचि नहीं ली गई।