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7 सितम्बर, 2020|1:56|IST

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राममंदि‍र आंदोलन के अगुआ: गोरक्षपीठ ने ब्रिटिश काल में ही छेड़ा था जन्‍मभूमि मुक्ति संग्राम 

अयोध्‍या में पांच अगस्‍त को प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी राममंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन करेंगे और इसकी आधारशिला रखेंगे। इस समय अयोध्‍या में इसकी तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं लेकिन इसके साथ ही अयोध्‍या से 137 किलोमीटर दूर गोरखपुर और गोरखनाथ मंदिर में भी जश्‍न की तैयारी है। दरअसल,राममंदिर आंदोलन के लम्‍बे दौर में गोरखनाथ मंदिर इसके, अगुआ नेताओं का रणनीतिक केंद्र बना रहा। राममंदिर आंदोलन से गोरक्षपीठ का सम्‍बन्‍ध पीढि़यों का है। पीठ ने ब्रिटिश काल में ही मंदिर आंदोलन का शंखनाद कर दिया था।

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उत्‍तर प्रदेश हिन्‍दी संस्‍थान के अध्‍यक्ष प्रो.सदानंद गुप्‍त और महाराणा प्रताप पीजी कालेज के प्राचार्य डा.प्रदीप राव के सम्‍पादन में तीन खंडों में प्रकाशित 'राष्‍ट्रीयता के अनन्‍य साधक महंत अवेद्यनाथ' पुस्‍तक में ये जानकारियां हैं। डा.प्रदीप राव बताते हैं कि 1855 से 1885 तक महंत गोपालनाथ गोरक्षपीठाधीश्‍वर थे। 1857 में प्रथम स्‍वतंत्रता संग्राम के बाद अवध क्षेत्र (वर्तमान में उत्‍तर प्रदेश) ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया था। अंग्रेजी राज के खिलाफ हिन्‍दुओं-मुसलमानों ने मिल कर संघर्ष छेड़ा था जिसे अंग्रेजी हुकूमत ने बड़ी क्रूरता से दबा दिया। 

महंत गोपालनाथ, योगीराज बाबा गम्‍भीरनाथ और महंत ब्रह्मनाथ के समय में हिन्‍दू-मुस्लिम सामंजस्‍य से विवाद का हल निकालने की हुईं कोशिशें
1885 में एक बार सहमति भी बनी लेकिन हिन्‍दू-मुस्लिम एकता के बीच आ गए अंग्रेज
अमीर अली और बाबा रामचरणदास को बागी घोषित कर दे दी फांसी की सजा

संघर्ष असफल हो चुका था लेकिन अंग्रेजी राज के खिलाफ हिन्‍दू-मुसलमान तेजी से संगठित हो रहे थे। ऐसे समय में एक मुस्लिम क्रांतिकारी नेता अमीर अली ने अयोध्‍या-फैजाबाद के मुसलमानों को समझाया कि सम्राट बहादुरशाह जफर की राह पर चलते हुए उन्‍हें भी मिसाल पेश करनी चाहिए। अमीर अली ने एकता बनाने के लिए रामजन्‍मभूमि हिन्‍दुओं को सौंपने का प्रस्‍ताव रखा। जन्‍मभूमि हस्‍तांतरण की पृष्‍ठभूमि तैयार करने में बाबा रामचरणदास की भी महत्‍वपूर्ण भूमिका थी। कहा जाता है कि इन दोनों लोगों को तैयार करने के पीछे तत्‍कालीन गोरक्षपीठाधीश्‍वर महंत गोपालनाथ ने पहल की थी। बताते हैं कि मुसलमानों ने भी इसका समर्थन किया। लेकिन अंग्रेज आड़े आ गए। उन्‍होंने अमीर अली और बाबा रामचरणदास के खिलाफ साजिश रची। दोनों को बागी घोषित कर 18 मार्च 1885 को फांसी पर लटका दिया।

नाथ पंथ के जानकार और महाराणा प्रताप पीजी कालेज जंगल धूसड़ के प्राचार्य डा.प्रदीप राव बताते हैं, 'अमीर अली और बाबा रामचरण दास को फांसी दिए जाने की घटना ने आम लोगों को झकझोर कर रख दिया। रामजन्‍मभूमि विवाद का समाधान निकलते-निकलते रह गया। ऐसे में भावी गोरक्षपीठाधीश्‍वरों ने लोगों को एकजुट रखते हुए प्रयास जारी रखे। बात, ब्रिटिश महारानी विक्‍टोरिया तक पहुंची तो उन्‍होंने बाबरी मस्जिद का नक्‍शा मंगवाया। प्रांगण के बीच में दीवार बना दी गई। आदेश हुआ कि मुसलमान भीतर नमाज पढ़ें और हिन्‍दू बाहर के चबूतरे पर पूजा पाठ करें।' डा.राव ने बताया कि महंत गोपालनाथ के बाद उनके शिष्‍य योगीराज बाबा गम्‍भीरनाथ और गोरक्षपीठाधीश्‍वर महंत ब्रह्मनाथ ने भी रामजन्‍मभूमि मुक्ति के लिए प्रयास जारी रखा।

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  • Web Title:gorakhpeeth started ram temple movement before country independence