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छात्रों की पहल- इविवि में प्रवासी भारतीयों पर होगा शोध

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र प्रवासी भारतीयों पर शोध करेंगे। आजादी के पहले से अब तक अप्रवासी भारतीयों ने क्यों अन्य देशों को अपना ठौर बनाया। उन्होंने खुद को कैसे विदेशों में स्थापित किया। देश के प्रति उनका लगाव अब भी है। देश की संस्कृति एवं आस्था देखने विदेशों से आते हैं। यह सभी बातें छात्रों के शोध का हिस्सा बनेंगी।

प्रवासी भारतीयों के बारे में जानकारी देने को कुलपति प्रो. आरएल हांगलू की पहल पर इविवि में सेंटर ऑफ डायस्पोरा स्टडीज खोला गया है। इस शैक्षिक सत्र में पीएचडी की चार सीटों पर प्रवेश होगा। एकेडमिक काउंसिल की बैठक में शोध के लिए चार सीटों पर पीएचडी में प्रवेश की मंजूरी मिल गई है।

मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. योगेश्वर तिवारी को सेंटर का कोआर्डिनेटर बनाया गया है। प्रो. तिवारी ने बताया कि बड़ी संख्या में भारतीय अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, मलेशिया, मॉरिशस, सूरीनाम, तिब्बत आदि देशों में जाकर बस गए हैं। शोध छात्र जानकारी एकत्र करेंगे कि वह कब, कहां, क्यों गए। वहां जाने के बाद कैसे खुद को स्थापित किया और साथ ही भारतीय परंपराओं को आत्मसात किए रखा। कई प्रवासी भारतीय अब भी विदेशों में भी भारतीय संस्कृति को संरक्षित व संवर्धित कर रहे हैं। प्रो. तिवारी ने बताया कि कुलपति प्रो. आरएल हांगलू ने प्रवासी भारतीयों पर 'इंडियन डायस्पोरा इन द कैरेबियन' नाम से पुस्तक लिखी है। कई और विद्वानों की प्रवासी भारतीयों पर लिखी किताबों को भी छात्र अपने शोध का आधार बना सकेंगे। 

सेंटर में इस वर्ष से सिर्फ शोध 

प्रो. तिवारी ने बताया कि सेंटर ऑफ डायस्पोरा स्टडीज की मंजूरी 2016 में मिल गई थी। फैकल्टी न होने के कारण सेंटर में कोर्स का संचालन नहीं शुरू हो सका है। शैक्षिक सत्र 2019-20 में चार सीटों पर शोध कार्य शुरू किया जा रहा है। अगले सत्र से फैकल्टी की नियुक्ति होने पर परास्नातक की कक्षाएं शुरू की जाएगी।  

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  • Web Title:Good initiative research will be done on Indian diaspora in the University of Allahabad