ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News उत्तर प्रदेशस्कूल छोड़ तीन बहनों को संभाल रही मासूम, दो जून की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे मां-बाप

स्कूल छोड़ तीन बहनों को संभाल रही मासूम, दो जून की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे मां-बाप

प्रयागराज में कक्षा दो में पढ़ने वाली छात्रा नेहा यादव इसलिए स्कूल नहीं आ पाती कि उसे तीन छोटी-छोटी बहनों को संभालना होता है। उसके परिजन दो जून की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

स्कूल छोड़ तीन बहनों को संभाल रही मासूम, दो जून की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे मां-बाप
Pawan Kumar Sharmaहिन्दुस्तान,प्रयागराजWed, 06 Dec 2023 11:05 PM
ऐप पर पढ़ें

यूपी के प्रयागराज में तक शायद सरकारी योजनाएं कुछ परिवारों से कोसो दूर हैं। दरअसल निपुण भारत और मिशन कायाकल्प जैसी योजनाओं के माध्यम से केंद्र और प्रदेश की सरकारें वंचित तबके के अधिक से अधिक बच्चों को प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों तक लाने की कोशिशें कर रही हैं। जिसमें उन्हें कुछ सालों में काफी सफलता भी मिली है। लेकिन दो जून रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे कई परिवारों में इतनी विकट स्थिति है कि मासूम बच्चे स्कूल जाने की बजाय घर पर बड़ों की तरह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

कुछ ऐसा ही मामला जिले के सबसे पिछड़े कोरांव विकास खंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय (कम्पोजिट) बसहरा का है। जहां कक्षा दो में पढ़ने वाली छात्रा नेहा यादव दो-तीन सप्ताह तक सिर्फ इसलिए स्कूल नहीं आ पाती कि उसे घर पर अपने से भी कम उम्र की तीन छोटी-छोटी बहनों को संभालना होता है। नवंबर में जब दो सप्ताह तक बच्ची स्कूल नहीं आई तो स्कूल के शिक्षक करते-करते उसके घर नटवा का डेरा ग्रामसभा बसहरा पहुंच गए।

वहां का दृश्य देखकर हर कोई चकित रह गया। नेहा मिट्टी के चूल्हे पर तवा चढ़ाकर रोटी पका रही है। उसकी तीन छोटी बहनें आसपास खेल रही है। पूछने पर बताया कि पिता हनुमान मजदूरी करने के लिए गुजरात गए हैं और मां सरिता भी खेतों में काम करने चली जाती है। इसलिए मां-पिता की गैर मौजूदगी में उसे ही तीनों बहनों की देखभाल और खाने-पीने का इंतजाम देखना होता है।

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें