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उत्तर प्रदेशबाजार से गायब हुआ फंगल इंफेक्शन का इंजेक्‍शन,स्‍टॉक जमा करने में जुटे दवा कारोबारी

वरिष्‍ठ संवाददाता ,प्रयागराज Published By: Ajay Singh
Thu, 13 May 2021 01:52 PM
बाजार से गायब हुआ फंगल इंफेक्शन का इंजेक्‍शन,स्‍टॉक जमा करने में जुटे दवा कारोबारी

कोरोना वायरस खुद तो जान ले ही रहा है, इससे कई और तरह के इंफेक्शन फैल रहे हैं। कोरोना पीड़ितों के लिए रेमडेसिविर की खपत बढ़ी तो इसे लेकर बवाल की नौबत आ गई। देशभर में ब्लैक मार्केटिंग शुरू हो गई। रेमडेसिविर के बाद अब ब्लैक फंगल इंफेक्शन एवं अन्य इंफेक्शन में लगने वाले दो इंजेक्शन एंफोटेरेइसिन लाइको सोमल और एंफोटरइसिन प्लेन मार्केट से गायब हो गए हैं। इंफेक्शन के केसों में यह इंजेक्शन काफी फायदा पहुंचाते हैं। ऐसे में अचानक से इनकी मांग बढ़ गई। मांग बढ़ी तो थोक व फुटकर दवा की दुकानों में ये इंजेक्शन खत्म हो गए।

प्राइवेट अस्पतालों से आने वाले ज्यादातर पर्चों में इन इंजेक्शनों की डिमांड होने लगी है। केमिस्ट एवं ड्रग एसोसिएशन और चिकित्सकों की अहम बैठक में फंगल इंफेक्शन के इंजेक्शन को लेकर काफी देर चर्चा हुई। यह इंजेक्शन महज दो कंपनियां ही बनाती हैं, ऐसे में देशभर से अचानक मांग बढ़ने पर इंजेक्शन का मार्केट से गायब होना लाजिमी है। शहर के बड़े डाक्टरों ने एसोसिएशन से पदाधिकारियों से कहा है कि इंजेक्शन की खपत बढ़नी है। ऐसे में इसका स्टाक जमा कराया जाए। प्रमुख दवा कारोबारियों ने इंजेक्शन दूसरी जगहों से मंगाने की जद्​दोजहद शुरू कर दी है।

मार्केट से गायब हुए इन इंजेक्शनों की कीमत भी अच्छी खासी है। एंफोटरइसिन इंजेक्शन प्लेन 17 सौ रुपये में मिलता है वहीं इंजेक्शन एंफोटेरेइसिन लाइको सोमल की कीमत छह हजार रुपये है। प्रयाग केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष लालू मित्तल के मुताबिक, मरीज कम भी रहेंगे तो भी इस इंजेक्शन की जरूरत ज्यादा होगी। यह इंजेक्शन एक ही मरीज को 40 वायल तक लगाया जाता है। मतलब एक मरीज को 40 इंजेक्शन तक लगाने पड़ते हैं। एंफोटरइसिन इंजेक्शन प्लेन कम असर करता है, इसलिए लाइको सोमल की डिमांड बहुत ज्यादा है।

दरअसल, पिछले कई दिनों से प्राइवेट अस्पतालों के तमाम पर्चों में इस इंजेक्शन की डिमांड आ रही थी। माना जा रहा है कि ब्लैक फंगस के अलावा भी इंफेक्शन में यह काम आ रहा है। प्रयाग केमिस्ट एसोसिएशन और प्रमुख चिकित्सकों की वर्चुअल मीटिंग में यह मुद्​दा उठा। एसोसिएशन के अध्यक्ष लालू मित्तल ने डाक्टरों को बताया कि स्टॉक में जो इंजेक्शन थे, वह बिक गए। इसलिए भी कि यह इंजेक्शन कोरोना महामारी से पहले बहुत कम बिका करता था। दुकानदार खरीदकर रखते थे तो एक्सपायरी की नौबत आ जाती थी।

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