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पेट्रोल पंप के क्‍यूआर कोड से पार कर दिए 22 लाख, पुलिस ने दो खाते कराए होल्‍ड 

पेट्रोल पंप मालिक के खाते का QR कोड का एडमिन राइट कर्मियों ने हासिल कर लिया। पेट्रोल पंप पर आने वाले पेमेंट को एडमिन राइट के जरिये खुद के खाते में ट्रांसफर कर दो कर्मियों ने ठगी की।

पेट्रोल पंप के क्‍यूआर कोड से पार कर दिए 22 लाख, पुलिस ने दो खाते कराए होल्‍ड 
Ajay Singhहिन्‍दुस्‍तान,कानपुरMon, 29 Jan 2024 09:22 AM
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Online Fraud: पेट्रोल पंप मालिक के खाते का क्यूआर कोड का एडमिन राइट कर्मियों ने हासिल कर लिया। पेट्रोल पंप पर आने वाले पेमेंट को एडमिन राइट के जरिये खुद के खाते में ट्रांसफर कर दो कर्मियों ने ठगी की। पीड़ित ने साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज करायी। सेल ने विवेचना कर दो पेट्राल पंप कर्मियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपितों के पास से दस लाख रुपये बरामद किए गए हैं। एडीसीपी अपराध मनीष सोनकर ने बताया कि बीती 27 जनवरी को बर्रा-दो छेदी सिंह पुरवा निवासी रामनरेश अवस्थी ने साइबर थाने पर रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि गंगाबैराज रोड मंधना में उनका नीलम एचपी के नाम से पेट्रोल पंप है। 

पेटीएम मर्चेंट अकाउंट और एसबीआई अकाउंट के लेनदेन में करीब 22 लाख रुपये का हेरफेर है। थाना प्रभारी हरमीत सिंह ने पेटीएम अकाउंट और बैंक अकाउंट की डिटेल खंगाल कर विवेचना की तो पाया कि क्यूआर कोड के जरिये लिया गया रुपया कुछ लोगों को वापस लौटाया गया है। डिटेल निकाली तो वह पंप के दो कर्मियों हरिओम पाल और अन्नू पाल के मिले। कड़ाई से पूछताछ की तो अपराध कबूला। दोनों के खातों को होल्ड करा दिया गया।

ऐसे किया आरोपितों ने फ्रॉड
पेट्रोल पंप पर फ्यूल भरवाने आने वाले कस्टमर क्यूआर कोड के जरिये पेमेंट देने को कहते तो आरोपित वह रुपये अपने खाते में मंगवाते थे। जिसके बाद अपने खाते से पंप पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन कर पूरा पेमेंट कर देते। चूंकि पंप मालिक पेटीएम के अकाउंट में गये रुपये से ही रोज का हिसाब मिलाते जिससे रिसीव पेमेंट पूरा दिखता। पेमेंट भेजने के 24 घंटे में आरोपित एडमिन राइट प्रयोग कर कुछ रुपये अपने खातों में वापस मंगा लेते थे।

इस तरह पता चली ठगी
आरोपित लगभग आठ महीने से पंप मालिक से ठगी कर रहे थे। चूंकि पंप पर रोज बिके फ्यूल का हिसाब नगद और पेटीएम पर मिले पेमेंट्स के मिलान से होता है। जिसके चलते रोज हिसाब मैच हो जाता था। लेकिन पेटीएम द्वारा पंप मालिक रामनरेश के खाते में यह रुपये 24 घंटे में भेज दिये जाते थे। पेटीएम पर मिलने वाले रुपये और खाते में पेटीएम द्वारा ट्रांसफर किये जाने वाले रुपये में बीती आठ महीने से रोज हेर-फेर दिखा। पेटीएम पर मिलने वाले रुपये और खाते में भेजे गये रुपये का अंतर लगभग 22 लाख रुपये रहा। जिसपर मालिक को ठगी का एहसास हुआ।

यूं लिया पेमेंट राइट
एडीसीपी मनीष सोनकर के अनुसार आरोपित लंबे समय से पंप पर काम कर रहे थे। किसी तरह उन्होंने मालिक के मोबाइल नंबर पर आने वाले ओटीपी की मदद से पेमेंट्स राइट का आप्शन ऐक्टीवेट किया और इसी की मदद से रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करते रहे।

कर्ज और अय्याशी में उड़ा दिये 12 लाख रुपये
एडीसीपी मनीष के अनुसार अन्नू पाल ने ठगी के रुपये से कुछ हिस्सा मां के इलाज और घरेलू जरूरतों व कर्ज अदा करने में खर्च किया है। दूसरे आरोपित हरिओम ने यह रुपये अय्याशी और घरेलू जरुरतों को पूरा करने में खर्च कर दिये।

इंटर पास शातिर, किसी एक्सपर्ट का हाथ होने की आशंका
पंप पर काम करके ठगी करने वाले दोनों आरोपित बिठूर निवासी हरिओम पाल (19) और चौबेपुर निवासी अन्नू पाल (22) ने अपने-अपने खातों में राइट्स का प्रयोग कर 12.10 लाख और 9.59 लाख रुपये ट्रांसफर किये हैं। साइबर सेल के अधिकारियों के अनुसार आरोपितों को ठगी का यह तरीका कैसे सूझा इसके विषय में पूछताछ की जा रही है। फिलहाल आरोपितों ने ओटीपी के माध्यम से ठगी की बात कबूली है। आशंका है किसी आईटी एक्सपर्ट ने इनकी मदद की होगी। उसकी तलाश की जाएगी। विवेचना में जो तथ्य सामने आएंगें उन्हें जोड़कर कार्रवाई की जाएगी।

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