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धोखाधड़ी : रुपये खर्च कर नौकरी पाने की चाह में गंवा दिए 50 लाख

हिन्दुस्तान टीम,लखनऊPublished By: Deep Pandey
Mon, 20 Sep 2021 03:36 PM
धोखाधड़ी : रुपये खर्च कर नौकरी पाने की चाह में गंवा दिए 50 लाख

नौकरी की तलाश कर रहे युवक-युवती ठगों का आसान निशाना बन रहे हैं। सरकारी विभाग से लेकर निजी संस्थान में नियुक्ति कराने के बदले बेरोजगारों से रुपये ऐंठने वाले सक्रिय हैं। ऐसा ही मुकदमा विभूतिखंड कोतवाली में कृषि कुम्भ कम्पनी के खिलाफ दर्ज हुआ है। आरोप है कि 16 लोगों से करीब 40 लाख रुपये ठगों ने हड़पे हैं। विभूतिखंड कोतवाली में ही होम्योपैथिक कॉलेज की नर्स ने भी बहन की नौकरी लगवाने का दावा कर सवार लाख रुपये हड़पे जाने का मुकदमा दर्ज कराया है। इसी तरह गोमतीनगर थाने में जालसाज भाइयों के खिलाफ शिक्षा विभाग में नियुक्ति कराने के नाम पर सवा आठ लाख रुपये की धोखाधड़ी करने का मुकदमा लिखा गया है।

फेसबुक के जरिए बेरोजगारों से करते थे सम्पर्क

गोण्डा मनकापुर निवासी विकास तिवारी के अनुसार फेसबुक के जरिए उन्हें कृषि कुम्भ कम्पनी के बारे में पता चला था। जिसका दफ्तर विभूतिखंड में था। निजी कम्पनी ने यूपी के 75 जिलों में जिला विक्रय अधिकारी, विक्रय अधिकारी और किसान सहायक के पद पर भर्ती कराने का दावा किया था। जिसमें लिए 34 हजार से 12 हजार रुपये तक वेतन दिया जाना था। विकास तिवारी के मुताबिक उनके साथ सत्यजीत पाण्डेय, आकाश, अनूप कुमार, सुशील दुबे, दुर्गेश यादव, रुपेश मिश्रा, विवेक तिवारी, दुर्गेश कुमार, विनीत सिंह, अभिषेक मिश्रा, शिवपूजन पाण्डेय, हिमांशु तिवारी, संदीप सेंगर, आरिफ बेग व आदर्श कुमार ने कृषि कुम्भ में रजिस्ट्रेशन कराया था। अगस्त और सितंबर 2020 में सभी को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। कम्पनी प्रबंधक अरुण दुबे, एचआर शहबाज खालिद और खालिद अहमद ने साक्षात्कार लेने के बाद कुछ कागजों पर साइन कराए थे। अलग-अलग पदों पर नियुक्ति के लिए सिक्योरिटी मनी व अन्य मदों में कुल मिला कर 40 लाख रुपये लिए गए थे। जिसके बाद सभी को नियुक्ति पत्र, आईडी कार्ड और विजिटिंग कार्ड दिए गए थे। इतना ही नहीं आईएएस अधिकारी के तौर पर परिचय देने वाले हीरालाल और बैंक के रिटायर अधिकारी मुनीश से ट्रेनिंग दिलाने के बाद सभी को जिलों में भेजा गया था। लेकिन किसी को भी वेतन नहीं मिला था। पूछताछ करने पर आरोपी टाल मटोल करने लगे। काफी प्रयास के बाद युवकों को चेक दिए गए थे। जो बाउंस हो गए। इस बीच ठग दफ्तर पर ताला जड़ करर भाग निकले। इंस्पेक्टर के मुताबिक अरुण दुबे, शहबाज खालिद, खालिद बेग, विकास गुप्ता, हीरालाल और मुनीश के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है। 

दोस्त के झांसे में फंस कर गवांए रुपये

विरामखंड-पांच निवासी रविंद्र वर्मा की दोस्ती अम्बेडकरनगर निवासी संदीप से थी। जो अक्सर घर आता था। संदीपक दावा करता था कि उसका बड़ा भाई राधेश्याम शिक्षा विभाग में तैनात है। जल्द ही सहायक अध्यापक के पद पर भर्तियां होनी हैं। राधेश्याम के जरिए कई लोग नौकरी पा चुके हैं। अगर तुम चाहो तो काम बन सकता है। रविंद ने दोस्त के प्रस्ताव की जानकारी बड़े भाई विष्णु कुमार को दी। जिसके बाद विष्णु ने पत्नी और भाई की नौकरी लगवाने के लिए बात तय की थी। दोनों लोगों से कुछ फार्म भरवाने के बाद सवा आठ लाख रुपये लिए थे। कुछ वक्त बाद सहायक अध्यापक की सूची आने पर रविंद्र और उसकी भाभी का नाम नहीं आया था। जिस पर विष्णु ने राधेश्याम और संदीप से रुपये वापस मांगे। जिस पर उन्हें धमकी दी गई। जालसाज भाइयों से परेशान होकर विष्णु ने डीसीपी पूर्वी से मुलाकात कर उन्हें घटना की जानकारी दी। जिनके निर्देश पर गोमतीनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके अलावा राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज की नर्स प्रार्ची वर्मा ने बड़ी बहन की नौकरी लगवाने के लिए इन्दिरानगर सेक्टर-14 निवासी यश सिंह से सम्पर्क किया था। जिसने सवा लाख रुपये लेने के बाद भी नौकरी नहीं दिलाई। पीड़िता के मुताबिक यश ने खुद को ऑटो शोरूम का मालिक बताते हुए बातों में उलझाया था।

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