जूता कांड : मेंहदावल विधायक और पूर्व सांसद को हाईकोर्ट से राहत

Dinesh Rathour संतकबीरनगर। निज संवाददाता,
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पूर्व सांसद शरद त्रिपाठी और मेंहदावल विधायक राकेश सिंह बघेल के बीच हुए विवाद और जूता कांड में दोनों नेताओं को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। लंबी जद्दोजहद के बाद का हाईकोर्ट ने पुलिस की फाइनल रिपोर्ट को...

जूता कांड : मेंहदावल विधायक और पूर्व सांसद को हाईकोर्ट से राहत

पूर्व सांसद शरद त्रिपाठी और मेंहदावल विधायक राकेश सिंह बघेल के बीच हुए विवाद और जूता कांड में दोनों नेताओं को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। लंबी जद्दोजहद के बाद का हाईकोर्ट ने पुलिस की फाइनल रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए मामले को खत्म कर दिया है। वहीं दोनो नेताओं के विरुद्ध जारी वारंट भी निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट के निर्णय से दोनो नेताओं को काफी राहत मिली है। 

जिला योजना की बैठक में तत्कालीन सांसद शरद त्रिपाठी और मेंहदावल विधायक राकेश सिंह बघेल के बीच विवाद हुआ था। इस दौरान जूता भी चला। जिसमें कलेक्ट्रेट सदर नाजिर सैयद नफीसउल हसन ने तत्कालीन सांसद व मेंहदावल विधायक तथा कुछ अज्ञात लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। मामले में पुलिस द्वारा विवेचना के बाद अंतिम रिपोर्ट लगाई गई थी। पुलिस ने साक्ष्य के अभाव में मामले को खत्म करने की रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत किया। जिसे विशेष न्यायाधीश एमपी एमएलए दीपकांत मणि ने अस्वीकार करते हुए अग्रिम विवेचना कराए जाने का आदेश दिया।

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अग्रिम विवेचना में भी पुलिस द्वारा कोई साक्ष्य न पाए जाने पर न्यायालय में अंतिम रिपोर्ट पुनः प्रेषित की गई। विशेष न्यायाधीश एमपी एमएलए दीपकांत मणि ने पुलिस द्वारा दाखिल अंतिम रिपोर्ट को दूसरी बार भी अस्वीकार कर दिया था और अपनी टिप्पणी के साथ तत्कालीन सांसद शरद त्रिपाठी व मेंहदावल के विधायक राकेश सिंह बघेल को तलब कर लिया। लेकिन प्रस्तुत न होने पर न्यायालय ने दोनों नेताओं के विरुद्ध गैर जमानती वारंट भी जारी किया।

 इसके बाद दोनों नेता हाईकोर्ट में पहुंच गए। जहां से माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अग्रिम आदेश तक स्टे कर दिया गया था। उच्च न्यायालय इलाहाबाद में अंतिम बहस के बाद न्यायाधीश ने विशेष न्यायाधीश एमपी एमएलए दीप कांत मणि द्वारा दोनों नेताओं को तलब किए जाने के आदेश को निरस्त कर दिया । साथ ही पुलिस द्वारा दाखिल अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया । विधायक राकेश सिंह बघेल के अधिवक्ता रवीश श्रीवास्तव ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश में दोनों नेताओं के विरुद्ध हुए तलबी आदेश को निरस्त कर दिया गया व पुलिस द्वारा लगाया गया अंतिम रिपोर्ट स्वीकार कर लिया गया है।

जिला योजना समिति की बैठक में चला था जूता
छह मार्च 2019 को कलेक्ट्रेट सभागार में प्रभारी मंत्री आशुतोष टंडन की अध्यक्षता में जिला योजना समिति की बैठक आयोजित हुई थी। बैठक के दौरान तत्कालीन सांसद शरद त्रिपाठी और  मेंहदावल विधायक राकेश सिंह बघेल आपस में भिड़ गए। दोनों के बीच कहासुनी होने लगी। इस बीच शरद त्रिपाठी ने जूता निकालकर विधायक की पिटाई कर दी। पिटाई की सूचना से हड़कंप मच गया। मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना। लोक सभा चुनाव में चुनावी मुद्दा भी इसे अन्य पार्टियों ने बना दिया था। इस विवाद के कारण ही शरद त्रिपाठी को लोक सभा चुनाव में टिकट नहीं मिला था।

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Dinesh Rathour

लेखक के बारे में

Dinesh Rathour

दिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका (डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।

पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी है।

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