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हिंदी न्यूज़ उत्तर प्रदेशरामचरितमानस पर स्वामी प्रसाद मौर्य को मिला पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह का समर्थन, कहा- आपत्ति का उन्हें अधिकार

रामचरितमानस पर स्वामी प्रसाद मौर्य को मिला पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह का समर्थन, कहा- आपत्ति का उन्हें अधिकार

रामचरितमानस पर चौतरफा घिरे सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य को यूपी के पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह का साथ मिला है। सुलखान सिंह ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने मानस का अपमान नहीं किया है।

रामचरितमानस पर स्वामी प्रसाद मौर्य को मिला पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह का समर्थन, कहा- आपत्ति का उन्हें अधिकार
Yogesh Yadavलाइव हिन्दुस्तान,लखनऊMon, 30 Jan 2023 08:56 PM
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रामचरितमानस पर चौतरफा घिरे सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य को यूपी के पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह का साथ मिला है। सुलखान सिंह ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने मानस का अपमान नहीं किया है। मात्र कुछ अंशों पर आपत्ति जताई है, उन्हें इसका अधिकार है। रामचरितमानस पर बयान के बाद से स्वामी प्रसाद लगातार हिन्दुवादी संगठनों के साथ ही संतों-महंतों के निशाने पर हैं।

सुलखान सिंह जैसे वरिष्ठ पूर्व आईपीएस और डीजीपी के पद पर रहे अफसर का साथ मिलने से स्वामी प्रसाद को राहत जरूर मिली होगी। यूपी में पहली बार सत्ता संभालने के बाद सीएम योगी ने सुलखान सिंह को डीजीपी बनाया था। 

स्वामी प्रसाद का समर्थन करते हुए सुलखान सिंह ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा कि रामचरितमानस पर किसी जाति और वर्ग का विशेषाधिकार नहीं है। उन्होंने लिखा कि हिंदू समाज के तमाम प्रदूषित और अमानवीय ग्रंथों की निंदा तो करनी होगी। भारतीय ग्रंथों ने समाज को गहराई से प्रभावित किया है।

कहा कि इन ग्रंथों में जातिवाद, ऊंच-नीच, छुआछूत, जातीय श्रेष्ठता, हीनता आदि को दैवीय होना स्थापित किया गया है। अतः पीड़ित व्यक्ति और समाज अपना विरोध तो करेगा ही। साथ ही उन्होंने लिखा कि हिंदू समाज की एकता के लिए जरूरी है कि लोगों को अपना विरोध प्रकट करने दिया जाए। भारतीय ग्रंथ सबके हैं।

सुलखान सिंह ने लिखा कि कुछ अति उत्साहित उच्च जाति के हिंदू हर ऐसे विरोध को गाली-गलौज और निजी हमले करके दबाना चाहते हैं। ये वर्ग चाहता है कि सदियों से शोषित वर्ग, इस शोषण का विरोध न करे, क्योंकि वह इसे धर्म विरोधी बताते हैं।

चौरतफा हमलों के बाद भी बयान पर कायम

रामचरितमानस पर बयान देकर हिन्दुवादी संगठनों और संतों-महंतों के निशाने पर आए सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य चौतरफा हमलों के बाद भी अपने बयान पर कायम हैं। वह लगातार अपनी बात को दोहरा भी रहे हैं। यही नहीं, उन्होंने संतों-महंतों पर पलटवार भी शुरू कर दिया है। उनका हमला भी तीखा होता जा रहा है। सोमवार को ही उन्होंने  अयोध्या के महंत राजू दास पर निशाना साथा। राजू दास ने स्वामी प्रसाद का सिर काटने वाले को 21 लाख रुपए इनाम देने का ऐलान किया है। 

स्वामी प्रसाद ने बिना नाम लिए राजूदास के साथ ही बागेश्वरधाम के धीरेंद्र शास्त्री पर भी निशाना साधा। स्वामी प्रसाद ने कहा कि हर असंभव कार्य को संभव करने की नौटंकी करने वाले एक धाम के बाबा की धूम मची है। आप कैसे बाबा है जो सबसे सशक्त पीठ के महंत होने के बावजूद सिर तन से जुदा करने की सुपारी दे रहे हैं। श्राप देकर भी तो भस्म कर सकते थे। 21 लाख ₹भी बचता, असली चेहरा भी बेनकाब न होता।

संतो-महंतों को लेकर तेवर उग्र

स्वामी प्रसाद ने पहली बार संतों को इस तरह से निशान पर नहीं लिया है। रामचरितमानस पर विवाद के बाद वह संतों और महंतों को महाशैतान, जल्लाद जैसे शब्दों से निशाने पर ले चुके हैं। यहां तक कि विवाद भेड़िया और कुत्ते तक पहुंच गया है। जैसे-जैसे स्वामी प्रसाद पर हमले हो रहे हैं, वैसे-वैसे उनके तेवर भी और उग्र होते जा रहे हैं। 

शनिवार को स्वामी प्रसाद ने कहा था कि अभी हाल में मेंरे दिये गये बयान पर कुछ धर्म के ठेकेदारों ने मेरी जीभ काटने एवं सिर काटने वालों को इनाम घोषित किया है, अगर यही बात कोई और कहता तो यही ठेकेदार उसे आतंकवादी कहते, किंतु अब इन संतों, महंतों, धर्माचार्यों व जाति विशेष लोगों को क्या कहा जाए आतंकवादी, महाशैतान या जल्लाद।

स्वामी प्रसाद ने कहा कि अभी तक शूद्र वर्ण व्यवस्था का एक अंग था और अब हनुमान धाम के शास्त्री के अनुसार संतुलन खोने वाला शूद्र होता है नए ज्ञान के लिए धन्यवाद, मतलब यह मान लें कि मेरे बयान पर जिन संतों, महंतों, धर्माचार्यों व जाति विशेष ने पागलों की तरह संतुलन खोकर अनाप-शनाप कहा है वह सभी शूद्र व नीच हैं। 

भेड़िए और कुत्तों से तुलना कर दी

स्वामी प्रसाद यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि देश की महिलाओं, आदिवासियों, दलितों एवं पिछड़ों के सम्मान की बात क्या कर दी, मानो भूचाल आ गया। एक-एक करके संतो, महंतों, धर्माचार्यों का असली चेहरा बाहर आने लगा। सिर, नाक, कान काटने पर उतर आये। कहावत सही है कि मुंह में राम बगल में छुरी। धर्म की चादर में छिपे, भेड़ियों से बनाओ दूरी। 

 संतों-महंतों को भेड़िया तक कहने के बाद रविवार को विवाद कुत्ते तक पहुंच गया। स्वामी प्रसाद ने ट्वीट करते हुए लिखा कि धर्म की दुहाई देकर आदिवासियों, दलितों-पिछड़ों व महिलाओं को अपमानित किए जाने की साजिश का विरोध करता रहूंगा। जिस तरह कुत्तों के भौंकने से हाथी अपनी चाल नहीं बदलती उसी प्रकार इनको सम्मान दिलाने तक मैं भी अपनी बात नहीं बदलूंगा।

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