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पूर्व अस्सिटेंट कैन मैनेजर ने खुद को गोली से उड़ाया, पूर्व IAS बहनोई पर मुकदमा

Suicide

आदर्श मंडी थानाक्षेत्र के गांव बधैव में शुगर मिल के पूर्व अस्सिटेंट कैन मैनेजर जनविजय पुत्र बीर सिंह ने बुधवार रात लाइसेंसी रिवाल्वर से खुद को गोली से उड़ा लिया। मृतक के कमरे से मिले सुसाइड में जनविजय ने मौत का जिम्मेदार अपने बहनोई विनोद पंवार को ठहराया है। विनोद पंवार रिटायर्ड आईएएस हैं। वह 2015 में बिजनौर डीएम के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।

सुसाइड नोट के मुताबिक नोटबंदी के बाद से बहनोई दस करोड़ रुपये बदलवाने का दबाव बना रहा था। जनविजय ने पैसा बदलवाने से मना कर दिया। इसके अलावा, जनविजय की मां की गाजियाबाद के दुहाई में छह बीघा जमीन भी कब्जाने का आरोप विनोद पंवार पर है। जनविजय की पत्नी अंजू ने विनोद पंवार पर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया है।

थानाध्यक्ष राजकुमार शर्मा का कहना है कि मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। सुसाइड नोट को मृतक की हेड राइटिंग से मिलान कराने के लिए जांच को भेजा गया है। साथ ही लाइसेंसी रिवाल्वर को भी पुलिस ने कब्जे में ले लिया है।

कई माह से नौकरी पर नहीं जा रहा था जनविजय
गांव बंधेव निवासी जनविजय पुत्र बीरसिंह ऊन शुगर मिल में अस्सिटेंट कैन मैनेजर थे। बताया जा रहा है कि वह विगत कई माह से नौकरी पर नहीं जा रहे थे। यह भी चर्चा है कि उन्हें नौकरी से हटा दिया गया था।

52 लाख रुपये बदलवा भी दिए थे जनविजय ने
पत्नी अंजू का आरोप है कि जनविजय से बहनोई विनोद पंवार ने नोटबंदी के बाद 52 लाख रुपये बदलवा भी लिए थे, जबकि वह बीस करोड रुपये बदलवाने का दबाव बना रहे थे। इसके अलावा उनकी माता के नाम गाजियाबाद के दुहाई गांव में छह बीघा जमीन है। उक्त जमीन भी उनके बहनोई ने कब्जा रखी है। इन सबको लेकर पति जनविजय एवं उनका परिवार दबाव में था। 

इस प्रकार है सोसाइड नोट
मेरी मौत के जिम्मेदार मेरे बहनोई विनोद पंवार हैं, जिसने नोटबंदी के समय कुछ रुपये बदलवाने को दिए थे। वे लोंगों द्वारा न देने पर वापस नहीं हो सके। विनोद कुमार पंवार मुझे तभी से प्रताड़ित कर रहा है, और मैं डिप्रेसन में आकर आत्महत्या कर रहा हूं, जिसका पूरा जिम्मेदार विनोद पंवार है। विनोद पंवार ने मेरी मां की छह बीघा जमीन जो दुहाई में है वो भी कब्जा ली है और मेरे परिवार को भी परेशान कर रहा है। दस करोड़ रुपये बदलवाने का दबाव बना रहा है। मैंने उसे मना कर दिया। पचास लाख बदलवा दिए। 

सभी आरोप बेबुनियाद: विनोद पंवार
सेवानिवृत्त आईएएस विनोद पंवार ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया। उनका कहना है कि उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। लगभग साढ़े तीन माह पहले उनकी आंखों का ऑपरेशन हुआ है। तब से वह बैड रेस्ट पर हैं। इस दौरान उनकी जनविजय व उसके परिवार से कोई बातचीत नहीं हुई। जनविजय का एक साला जो मुजफ्फरनगर में रहता है, उसने अपने पत्नी और बच्चों घर से निकाल रखा, जहां तक सोसाइड नोट की बात है तो वह भी मृतक के साले को ही मिला है, यह भी संदेहास्पद है। नोटबंदी डेढ़ साल पहले हुई थी, अब इस बात का क्या मतलब है। यह सब प्री प्लान है। वर्ष 2016 में जनविजय शुगर मिल में था, इसके बाद उन्हें निकाल दिया गया था। वह तो उन्हें छोटे भाई की तरह मानते थे। उनकी दो बार नौकरी भी उन्होंने ही लगवाई थी। नोट बदलवाने का आरोप सरासर गलत है। दूसरे घटना की जानकारी किसी अन्य रिश्तेदार मृतक की बहन व मामी आदि रिश्तेदारों को नहीं दी गयी। वह किसी भी जांच के लिए तैयार है।

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  • Web Title:Former Assistant CAN Manager shot himself in shamli uttar pradesh