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आज सावन का पहला सोमवार, ऐसे करें भगवान शिव की पूजा

वाराणीस के काशी विश्वनाथ का जलाभिषेक करने के लिए लंबी कतार

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वाराणीस के काशी विश्वनाथ का जलाभिषेक करने के लिए लंबी कतार

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इस साल सावन का पहला सोमवार आज 30 जुलाई को है। माना जाता है सावन के सभी सोमवार विधपूर्वक भगवान की शिव की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वाराणीस के काशी विश्वनाथ का जलाभिषेक करने के लिए रविवार की देर रात से ही कांवरियों की लंबी कतार मंदिर के बाहर लग गई।
इसके अलावा सभी शिव मंदिर में भी भक्तों की लंबी कतारें लगी रही। 

ऐसे करें सावन का  व्रत
-व्रत का संकल्प करने की आवश्यकता ऩहीं है। व्रत का संकल्प तभी होगा यदि तीस दिन के रख रहे हों
-हर सोमवार को भगवान शंकर का ध्यान करते हुए व्रत करें। शाम को तीसरे पहर के बाद व्रत का परायण करें
-फलाहार करें। व्रत खोलने से पहले भगवान शँकर का दूध से  अभिषेक कर सकें तो बहुत अच्छा।
-तामसिक भोजन का परित्याग करें। टमाटर, बैगुन आदि का प्रयोग न करें।
-सावन के हर सोमवार को व्रत करने का विशेष महत्व है। हर सोमवार को भगवान शंकर का अभिषेक करें काले तिल से।
-ध्यान रखें, तीस व्रतों का संकल्प सफेद तिलों से होगा। सावन के सोमवार का संकल्प नहीं होगा लेकिन भगवान शंकर का अभिषेक काले तिलों से होगा।

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पूजा का ध्यान
-आप नियमित जो भी पूजा जिस भी क्रम में कर रहे हैं करते रहिए।
-गणपति के बाद भगवान शंकर की पूजा करिए। सावन में यही क्रम रखें- पहले पर गणपति, दूसरे पर शंकर जी, तीसरे पर दुर्गा, चौथे पर भगवान विष्णु, पांचवे पर नवग्रह।
-सावन के महीने में ऊं नम: शिवायै का जाप करें। कोशिश करें कि 11, 7 या 3 माला हो जाएं।
-श्रावण मास में शिवरात्रि तक ऊं नम: शिवायै और महाशिवरात्रि में महामृत्युजंय मंत्र का जाप होता है।

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सावन के सोमवार की पूजा विधि -
1- प्रात: काल स्नान करके ताजे विल्बपत्र लाएं। पांच या सात साबुत विल्बपत्र साफ पानी से धोएं और फिर उनमें चंदन छिड़कें या चंदन से ऊं नम: शिवाय लिखें।
2- इसके बाद तांबे के लोटे (पानी का पात्र) में जल या गंगाजल भरें और उसमें कुछ साबुत और साफ चावल डालें। और अंत में लोटे के ऊपर विल्बपत्र और पुष्पादि रखें।
3- विल्बपत्र और जल से भरा लोटा लेकर पास के शिव मंदिर में जाएं और वहां शिवलिंग का रुद्राभिषेक करें। रुद्राभिषेक के दौरान ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप या भगवान शिव को कोई अन्य मंत्र का जाप करें।
4- रुद्राभिषेक के बाद समय होता मंदिर परिसर में ही शिवचालीसा, रुद्राष्टक और तांडव स्त्रोत का पाठ भी कर सकते हैं।
5- मंदिर में पूजा करने बाद घर में पूजा-पाठ करें। इसके बार व्रत वार या गैर व्रत वाला सुविधानुसार प्रसाद ग्रहण करें।

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